गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए बड़ी राहत, जान लें सहारा योजना के फायदे

मुख्यमंत्री सहारा योजना हिमाचल प्रदेश के गंभीर बीमारियों से ग्रस्त आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए प्रति माह ₹3000 की वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस योजना के तहत कैंसर, पार्किंसन, लकवा, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और क्रोनिक रीनल फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों वाले मरीज लाभान्वित होते हैं।

Mukhyamantri Sahara Yojana
मुख्यमंत्री सहारा योजना
locationभारत
userअसमीना
calendar27 Feb 2026 01:11 PM
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने गंभीर बीमारियों से ग्रसित आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए मुख्यमंत्री सहारा योजना शुरू की है। इस योजना के माध्यम से मरीजों को उनके इलाज के दौरान होने वाली आर्थिक कठिनाइयों से राहत दी जाती है। योजना के तहत प्रति माह ₹3000 की वित्तीय सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में दी जाती है। अब तक इस योजना से 33,000 से अधिक मरीज लाभान्वित हो चुके हैं और उन्हें अपनी बीमारियों के दौरान आर्थिक सुरक्षा मिली है।

सहारा योजना का उद्देश्य और महत्व

प्रदेश में कई लोग ऐसे हैं जो गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, पार्किंसन, लकवा, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और क्रोनिक रीनल फेलियर से ग्रस्त हैं। ऐसे में उनके इलाज पर काफी खर्च आता है जिसे उठाना अधिकांश परिवारों के लिए मुश्किल होता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020-2021 में मुख्यमंत्री सहारा योजना की शुरुआत की। इसका मुख्य उद्देश्य मरीजों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है ताकि वे अपने इलाज पर ध्यान केंद्रित कर सकें और आर्थिक बोझ कम महसूस करें।

सहारा योजना की विशेषताएं

मुख्यमंत्री सहारा योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है। यह गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों के सम्मान और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने का भी प्रयास है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को प्रति माह ₹3000 की राशि दी जाती है। यह राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा की जाती है और लाभार्थी इसे अपने इलाज या अन्य आवश्यक खर्चों में उपयोग कर सकते हैं।

सहारा योजना पात्रता मानदंड

इस योजना का लाभ केवल हिमाचल प्रदेश का स्थायी निवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से संबंधित व्यक्ति उठा सकता है। साथ ही, लाभार्थी की कुल वार्षिक आय 4 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना में शामिल गंभीर बीमारियों में मलयिगनेंट कैंसर, पार्किंसन, लकवा, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफिलिया, थैलासीमिया और क्रोनिक रीनल फेलियर शामिल हैं। इसके अलावा कोई अन्य घातक बीमारी जो व्यक्ति को स्थायी रूप से अक्षम कर दे, भी योजना के दायरे में आती है।

सहारा योजना की आवेदन प्रक्रिया

मुख्यमंत्री सहारा योजना में आवेदन करना आसान है। लाभार्थी अपने नजदीकी स्वास्थ्य विभाग या चिकित्सा अधिकारी के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, ऑनलाइन आवेदन भी उपलब्ध है जिसे योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भरा जा सकता है। आवेदन के समय आवश्यक दस्तावेजों में आधार कार्ड, परिवार का आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, बीमारी का प्रमाण पत्र और बैंक खाता विवरण शामिल हैं।

सहारा योजना से मिलने वाले लाभ

इस योजना से लाभार्थियों को वित्तीय राहत मिलने के साथ-साथ मानसिक सहारा भी मिलता है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज अब इलाज के खर्च को लेकर तनाव महसूस नहीं करते। योजना उन्हें अपने जीवन और स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देती है। हिमाचल प्रदेश सरकार का स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग इस योजना का संचालन करता है और यह सुनिश्चित करता है कि आर्थिक सहायता सीधे और समय पर लाभार्थियों तक पहुंचे।

