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नोएडा शहर के रहने वाले नवाब सिंह नागर खूब चर्चा में हैं। उनकी चर्चा का कारण उन्हें भारतीय जनता पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिलना है। भाजपा ने नवाब सिंह नागर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी है।

नोएडा शहर के रहने वाले नवाब सिंह नागर खूब चर्चा में हैं। उनकी चर्चा का कारण उन्हें भारतीय जनता पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिलना है। भाजपा ने नवाब सिंह नागर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी है। उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा का क्षेत्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। लोग जानना चाहते हैं कि जिस नेता ने नोएडा शहर से अपना राजनैतिक सफर शुरू किया था वह नेता इतने बड़े मुकाम तक कैसे पहुंचा। हम आपको विस्तार से बता रहे हैं भाजपा नेता नवाब सिंह नागर के बड़े नेता बनने के सफर की पूरी कहानी। नवाब सिंह नागर को नोएडा में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना करने वाला नेता माना जाता है।
आपको बता दें कि नेता नवाब सिंह नागर को नोएडा में भारतीय जनता पार्टी का संस्थापक माना जाता है। नवाब सिंह नागर कॉलेज के समय से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े रहे हैं। वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन के बाद उन्हें नोएडा का पहला मंडल अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद उन्होंने संगठन विस्तार और पार्टी को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया। पार्टी के शुरुआती दौर से जुड़े होने के कारण उन्हें भाजपा के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिना जाता है। संगठन में लंबे समय तक काम करने का अनुभव उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है।
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नवाब सिंह नागर का राजनीतिक सफर कई दशकों पुराना है। उन्होंने पहली बार वर्ष 1993 में भाजपा उम्मीदवार के रूप में दादरी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भी उन्होंने क्षेत्र में सक्रियता बनाए रखी। वर्ष 1996 में उन्होंने दादरी विधानसभा सीट से जीत दर्ज कर पहली बार विधायक बनने का मौका हासिल किया। इसके बाद वर्ष 2002 में वह दोबारा इसी सीट से विधायक चुने गए। उसी दौरान भाजपा सरकार में उन्हें उत्तर प्रदेश का सिंचाई मंत्री बनाया गया। अपने राजनीतिक जीवन के दौरान नवाब सिंह नागर ने किसानों और स्थानीय लोगों से जुड़े कई मुद्दों को उठाया। उन्होंने स्टांप शुल्क, नोएडा के विकास, जिला बहाली और किसानों के अधिकारों जैसे विषयों पर आंदोलन किए। इन आंदोलनों के दौरान उन्हें कई बार गिरफ्तार भी किया गया। वर्ष 2014 से 2016 के बीच उन्होंने डीएनडी फ्लाईवे पर टोल वसूली के विरोध में अभियान चलाया। धरना, प्रदर्शन और जनसंपर्क के माध्यम से उन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। इसके अलावा यमुना प्राधिकरण और भूमि आवंटन से जुड़े मामलों में भी उन्होंने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
संगठन में लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण पार्टी ने उन्हें समय-समय पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपीं। वर्ष 2013 में उन्हें भाजपा किसान मोर्चा का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया। इसके अलावा वह उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। भाजपा के भीतर उनकी पहचान ऐसे नेता की रही है जो संगठन के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के बीच भी लगातार सक्रिय रहे हैं। यही वजह है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी है।
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नवाब सिंह नागर का राजनीतिक सफर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। वर्ष 2015 में दादरी के बिसाहड़ा गांव में मोहम्मद अखलाक की हत्या के बाद दिए गए उनके कुछ बयानों को लेकर राजनीतिक विवाद हुआ था। विपक्षी दलों ने उनके बयानों पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में जब भाजपा ने उन्हें दादरी सीट से टिकट नहीं दिया तब उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय पार्टी के अंदरूनी राजनीतिक समीकरण भी चर्चा का विषय बने थे।
भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी ऐसे समय में नवाब सिंह नागर को सौंपी है जब पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। माना जा रहा है कि उनकी जिम्मेदारी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाना और क्षेत्र में पार्टी की चुनावी रणनीति को प्रभावी ढंग से लागू करना होगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश राजनीतिक रूप से भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में नवाब सिंह नागर की नई जिम्मेदारी को आगामी चुनावों की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
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