पेले क्यों कहलाते हैं FIFA World Cup के बादशाह?

पेले की महानता पर बहस की जरूरत नहीं वह तो इतिहास ने तय कर दी है। असली सवाल यह है कि वर्ल्ड कप उन्हें महान खिलाड़ी नहीं, World Cup का बादशाह’ क्यों मानता है?

पेले
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userअभिजीत यादव
calendar20 Jan 2026 01:16 PM
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Pele : फुटबॉल के इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो सिर्फ आंकड़ों में दर्ज नहीं होते वे खेल की पहचान और परंपरा बन जाते हैं। एडसन अरांतेस दो नासिमेंटो, यानी दुनिया के पेले, उसी श्रेणी के अमर सितारे हैं। FIFA World Cup का जिक्र आते ही उनका नाम यूं उभरता है जैसे ट्रॉफी पर पहले से ही उनकी मुहर लगी हो। पेले की महानता पर बहस की जरूरत नहीं वह तो इतिहास ने तय कर दी है। असली सवाल यह है कि वर्ल्ड कप उन्हें महान खिलाड़ी नहीं, World Cup का बादशाह’ क्यों मानता है?

इतिहास का सबसे अनोखा अध्याय

1958 (स्वीडन) में 17 साल का वह किशोर फाइनल में दो गोल दागकर दुनिया को बता गया कि ब्राज़ील को सिर्फ जीत नहीं एक नया ‘किंग’ मिला है। 1962 (चिली) में चोट ने उन्हें मैदान से दूर जरूर किया, लेकिन शुरुआती मैचों में उनकी मौजूदगी और असर ने ब्राज़ील की मुहिम को ऐसी रफ्तार दी कि टीम ट्रॉफी तक पहुंच गई। फिर आया 1970 (मेक्सिको) जहां पेले एक परिपक्व लीडर बनकर लौटे और ब्राज़ील को वह विश्व कप दिलाया जिसे आज भी फुटबॉल इतिहास की सबसे खूबसूरत जीत कहा जाता है।

फीफा वर्ल्ड कप मंच पर गोल से कहीं ज्यादा प्रभाव

पेले के लिए फीफा वर्ल्ड कप केवल गोल करने का मंच नहीं था, बल्कि खेल को परिभाषित करने का जरिया था। उन्होंने 14 World Cup मैचों में 12 गोल किए, लेकिन असली कमाल उन गोलों से भी आगे था उनकी पोजिशनिंग, विजन, पासिंग और टीम को साथ लेकर चलने की क्षमता।1970 के फाइनल में दिया गया उनका हेडर और फिर साथी खिलाड़ी को दिया गया निर्णायक पास आज भी फीफा वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे क्लासिक मूमेंट्स में गिना जाता है।

किशोर से किंवदंती तक का सफर

पेले की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ गोल करना नहीं थी उनकी असली ताकत थी हर वर्ल्ड कप में खुद को नए किरदार में ढाल लेना। 1958 में वे एक बेफिक्र, चमकती आंखों वाला किशोर थे, जो बिना डर के डिफेंडरों की दीवार तोड़ देता था। 1962 में वही पेले हालातों से लड़ते एक खामोश योद्धा की तरह दिखे और 1970 में वे किसी सुपरस्टार से आगे बढ़कर एक महान सेनापति बन गए

जिस खिलाड़ी ने फीफा वर्ल्ड कप को ग्लोबल बना दिया

पेले सिर्फ ब्राज़ील के नहीं थे, वे पूरी दुनिया के खिलाड़ी थे। उनके खेल ने फीफा वर्ल्ड कप को यूरोप और दक्षिण अमेरिका की सीमाओं से बाहर निकालकर वैश्विक जुनून बना दिया। अफ्रीका, एशिया और उत्तरी अमेरिका में फुटबॉल के प्रति बढ़ती दीवानगी के पीछे पेले की लोकप्रियता की बड़ी भूमिका रही। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि फीफा वर्ल्ड कप को विश्वव्यापी पहचान दिलाने वाला चेहरा पेले ही थे। पेले को फीफा वर्ल्ड कप में अक्सर कठोर फाउल और हिंसक टैकल झेलने पड़े। 1966 फीफा वर्ल्ड कप में उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने खेल के प्रति गरिमा नहीं छोड़ी। यही कारण है कि पेले सिर्फ एक महान खिलाड़ी नहीं, बल्कि खेल भावना के प्रतीक भी बने।

