केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना शुरू की है।

केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी स्टोरेज और रक्षा क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला को घरेलू स्तर पर मजबूत करने के लिए 2,814 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 4 नवंबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए इस योजना को मंजूरी दी गई। इस योजना का नाम ‘कैपेक्स सपोर्ट स्कीम टू प्रमोट क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग’ रखा गया है, जिसकी कुल अवधि पांच वर्ष होगी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए इसे बुधवार के प्रमुख निर्णयों में से एक बताया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य खनन या रीसाइक्लिंग से प्राप्त कच्चे माल को विनिर्माण के लिए तैयार स्तर तक पहुंचाना है। यह योजना सरकार द्वारा चिह्नित सभी 24 क्रिटिकल मिनरल्स से जुड़ी है, जिनका उपयोग सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, भारी मशीनरी और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जाता है।
योजना के तहत कुल चार प्रोसेसिंग संयंत्र लगाए जाएंगे। इसमें न्यूनतम 30 किलो टन क्षमता वाले दो लिथियम संयंत्र और न्यूनतम 50 किलो टन क्षमता वाले दो निकल संयंत्र शामिल होंगे। अधिकारियों के अनुसार, निकल प्रोसेसिंग के सह-उत्पाद के रूप में कोबाल्ट तैयार किया जाएगा। सरकार पात्र निवेश पर 30 प्रतिशत तक की पूंजीगत सब्सिडी यानी कैपेक्स सपोर्ट प्रदान करेगी।
वित्तीय सहायता की एक अधिकतम सीमा तय की गई है, जिसके तहत प्रति लिथियम परियोजना 500 करोड़ रुपये और प्रति निकल परियोजना 900 करोड़ रुपये तक की मदद दी जाएगी। प्रोत्साहन राशि का वितरण परियोजना के तय चरणों यानी माइलस्टोन से जोड़कर तीन किस्तों में किया जाएगा।
लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में आवेदकों का तकनीकी मूल्यांकन होगा और उसके बाद वित्तीय बोली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। चयन का आधार यह होगा कि जो आवेदक सबसे कम पूंजीगत सहायता की मांग करेंगे, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
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सरकारी बयान के अनुसार, वर्तमान में इन खनिजों की प्रोसेसिंग दुनिया के कुछ ही देशों तक सीमित है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में जोखिम बना रहता है। भारत अभी भी उच्च शुद्धता वाले निकल और लिथियम के मध्यवर्ती उत्पादों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है। घरेलू क्षमता विकसित करने को आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों के लिए आवश्यक माना गया है, जिसे आत्मनिर्भर भारत अभियान से जोड़ा गया है। यह निर्णय बैटरी निर्माण, ईवी और ग्रिड स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में घरेलू निवेश के नए रास्ते खोल सकता है। अब संबंधित मंत्रालय की ओर से विस्तृत दिशानिर्देश और बोली प्रक्रिया की समय-सारणी जारी की जानी है। पात्र कंपनियों को आधिकारिक घोषणा के बाद तकनीकी और वित्तीय बोली में हिस्सा लेना होगा। इस योजना में आम नागरिकों के लिए आवेदन की कोई व्यवस्था नहीं है।
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