इतिहास से भी नहीं सीखा! ICC के सामने पाक का बहिष्कार-नाटक खत्म
बीते करीब 10 दिनों से पीसीबी और पाकिस्तान सरकार की तरफ से ‘मैच बहिष्कार’ जैसी सख्त बयानबाज़ी करके दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन बैठक के बाद वही तेवर फीके पड़ते दिखे। सूत्रों के मुताबिक, पीसीबी ने आईसीसी के सामने कुछ शर्तें रखीं, मगर उन्हें हरी झंडी नहीं मिली।

ICC T20 World Cup 2026 : आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर चल रहा सस्पेंस आखिरकार सोमवार की आईसीसी बैठक के बाद काफी हद तक टूटता नजर आया। बीते करीब 10 दिनों से पीसीबी और पाकिस्तान सरकार की तरफ से ‘मैच बहिष्कार’ जैसी सख्त बयानबाज़ी करके दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन बैठक के बाद वही तेवर फीके पड़ते दिखे। सूत्रों के मुताबिक, पीसीबी ने आईसीसी के सामने कुछ शर्तें रखीं, मगर उन्हें हरी झंडी नहीं मिली।
इतिहास बताता है बहिष्कार की हिम्मत आसान नहीं
पाकिस्तान भले भारत के खिलाफ मैच न खेलने की बात करता रहा हो, लेकिन क्रिकेट इतिहास में एक बार भारत ने सचमुच बीच मुकाबला छोड़कर दुनिया को चौंका दिया था। यह घटना 3 नवंबर 1978 की बताई जाती है, जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ वनडे मुकाबला विवादित अंपायरिंग के विरोध में बीच में रोक दिया था। उस फैसले से जुड़े किस्से आज भी क्रिकेट दुनिया में बहस का विषय रहते हैं।
1978 में क्या हुआ था?
साहीवाल में खेले जा रहे उस मुकाबले में भारत जीत की दहलीज पर खड़ा था। पाकिस्तान ने 40 ओवर में 205/7 रन बनाए, जवाब में भारत 37 ओवर के बाद 183/2 पर पहुंच चुका थाभारत को 18 गेंदों में 23 रन चाहिए थे और 8 विकेट शेष थे। क्रीज पर अंशुमान गायकवाड़ और दूसरे छोर पर गुंडप्पा विश्वनाथ मौजूद थे। इसी दौरान गेंदबाजी के लिए सरफराज नवाज आए। आरोप यह लगा कि उन्होंने लगातार ऐसी गेंदें फेंकीं जो बल्लेबाज की पहुंच से बाहर थीं, लेकिन अंपायर ने वाइड देने से परहेज किया। जब यह सिलसिला बार-बार दोहराया गया, तो भारतीय डगआउट में नाराजगी बढ़ती गई। कहानी के मुताबिक, एक के बाद एक गेंदें बाहर जाती रहीं, विकेटकीपर तक पहुंचीं, लेकिन वाइड का इशारा नहीं हुआ। भारतीय बल्लेबाजों को लगने लगा कि विपक्षी टीम की रणनीति साफ है गेंदों को जानबूझकर दूर रखो और अंपायर वाइड न दे। ऐसे में रन चेज का गणित अचानक पेचीदा होता गया और मैच का मजाक बनने की स्थिति बनती दिखी।
जब कप्तान ने खेल रोककर दर्ज कराया था विरोध
इसी मोड़ पर कप्तान बिशन सिंह बेदी ने मैदान पर ही निर्णायक कदम उठाया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने विरोध जताते हुए खेल आगे न बढ़ाने का फैसला किया और मुकाबला वहीं रोक दिया गया। नतीजा यह रहा कि मैच घरेलू टीम के पक्ष में चला गया और पाकिस्तान ने सीरीज 2-1 से जीत ली। इस घटना के बाद लंबे समय तक यह चर्चा रही कि विवाद की छाया साहीवाल पर भी पड़ी। दावा किया जाता है कि इसके बाद वहां अंतरराष्ट्रीय मैच दोबारा नहीं कराया गया। यही वजह है कि आज जब भारत-पाकिस्तान मुकाबलों पर बहिष्कार की बातें होती हैं, तो 1978 का वह किस्सा फिर से सामने आ जाता है। ICC T20 World Cup 2026