1970 ब्राजील टीम और पेले का नेतृत्व

1970 की ब्राजील  टीम को आज भी अब तक की सर्वश्रेष्ठ फीफा वर्ल्ड कप टीम माना जाता है। उस टीम में ज़रजिन्हो, टोस्टाओ और रिवेलिनो जैसे सितारे थे, लेकिन सूरज सिर्फ एक ही था -पेले। उनकी मौजूदगी ने पूरी टीम को आजादी दी, आत्मविश्वास दिया और इतिहास रच दिया।

रिकॉर्ड से ऊपर विरासत

आज के दौर में जब फीफा वर्ल्ड कप में Messi और Ronaldo जैसे दिग्गजों की चर्चा होती है, तब भी पेले का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। क्योंकि पेले केवल रिकॉर्ड नहीं थे, वे एक युग थे। तीन World Cup ट्रॉफियां, किशोरावस्था में विश्व मंच पर छा जाना, और खेल को कला में बदल देना इन सबने मिलकर पेले को World Cup का बादशाह बना दिया। Pele

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बड़ी खबर : ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने किया रिटायरमेंट का ऐलान

घुटने की लगातार समस्या के कारण वह लंबे समय से कोर्ट से बाहर थीं, हालांकि अब तक उन्होंने रिटायरमेंट की औपचारिक घोषणा नहीं की थी। एक पॉडकास्ट में अपने संन्यास पर खुलकर बात करते हुए 35 वर्षीय साइना ने बताया कि उन्होंने करीब दो साल पहले ही खेलना छोड़ दिया था।

ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल
ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar20 Jan 2026 09:48 AM
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Saina Nehwal : भारतीय बैडमिंटन की स्वर्णिम पहचान रहीं ओलंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने प्रतिस्पर्धी खेल से संन्यास लेने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। अपने फैसले की पुष्टि करते हुए साइना ने साफ कहा कि अब उनका शरीर एलीट स्तर के खेल की कठिन मांगों को पूरा करने की स्थिति में नहीं है, ऐसे में आगे खेल जारी रखना संभव नहीं रह गया है।

घुटने की चोट ने रोका सफर

लंदन ओलंपिक 2012 में भारत को कांस्य पदक दिलाने वाली साइना ने आखिरी बार 2023 में सिंगापुर ओपन में प्रतिस्पर्धी मुकाबला खेला था। इसके बाद से वह पेशेवर बैडमिंटन से दूर नजर आईं। घुटने की लगातार समस्या के कारण वह लंबे समय से कोर्ट से बाहर थीं, हालांकि अब तक उन्होंने रिटायरमेंट की औपचारिक घोषणा नहीं की थी। एक पॉडकास्ट में अपने संन्यास पर खुलकर बात करते हुए 35 वर्षीय साइना ने बताया कि उन्होंने करीब दो साल पहले ही खेलना छोड़ दिया था। उनके मुताबिक, “मुझे लगा कि मैंने अपने तरीके से खेल शुरू किया और अपने तरीके से ही विदा लेना बेहतर होगा, इसलिए अलग से घोषणा करने की जरूरत नहीं समझी। जब आप शारीरिक रूप से आगे खेलने में सक्षम नहीं रहते, तो उसे स्वीकार करना ही सही फैसला होता है।”

परिवार और कोच को पहले ही दे दी थी रिपोर्ट की जानकारी

साइना ने स्पष्ट किया कि घुटने की गंभीर खराबी और आर्थराइटिस के चलते हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग उनके लिए असंभव हो गई थी। उन्होंने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट्स में कार्टिलेज के पूरी तरह खराब होने की बात सामने आई थी, जिसकी जानकारी उनके माता-पिता और कोच को भी दी गई। साइना ने कहा, “जब आप दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए रोज़ आठ-नौ घंटे ट्रेनिंग करते हैं और घुटना एक-दो घंटे में ही जवाब देने लगे, तो यह बेहद मुश्किल स्थिति होती है। अपने रिटायरमेंट पर प्रतिक्रिया देते हुए साइना ने यह भी कहा कि लोगों को धीरे-धीरे समझ आ ही गया था कि वह अब कोर्ट पर नजर नहीं आ रहीं।

साइना का ऐतिहासिक सफर

साइना नेहवाल का करियर भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है। वह ओलंपिक में बैडमिंटन का पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं और 2015 में विश्व रैंकिंग में नंबर-1 स्थान तक पहुंचीं। उन्होंने 2008 में बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप जीती, 2009 में इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरीज खिताब अपने नाम किया और 2010 व 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किए। कॉमनवेल्थ गेम्स में दो एकल स्वर्ण जीतने वाली वह पहली भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी भी रहीं। खेल जगत में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न, पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया। Saina Nehwal

