Lado Protsahan Yojana: लाडो प्रोत्साहन योजना में सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अब दो से अधिक संतान होने की शर्त खत्म कर दी गई है। पहले कई परिवार सिर्फ इसी नियम की वजह से योजना का लाभ नहीं ले पा रहे थे। सरकार के इस फैसले से अब बड़ी संख्या में नई बालिकाएं भी योजना के दायरे में आ जाएंगी।

Lado Protsahan Yojana: पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के बीच जहां कई परिवार घरों में बैठकर सरकारी योजनाओं की जानकारी जुटा रहे हैं वहीं बेटियों के भविष्य से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सरकार ने लाडो प्रोत्साहन योजना को लेकर अहम बदलाव किए हैं जिससे अब पहले से अधिक परिवारों की बेटियां इस योजना का लाभ उठा सकेंगी। सबसे बड़ी राहत यह है कि योजना में लंबे समय से लागू एक महत्वपूर्ण शर्त को हटा दिया गया है। इसके साथ ही सरकार ने भुगतान प्रक्रिया को भी तेज करने के निर्देश दिए हैं ताकि पात्र बालिकाओं को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।
राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल लाडो प्रोत्साहन योजना का उद्देश्य बेटियों की पढ़ाई को आर्थिक मजबूती देना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसी योजना की समीक्षा के लिए गुरुवार को शासन सचिवालय में बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश कुमार यादव ने की। इस दौरान विभाग के निदेशक सीताराम जाट समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में साफ कहा गया कि योजना का लाभ हर पात्र बालिका तक बिना किसी देरी के पहुंचना चाहिए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिन मामलों में तकनीकी कारणों से भुगतान अटका हुआ है उन्हें प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।
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लाडो प्रोत्साहन योजना में सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अब दो से अधिक संतान होने की शर्त खत्म कर दी गई है। पहले कई परिवार सिर्फ इसी नियम की वजह से योजना का लाभ नहीं ले पा रहे थे। सरकार के इस फैसले से अब बड़ी संख्या में नई बालिकाएं भी योजना के दायरे में आ जाएंगी। इसके साथ ही एक और अहम फैसला लिया गया है। अब केवल सरकारी स्कूलों की छात्राएं ही नहीं बल्कि मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में पढ़ने वाली पात्र बालिकाएं भी इस योजना का लाभ ले सकेंगी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अगस्त 2024 से अब तक 6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को लाडो प्रोत्साहन योजना का लाभ मिल चुका है। पात्र बालिकाओं को कुल 1.50 लाख रुपये का संकल्प पत्र दिया जाता है जिसकी राशि अलग-अलग चरणों में तय नियमों के अनुसार उपलब्ध कराई जाती है। सरकार का मानना है कि इससे बेटियों की शिक्षा बीच में नहीं रुकेगी और परिवारों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा।
समीक्षा बैठक में अधिकारियों से कहा गया कि योजना के संचालन में आने वाली सभी तकनीकी दिक्कतों को जल्द दूर किया जाए। सरकार चाहती है कि लाभार्थियों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसी वजह से लंबित मामलों को जल्द निपटाने और भुगतान प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी रखने पर विशेष जोर दिया गया।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के तहत भुगतान की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। विभाग की ओर से 4,531.96 लाख रुपये के विपत्र कोषालय भेजे जा चुके हैं। इनमें से 2,509.48 लाख रुपये का ईसीएस सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है जबकि 2,022.48 लाख रुपये की प्रक्रिया जारी है। विभाग का कहना है कि बाकी भुगतान भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा ताकि किसी पात्र बालिका को इंतजार न करना पड़े।
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योजना के तहत अब तक 2,56,808 बालिकाओं को तीसरी किस्त का लाभ दिया जा चुका है। जिन आवेदनों का सत्यापन अभी बाकी है उन पर भी लगातार काम किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि सभी पात्र बालिकाओं को समय पर उनकी किस्त मिले और पढ़ाई के दौरान आर्थिक मदद की कमी महसूस न हो।
कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या पूरी राशि एक साथ मिलती है? दरअसल ऐसा नहीं है। इस योजना के तहत राशि अलग-अलग चरणों में जारी की जाती है। स्कूल में प्रवेश से लेकर कक्षा 12 तक की किस्तों के लिए संबंधित स्कूल जरूरी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट करता है। इसके बाद जब छात्रा स्नातक की पढ़ाई पूरी कर लेती है और उसकी उम्र 21 वर्ष हो जाती है तब अंतिम किस्त के लिए आवश्यक दस्तावेज पोर्टल पर जमा किए जाते हैं। सभी किस्तों का भुगतान सीधे डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से लाभार्थी के बैंक खाते में भेजा जाता है।
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