नागपुर में ‘सूर्या शो’ की उम्मीद, 25 रन और बन जाएगी नई कहानी

टी20 क्रिकेट (अंतरराष्ट्रीय, घरेलू और लीग मिलाकर) में 9,000 रन पूरे करने से सूर्या महज 25 रन दूर हैं। यानी जैसे ही उनके बल्ले से 25 रन निकलेंगे, वह विराट कोहली–रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों वाले खास क्लब में शामिल हो जाएंगे।

सूर्यकुमार यादव
सूर्यकुमार यादव
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar20 Jan 2026 04:06 PM
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Suryakumar Yadav : भारत–न्यूजीलैंड के बीच 21 जनवरी से शुरू हो रही पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का पहला मुकाबला नागपुर में खेला जाएगा। इस मैच में टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव के सामने सिर्फ जीत की चुनौती नहीं होगी, बल्कि एक खास रिकॉर्ड भी उनकी राह देख रहा है। टी20 क्रिकेट (अंतरराष्ट्रीय, घरेलू और लीग मिलाकर) में 9,000 रन पूरे करने से सूर्या महज 25 रन दूर हैं। यानी जैसे ही उनके बल्ले से 25 रन निकलेंगे, वह विराट कोहली–रोहित शर्मा जैसे दिग्गजों वाले खास क्लब में शामिल हो जाएंगे।

25 रन और इतिहास के दरवाजे पर पहुंच जाएंगे सूर्या

अब तक टी20 फॉर्मेट में भारत की ओर से 9,000 या उससे ज्यादा रन सिर्फ तीन बल्लेबाजों ने बनाए हैं। इस सूची में विराट कोहली सबसे आगे हैं, जबकि रोहित शर्मा दूसरे और शिखर धवन तीसरे पायदान पर हैं। सूर्यकुमार यादव 9,000 रन का आंकड़ा छूते ही इस एलीट लिस्ट में चौथे भारतीय बन जाएंगे—यानी एक और बड़ा नाम “टी20 रन-मशीन” की सूची में दर्ज हो जाएगा। हाल के दिनों में सूर्या का बल्ला वैसी निरंतरता नहीं दिखा पाया है, जैसी उनसे उम्मीद की जाती है। लेकिन न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ यह सीरीज कप्तान और बल्लेबाज, दोनों भूमिकाओं में उनके लिए बेहद निर्णायक मानी जा रही है। टीम को तेज शुरुआत चाहिए और फैंस को वही पुरानी ‘सूर्या-स्टाइल’ आक्रामकता, जिसमें मैदान के चारों ओर शॉट्स की बरसात होती है।

सूर्या के टी20 आंकड़े (अब तक)

सूर्यकुमार यादव के टी20 करियर के आंकड़े उनकी पहचान खुद बयां करते हैं 346 मैचों में 8,975 रन, 34.78 की औसत और 152.29 के धुआंधार स्ट्राइक रेट के साथ उनके नाम 6 शतक और 59 अर्धशतक दर्ज हैं। अब नागपुर में बुधवार को होने वाला पहला टी20 सिर्फ एक मुकाबला नहीं, बल्कि कप्तान सूर्या के लिए दोहरी परीक्षा है स्कोरबोर्ड पर रन भी चाहिए और टीम को दिशा भी। सवाल यही है कि क्या वह महज 25 रनों के फासले पर खड़े 9,000 रन के माइलस्टोन को पार कर, आलोचनाओं पर बल्ले से विराम लगाएंगे और न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत को सीरीज की शुरुआत से ही आक्रामक बढ़त दिला पाएंगे।

टी20 क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले टॉप-10 भारतीय बल्लेबाज

  1. विराट कोहली: 414 मैच, 397 पारियां – 13,543 रन
  2. रोहित शर्मा: 463 मैच, 450 पारियां – 12,248 रन
  3. शिखर धवन: 334 मैच, 331 पारियां – 9,797 रन
  4. सूर्यकुमार यादव: 346 मैच, 320 पारियां – 8,975 रन
  5. सुरेश रैना: 336 मैच, 319 पारियां – 8,654 रन
  6. केएल राहुल: 239 मैच, 226 पारियां – 8,125 रन
  7. संजू सैमसन: 320 मैच, 303 पारियां – 8,033 रन
  8. अजिंक्य रहाणे: 294 मैच, 277 पारियां – 7,633 रन
  9. एमएस धोनी: 405 मैच, 355 पारियां – 7,628 रन
  10. दिनेश कार्तिक: 415 मैच, 367 पारियां – 7,557 रन Suryakumar Yadav


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BCCI का कॉन्ट्रैक्ट झटका! A+ हटेगा तो कोहली-रोहित की ‘कुर्सी’ हिलेगी?

यह पूरा कवायद अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 की अवधि के लिए प्रस्तावित नई रिटेनरशिप (वार्षिक कॉन्ट्रैक्ट सूची) से जुड़ी मानी जा रही है, जिसका ऐलान BCCI को करना है।

रोहित शर्मा और विराट कोहली
रोहित शर्मा और विराट कोहली
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar20 Jan 2026 02:06 PM
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BCCI Central Contract : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक बोर्ड ग्रेड A+ कैटेगरी को बंद कर केवल A, B और C तीन श्रेणियों वाला मॉडल लागू करने पर विचार कर सकता है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो मौजूदा A+ ग्रेड में शामिल रहे विराट कोहली और रोहित शर्मा की ग्रेडिंग में नीचे की ओर बदलाव संभव माना जा रहा है।

A+ हटेगा तो किसे लगेगी सबसे बड़ी कटौती?