सहारा योजना आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

योजना का लाभ पाने के लिए आवेदक के पास निम्नलिखित दस्तावेज होना अनिवार्य है-

  • आधार कार्ड
  • परिवार का आय प्रमाण पत्र
  • निवास प्रमाण पत्र
  • जन्म प्रमाण पत्र
  • राशन कार्ड
  • बीमारी का प्रमाण पत्र (डॉक्टर द्वारा जारी)
  • बैंक खाते का विवरण
  • आवेदनकर्ता का हस्ताक्षर और फोटो

इन दस्तावेजों के आधार पर ही आवेदन को मंजूरी दी जाती है और सहायता राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।

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कृषक बंधु योजना: जानिए कैसे करें आवेदन और कौन-कौन है लाभार्थी?

Krishak Bandhu Scheme: पश्चिम बंगाल सरकार की कृषक बंधु योजना के तहत अब भूमिहीन कृषि मजदूर भी आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को सालाना कुल 4000 रुपये दिए जाएंगे, जो सीधे उनके बैंक खातों में जमा होंगे।

Krishak Bandhu Scheme
कृषक बंधु योजना
locationभारत
userअसमीना
calendar27 Feb 2026 03:03 PM
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पश्चिम बंगाल सरकार ने किसानों के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। कृषक बंधु योजना के तहत अब सिर्फ जमीन वाले किसान ही नहीं बल्कि जो लोग भूमिहीन कृषि मजदूर हैं वे भी सालाना 4000 रुपये तक की आर्थिक सहायता पा सकेंगे। यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य किसानों और कृषि मजदूरों को आर्थिक सुरक्षा देना और उनके जीवन को आसान बनाना है।

बिना जमीन वाले कृषि मजदूरों के लिए नया अवसर

अब पश्चिम बंगाल के सभी भूमिहीन कृषि मजदूर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। जिन लोगों के पास अपनी खेती की जमीन नहीं है या जो शेयरक्रॉपर/बटाईदार के रूप में पंजीकृत नहीं हैं, वे भी शामिल किए जाएंगे। इस योजना के तहत साल में दो किस्तों में 2000-2000 रुपये दिए जाएंगे एक रबी सीजन में और दूसरी खरीफ सीजन में। इसका मतलब है कि कुल मिलाकर हर साल 4000 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में आएंगे। यह नई सुविधा अगले अप्रैल महीने से लागू हो जाएगी।

कृषक बंधु योजना के लिए आवेदन कैसे करें?

कृषक बंधु योजना में आवेदन ऑफलाइन किया जाता है। इसके लिए राज्य सरकार अपने इलाके में सरकारी शिविर या दुआरे सरकार / आत्मनिर्भर बंगाली कैंप लगाती है। इन शिविरों में आवेदन स्वीकार किए जाते हैं। कैंप में कृषि विभाग के सहायक अधिकारी दस्तावेजों की जांच कर आवेदन को मंजूरी देते हैं। जांच पूरी होने के बाद राशि सीधे बैंक खाते में DBT के माध्यम से भेज दी जाती है।

किन दस्तावेजों की जरूरत होगी?

योजना के तहत आवेदन करने के लिए निम्नलिखित दस्तावेज तैयार रखने होंगे-

  • आधार कार्ड
  • वोटर कार्ड
  • बैंक पासबुक के पहले पेज की फोटोकॉपी
  • आधार और बैंक से लिंक किया हुआ मोबाइल नंबर
  • पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो और आवेदक के हस्ताक्षर
  • कृषि मजदूर होने का स्व-घोषणा पत्र (Self-declaration)
  • आधार जानकारी उपयोग करने की अनुमति (Consent)

इन दस्तावेजों के साथ आवेदन करना सुनिश्चित करें, ताकि आपका आवेदन बिना किसी रुकावट के प्रक्रिया में आ जाए।

कृषक बंधु योजना का महत्व

यह योजना न केवल आर्थिक मदद देती है बल्कि कृषि मजदूरों के जीवन में स्थिरता और सुरक्षा लाती है। भूमिहीन किसानों को अब भी योजना का लाभ मिलेगा जिससे उनकी आय बढ़ेगी और वे कृषि के लिए जरूरी संसाधनों का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। यह राज्य सरकार का एक मजबूत कदम है जो किसानों और कृषि मजदूरों की भलाई को सुनिश्चित करता है।

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उत्तराखंड सरकार ने जारी किया नंदा गौरा योजना का पैसा, कैसे मिलेगा आपको फायदा?