ICC T20 World Cup 2026 : आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर चल रहा सस्पेंस आखिरकार सोमवार की आईसीसी बैठक के बाद काफी हद तक टूटता नजर आया। बीते करीब 10 दिनों से पीसीबी और पाकिस्तान सरकार की तरफ से ‘मैच बहिष्कार’ जैसी सख्त बयानबाज़ी करके दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन बैठक के बाद वही तेवर फीके पड़ते दिखे। सूत्रों के मुताबिक, पीसीबी ने आईसीसी के सामने कुछ शर्तें रखीं, मगर उन्हें हरी झंडी नहीं मिली।
इतिहास बताता है बहिष्कार की हिम्मत आसान नहीं
पाकिस्तान भले भारत के खिलाफ मैच न खेलने की बात करता रहा हो, लेकिन क्रिकेट इतिहास में एक बार भारत ने सचमुच बीच मुकाबला छोड़कर दुनिया को चौंका दिया था। यह घटना 3 नवंबर 1978 की बताई जाती है, जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ वनडे मुकाबला विवादित अंपायरिंग के विरोध में बीच में रोक दिया था। उस फैसले से जुड़े किस्से आज भी क्रिकेट दुनिया में बहस का विषय रहते हैं।
1978 में क्या हुआ था?
साहीवाल में खेले जा रहे उस मुकाबले में भारत जीत की दहलीज पर खड़ा था। पाकिस्तान ने 40 ओवर में 205/7 रन बनाए, जवाब में भारत 37 ओवर के बाद 183/2 पर पहुंच चुका थाभारत को 18 गेंदों में 23 रन चाहिए थे और 8 विकेट शेष थे। क्रीज पर अंशुमान गायकवाड़ और दूसरे छोर पर गुंडप्पा विश्वनाथ मौजूद थे। इसी दौरान गेंदबाजी के लिए सरफराज नवाज आए। आरोप यह लगा कि उन्होंने लगातार ऐसी गेंदें फेंकीं जो बल्लेबाज की पहुंच से बाहर थीं, लेकिन अंपायर ने वाइड देने से परहेज किया। जब यह सिलसिला बार-बार दोहराया गया, तो भारतीय डगआउट में नाराजगी बढ़ती गई। कहानी के मुताबिक, एक के बाद एक गेंदें बाहर जाती रहीं, विकेटकीपर तक पहुंचीं, लेकिन वाइड का इशारा नहीं हुआ। भारतीय बल्लेबाजों को लगने लगा कि विपक्षी टीम की रणनीति साफ है गेंदों को जानबूझकर दूर रखो और अंपायर वाइड न दे। ऐसे में रन चेज का गणित अचानक पेचीदा होता गया और मैच का मजाक बनने की स्थिति बनती दिखी।
जब कप्तान ने खेल रोककर दर्ज कराया था विरोध
इसी मोड़ पर कप्तान बिशन सिंह बेदी ने मैदान पर ही निर्णायक कदम उठाया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने विरोध जताते हुए खेल आगे न बढ़ाने का फैसला किया और मुकाबला वहीं रोक दिया गया। नतीजा यह रहा कि मैच घरेलू टीम के पक्ष में चला गया और पाकिस्तान ने सीरीज 2-1 से जीत ली। इस घटना के बाद लंबे समय तक यह चर्चा रही कि विवाद की छाया साहीवाल पर भी पड़ी। दावा किया जाता है कि इसके बाद वहां अंतरराष्ट्रीय मैच दोबारा नहीं कराया गया। यही वजह है कि आज जब भारत-पाकिस्तान मुकाबलों पर बहिष्कार की बातें होती हैं, तो 1978 का वह किस्सा फिर से सामने आ जाता है। ICC T20 World Cup 2026