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ऑस्ट्रेलिया की प्लानिंग को झटका: शुरुआती मैचों में नहीं खेलेंगे कमिंस

बीच में उन्होंने रिहैब के बाद वापसी की कोशिश की और एक टेस्ट में प्रभावी प्रदर्शन भी किया, लेकिन टीम के मेडिकल स्टाफ का मानना है कि उनकी पूर्ण फिटनेस में अभी और समय लगेगा। इसी वजह से उन्हें शुरुआती मैचों से दूर रखा जा रहा है।

पैट कमिंस
पैट कमिंस
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userअभिजीत यादव
calendar19 Jan 2026 04:01 PM
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ICC T20 World Cup 2026 : आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 की दहलीज पर ऑस्ट्रेलिया को बड़ा झटका लगा है। कप्तान और तेज गेंदबाजी की रीढ़ माने जाने वाले पैट कमिंस पीठ की चोट से अब तक पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं, इसलिए वे टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों में टीम का हिस्सा नहीं होंगे। चयन समिति के अध्यक्ष जॉर्ज बेली ने सोमवार को संकेत दिया कि कमिंस का रिहैब सही दिशा में चल रहा है, लेकिन उन्हें जल्दबाजी में मैदान पर उतारने का कोई इरादा नहीं है। उम्मीद यही है कि हालात अनुकूल रहे तो कमिंस तीसरे या चौथे मुकाबले के आसपास स्क्वॉड से जुड़कर ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी को फिर से धार दे सकते हैं।

चोट क्या है और क्यों बढ़ी चिंता?

कमिंस इस समय लंबर बोन स्ट्रेस इंजरी (कमर/पीठ की हड्डी से जुड़ा स्ट्रेस इश्यू) से उबर रहे हैं। यही समस्या 2025-26 की एशेज सीरीज से पहले सामने आई थी, जिसके कारण वे सीरीज के कई मुकाबलों से बाहर रहे। बीच में उन्होंने रिहैब के बाद वापसी की कोशिश की और एक टेस्ट में प्रभावी प्रदर्शन भी किया, लेकिन टीम के मेडिकल स्टाफ का मानना है कि उनकी पूर्ण फिटनेस में अभी और समय लगेगा। इसी वजह से उन्हें शुरुआती मैचों से दूर रखा जा रहा है।

कमिंस की टाइमलाइन अलग - जॉर्ज बेली

जॉर्ज बेली ने पाकिस्तान के खिलाफ होने वाली तीन मैचों की टी20 सीरीज को लेकर भी अपडेट दिया। उन्होंने बताया कि जोश हेजलवुड और टिम डेविड भी फिलहाल चयन से बाहर हैं। टिम डेविड को हैमस्ट्रिंग से जुड़ी हल्की समस्या थी, लेकिन वे वर्ल्ड कप की शुरुआत तक फिट होने की दिशा में हैं। हेजलवुड की स्थिति भी लगभग इसी तरह बताई गई। हालांकि, बेली ने स्पष्ट किया कि कमिंस का मामला अलग है वे टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों में उपलब्ध नहीं होंगे और यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो तीसरे या चौथे मैच के आसपास टीम में शामिल हो सकते हैं।

क्यों नहीं ले रहा ऑस्ट्रेलिया कोई जोखिम?

ऑस्ट्रेलियाई टीम प्रबंधन कमिंस के मामले में जल्दबाजी नहीं करना चाहता। कमिंस के करियर में पीठ से जुड़ी समस्याओं का इतिहास रहा है, ऐसे में बोर्ड और चयनकर्ता उन्हें पूरा समय देना चाहते हैं ताकि वापसी बिना किसी जोखिम के हो सके। बेली का संकेत यही है कि प्राथमिकता खिलाड़ी की दीर्घकालिक फिटनेस है—और जरूरत पड़ी तो टीम कॉम्बिनेशन में बदलाव के विकल्प खुले रखे जाएंगे।

शुरुआती मैचों में टीम संतुलन पर असर

कमिंस की गैरमौजूदगी का सीधा असर ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाजी आक्रमण और मैचों की रणनीति पर पड़ सकता है खासकर टूर्नामेंट के शुरुआती चरण में। ऐसे में टीम मैनेजमेंट की नजर इस बात पर होगी कि दूसरे तेज गेंदबाज किस तरह जिम्मेदारी संभालते हैं और कप्तानी/डेथ ओवर प्लानिंग में कैसे संतुलन बनता है, जब तक कमिंस पूरी तरह फिट होकर मैदान पर नहीं लौटते। ICC T20 World Cup 2026


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