उत्तराखंड सरकार की नंदा गौरा योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश की 33,251 बेटियों को कुल 145.93 करोड़ रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे गए हैं। यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का सशक्त अभियान है।

Nanda Gaura Yojana
नंदा गौरा योजना
locationभारत
userअसमीना
calendar27 Feb 2026 12:13 PM
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उत्तराखंड की बेटियों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नंदा गौरा योजना ने एक बार फिर दिखा दिया कि वह सिर्फ शब्दों में नहीं बल्कि कदमों में भी बेटियों के साथ खड़ी है। इस योजना के तहत इस साल 33,251 बेटियों के खाते में कुल 145.93 करोड़ रुपये सीधे भेजे गए हैं। यह केवल आर्थिक मदद नहीं बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का सशक्त संदेश भी है। योजना की खासियत यह है कि यह बालिका जन्म से लेकर उनकी शिक्षा और भविष्य तक हर कदम पर उन्हें साथ देती है जिससे समाज में बेटियों की भूमिका और अधिकार मजबूत हों।

नंदा गौरा योजना क्या है?

नंदा गौरा योजना उत्तराखंड सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है जिसका उद्देश्य बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत सरकार बेटियों के जन्म से लेकर उनकी उच्च शिक्षा तक हर कदम पर आर्थिक और सामाजिक सहायता देती है। योजना के तहत बालिका के जन्म पर 11,000 रुपये और 12वीं उत्तीर्ण कर उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने पर 51,000 रुपये मिलता है। इससे बेटियां आत्मनिर्भर बन सकें और अपने सपनों को पूरा कर सकें। यह योजना समाज में लैंगिक असमानता को कम करने और कन्या भ्रूण हत्या रोकने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

मुख्यमंत्री और मंत्री का संदेश

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि नंदा गौरा योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं है बल्कि बेटियों के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का सशक्त अभियान है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने कहा कि यह योजना बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने, संस्थागत प्रसव बढ़ाने, बाल विवाह रोकने और बेटियों की उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने में प्रभावी साबित हुई है। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार बेटियों के हर कदम पर उनका साथ दे रही है।

जिलेवार लाभार्थियों की संख्या

उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में योजना के लाभार्थियों की संख्या इस प्रकार है-

अल्मोड़ा: जन्म 643, 12वीं 2963

बागेश्वर: जन्म 240, 12वीं 1167

चमोली: जन्म 196, 12वीं 1761

चम्पावत: जन्म 285, 12वीं 1410

देहरादून: जन्म 678, 12वीं 2637

नैनीताल: जन्म 1012, 12वीं 3196

पौड़ी: जन्म 227, 12वीं 1990

पिथौरागढ़: जन्म 243, 12वीं 1936

रुद्रप्रयाग: जन्म 172, 12वीं 1235

टिहरी: जन्म 485, 12वीं 2775

ऊधमसिंहनगर: जन्म 1372, 12वीं 4772

उत्तरकाशी: जन्म 360, 12वीं 1496

कुल लाभार्थी: 33,251

कुल वितरित राशि: ₹145.93 करोड़

नंदा गौरा योजना का महत्व

यह योजना केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। यह बेटियों को सशक्त, आत्मनिर्भर और शिक्षित बनाने का प्रयास है। इसके जरिए राज्य सरकार लैंगिक असमानता को कम करने, कन्या भ्रूण हत्या रोकने और समाज में बेटियों के सम्मान को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। नंदा गौरा योजना का सबसे बड़ा असर यह है कि यह बेटियों को सपनों को साकार करने और शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देती है जिससे उनका भविष्य मजबूत और सुरक्षित बन सके। 

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