पेले क्यों कहलाते हैं FIFA World Cup के बादशाह?
पेले की महानता पर बहस की जरूरत नहीं वह तो इतिहास ने तय कर दी है। असली सवाल यह है कि वर्ल्ड कप उन्हें महान खिलाड़ी नहीं, World Cup का बादशाह’ क्यों मानता है?

Pele : फुटबॉल के इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो सिर्फ आंकड़ों में दर्ज नहीं होते वे खेल की पहचान और परंपरा बन जाते हैं। एडसन अरांतेस दो नासिमेंटो, यानी दुनिया के पेले, उसी श्रेणी के अमर सितारे हैं। FIFA World Cup का जिक्र आते ही उनका नाम यूं उभरता है जैसे ट्रॉफी पर पहले से ही उनकी मुहर लगी हो। पेले की महानता पर बहस की जरूरत नहीं वह तो इतिहास ने तय कर दी है। असली सवाल यह है कि वर्ल्ड कप उन्हें महान खिलाड़ी नहीं, World Cup का बादशाह’ क्यों मानता है?
इतिहास का सबसे अनोखा अध्याय
1958 (स्वीडन) में 17 साल का वह किशोर फाइनल में दो गोल दागकर दुनिया को बता गया कि ब्राज़ील को सिर्फ जीत नहीं एक नया ‘किंग’ मिला है। 1962 (चिली) में चोट ने उन्हें मैदान से दूर जरूर किया, लेकिन शुरुआती मैचों में उनकी मौजूदगी और असर ने ब्राज़ील की मुहिम को ऐसी रफ्तार दी कि टीम ट्रॉफी तक पहुंच गई। फिर आया 1970 (मेक्सिको) जहां पेले एक परिपक्व लीडर बनकर लौटे और ब्राज़ील को वह विश्व कप दिलाया जिसे आज भी फुटबॉल इतिहास की सबसे खूबसूरत जीत कहा जाता है।
फीफा वर्ल्ड कप मंच पर गोल से कहीं ज्यादा प्रभाव
पेले के लिए फीफा वर्ल्ड कप केवल गोल करने का मंच नहीं था, बल्कि खेल को परिभाषित करने का जरिया था। उन्होंने 14 World Cup मैचों में 12 गोल किए, लेकिन असली कमाल उन गोलों से भी आगे था उनकी पोजिशनिंग, विजन, पासिंग और टीम को साथ लेकर चलने की क्षमता।1970 के फाइनल में दिया गया उनका हेडर और फिर साथी खिलाड़ी को दिया गया निर्णायक पास आज भी फीफा वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे क्लासिक मूमेंट्स में गिना जाता है।
किशोर से किंवदंती तक का सफर
पेले की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ गोल करना नहीं थी उनकी असली ताकत थी हर वर्ल्ड कप में खुद को नए किरदार में ढाल लेना। 1958 में वे एक बेफिक्र, चमकती आंखों वाला किशोर थे, जो बिना डर के डिफेंडरों की दीवार तोड़ देता था। 1962 में वही पेले हालातों से लड़ते एक खामोश योद्धा की तरह दिखे और 1970 में वे किसी सुपरस्टार से आगे बढ़कर एक महान सेनापति बन गए
जिस खिलाड़ी ने फीफा वर्ल्ड कप को ग्लोबल बना दिया
पेले सिर्फ ब्राज़ील के नहीं थे, वे पूरी दुनिया के खिलाड़ी थे। उनके खेल ने फीफा वर्ल्ड कप को यूरोप और दक्षिण अमेरिका की सीमाओं से बाहर निकालकर वैश्विक जुनून बना दिया। अफ्रीका, एशिया और उत्तरी अमेरिका में फुटबॉल के प्रति बढ़ती दीवानगी के पीछे पेले की लोकप्रियता की बड़ी भूमिका रही। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि फीफा वर्ल्ड कप को विश्वव्यापी पहचान दिलाने वाला चेहरा पेले ही थे। पेले को फीफा वर्ल्ड कप में अक्सर कठोर फाउल और हिंसक टैकल झेलने पड़े। 1966 फीफा वर्ल्ड कप में उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने खेल के प्रति गरिमा नहीं छोड़ी। यही कारण है कि पेले सिर्फ एक महान खिलाड़ी नहीं, बल्कि खेल भावना के प्रतीक भी बने।
1970 ब्राजील टीम और पेले का नेतृत्व
1970 की ब्राजील टीम को आज भी अब तक की सर्वश्रेष्ठ फीफा वर्ल्ड कप टीम माना जाता है। उस टीम में ज़रजिन्हो, टोस्टाओ और रिवेलिनो जैसे सितारे थे, लेकिन सूरज सिर्फ एक ही था -पेले। उनकी मौजूदगी ने पूरी टीम को आजादी दी, आत्मविश्वास दिया और इतिहास रच दिया।
रिकॉर्ड से ऊपर विरासत
आज के दौर में जब फीफा वर्ल्ड कप में Messi और Ronaldo जैसे दिग्गजों की चर्चा होती है, तब भी पेले का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। क्योंकि पेले केवल रिकॉर्ड नहीं थे, वे एक युग थे। तीन World Cup ट्रॉफियां, किशोरावस्था में विश्व मंच पर छा जाना, और खेल को कला में बदल देना इन सबने मिलकर पेले को World Cup का बादशाह बना दिया। Pele
Pele : फुटबॉल के इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो सिर्फ आंकड़ों में दर्ज नहीं होते वे खेल की पहचान और परंपरा बन जाते हैं। एडसन अरांतेस दो नासिमेंटो, यानी दुनिया के पेले, उसी श्रेणी के अमर सितारे हैं। FIFA World Cup का जिक्र आते ही उनका नाम यूं उभरता है जैसे ट्रॉफी पर पहले से ही उनकी मुहर लगी हो। पेले की महानता पर बहस की जरूरत नहीं वह तो इतिहास ने तय कर दी है। असली सवाल यह है कि वर्ल्ड कप उन्हें महान खिलाड़ी नहीं, World Cup का बादशाह’ क्यों मानता है?
इतिहास का सबसे अनोखा अध्याय
1958 (स्वीडन) में 17 साल का वह किशोर फाइनल में दो गोल दागकर दुनिया को बता गया कि ब्राज़ील को सिर्फ जीत नहीं एक नया ‘किंग’ मिला है। 1962 (चिली) में चोट ने उन्हें मैदान से दूर जरूर किया, लेकिन शुरुआती मैचों में उनकी मौजूदगी और असर ने ब्राज़ील की मुहिम को ऐसी रफ्तार दी कि टीम ट्रॉफी तक पहुंच गई। फिर आया 1970 (मेक्सिको) जहां पेले एक परिपक्व लीडर बनकर लौटे और ब्राज़ील को वह विश्व कप दिलाया जिसे आज भी फुटबॉल इतिहास की सबसे खूबसूरत जीत कहा जाता है।
फीफा वर्ल्ड कप मंच पर गोल से कहीं ज्यादा प्रभाव
पेले के लिए फीफा वर्ल्ड कप केवल गोल करने का मंच नहीं था, बल्कि खेल को परिभाषित करने का जरिया था। उन्होंने 14 World Cup मैचों में 12 गोल किए, लेकिन असली कमाल उन गोलों से भी आगे था उनकी पोजिशनिंग, विजन, पासिंग और टीम को साथ लेकर चलने की क्षमता।1970 के फाइनल में दिया गया उनका हेडर और फिर साथी खिलाड़ी को दिया गया निर्णायक पास आज भी फीफा वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे क्लासिक मूमेंट्स में गिना जाता है।
किशोर से किंवदंती तक का सफर
पेले की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ गोल करना नहीं थी उनकी असली ताकत थी हर वर्ल्ड कप में खुद को नए किरदार में ढाल लेना। 1958 में वे एक बेफिक्र, चमकती आंखों वाला किशोर थे, जो बिना डर के डिफेंडरों की दीवार तोड़ देता था। 1962 में वही पेले हालातों से लड़ते एक खामोश योद्धा की तरह दिखे और 1970 में वे किसी सुपरस्टार से आगे बढ़कर एक महान सेनापति बन गए
जिस खिलाड़ी ने फीफा वर्ल्ड कप को ग्लोबल बना दिया
पेले सिर्फ ब्राज़ील के नहीं थे, वे पूरी दुनिया के खिलाड़ी थे। उनके खेल ने फीफा वर्ल्ड कप को यूरोप और दक्षिण अमेरिका की सीमाओं से बाहर निकालकर वैश्विक जुनून बना दिया। अफ्रीका, एशिया और उत्तरी अमेरिका में फुटबॉल के प्रति बढ़ती दीवानगी के पीछे पेले की लोकप्रियता की बड़ी भूमिका रही। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि फीफा वर्ल्ड कप को विश्वव्यापी पहचान दिलाने वाला चेहरा पेले ही थे। पेले को फीफा वर्ल्ड कप में अक्सर कठोर फाउल और हिंसक टैकल झेलने पड़े। 1966 फीफा वर्ल्ड कप में उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने खेल के प्रति गरिमा नहीं छोड़ी। यही कारण है कि पेले सिर्फ एक महान खिलाड़ी नहीं, बल्कि खेल भावना के प्रतीक भी बने।
1970 ब्राजील टीम और पेले का नेतृत्व
1970 की ब्राजील टीम को आज भी अब तक की सर्वश्रेष्ठ फीफा वर्ल्ड कप टीम माना जाता है। उस टीम में ज़रजिन्हो, टोस्टाओ और रिवेलिनो जैसे सितारे थे, लेकिन सूरज सिर्फ एक ही था -पेले। उनकी मौजूदगी ने पूरी टीम को आजादी दी, आत्मविश्वास दिया और इतिहास रच दिया।
रिकॉर्ड से ऊपर विरासत
आज के दौर में जब फीफा वर्ल्ड कप में Messi और Ronaldo जैसे दिग्गजों की चर्चा होती है, तब भी पेले का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। क्योंकि पेले केवल रिकॉर्ड नहीं थे, वे एक युग थे। तीन World Cup ट्रॉफियां, किशोरावस्था में विश्व मंच पर छा जाना, और खेल को कला में बदल देना इन सबने मिलकर पेले को World Cup का बादशाह बना दिया। Pele