खबरों में दावा है कि नए मॉडल के तहत कोहली और रोहित को ग्रेड B में रखा जा सकता है। इसी लाइन में रवींद्र जडेजा का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। वहीं तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के ग्रेड A में शिफ्ट होने की संभावना जताई गई है। यह पूरा कवायद अक्टूबर 2025 से सितंबर 2026 की अवधि के लिए प्रस्तावित नई रिटेनरशिप (वार्षिक कॉन्ट्रैक्ट सूची) से जुड़ी मानी जा रही है, जिसका ऐलान BCCI को करना है।

सैलरी स्ट्रक्चर भी बदलेगा

सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति ने कॉन्ट्रैक्ट ढांचे में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। मौजूदा सिस्टम में A+ सबसे ऊंचा ग्रेड माना जाता है, लेकिन नए फॉर्मेट में इसे हटाकर तीन ग्रेड तक सीमित करने की सलाह दी गई है।

तीन कैटेगरी वाला मॉडल आने पर पे-ग्रिड भी नए सिरे से तय होगा। अभी तक चर्चित ढांचे के मुताबिक A+ में सबसे ज्यादा, उसके बाद A, B और C में क्रमशः कम रिटेनर मिलता रहा है।

2024-25 की सूची में कौन किस ग्रेड में था?

अप्रैल 2025 में घोषित 2024-25 की सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट में:

  • ग्रेड A+ में रोहित शर्मा, विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह और रवींद्र जडेजा शामिल थे।
  • ग्रेड A में मोहम्मद सिराज, केएल राहुल, शुभमन गिल, हार्दिक पांड्या, मोहम्मद शमी और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ी थे।
  • ग्रेड B में सूर्यकुमार यादव, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, यशस्वी जायसवाल और श्रेयस अय्यर का नाम था।
  • ग्रेड C में रिंकू सिंह, तिलक वर्मा, रुतुराज गायकवाड़, शिवम दुबे, रवि बिश्नोई, वाशिंगटन सुंदर, संजू सैमसन, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, रजत पाटीदार, ध्रुव जुरेल, सरफराज खान, नीतीश कुमार रेड्डी, ईशान किशन, अभिषेक शर्मा, आकाश दीप, वरुण चक्रवर्ती और हर्षित राणा समेत कई खिलाड़ियों को जगह मिली थी।

अब निगाह BCCI की मंजूरी पर

फिलहाल तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, क्योंकि अंतिम फैसला BCCI के अनुमोदन के बाद ही तय होगा। लेकिन संकेत यही हैं कि बोर्ड इस बार कॉन्ट्रैक्ट ग्रेडिंग में फॉर्मेट-इन्वॉल्वमेंट और रोल-आधारित प्राथमिकताओं को ज्यादा तवज्जो देते हुए ढांचा सख्त कर सकता है। BCCI Central Contract

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पेले क्यों कहलाते हैं FIFA World Cup के बादशाह?

पेले की महानता पर बहस की जरूरत नहीं वह तो इतिहास ने तय कर दी है। असली सवाल यह है कि वर्ल्ड कप उन्हें महान खिलाड़ी नहीं, World Cup का बादशाह’ क्यों मानता है?

पेले
पेले
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar20 Jan 2026 01:16 PM
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Pele : फुटबॉल के इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो सिर्फ आंकड़ों में दर्ज नहीं होते वे खेल की पहचान और परंपरा बन जाते हैं। एडसन अरांतेस दो नासिमेंटो, यानी दुनिया के पेले, उसी श्रेणी के अमर सितारे हैं। FIFA World Cup का जिक्र आते ही उनका नाम यूं उभरता है जैसे ट्रॉफी पर पहले से ही उनकी मुहर लगी हो। पेले की महानता पर बहस की जरूरत नहीं वह तो इतिहास ने तय कर दी है। असली सवाल यह है कि वर्ल्ड कप उन्हें महान खिलाड़ी नहीं, World Cup का बादशाह’ क्यों मानता है?

इतिहास का सबसे अनोखा अध्याय

1958 (स्वीडन) में 17 साल का वह किशोर फाइनल में दो गोल दागकर दुनिया को बता गया कि ब्राज़ील को सिर्फ जीत नहीं एक नया ‘किंग’ मिला है। 1962 (चिली) में चोट ने उन्हें मैदान से दूर जरूर किया, लेकिन शुरुआती मैचों में उनकी मौजूदगी और असर ने ब्राज़ील की मुहिम को ऐसी रफ्तार दी कि टीम ट्रॉफी तक पहुंच गई। फिर आया 1970 (मेक्सिको) जहां पेले एक परिपक्व लीडर बनकर लौटे और ब्राज़ील को वह विश्व कप दिलाया जिसे आज भी फुटबॉल इतिहास की सबसे खूबसूरत जीत कहा जाता है।

फीफा वर्ल्ड कप मंच पर गोल से कहीं ज्यादा प्रभाव

पेले के लिए फीफा वर्ल्ड कप केवल गोल करने का मंच नहीं था, बल्कि खेल को परिभाषित करने का जरिया था। उन्होंने 14 World Cup मैचों में 12 गोल किए, लेकिन असली कमाल उन गोलों से भी आगे था उनकी पोजिशनिंग, विजन, पासिंग और टीम को साथ लेकर चलने की क्षमता।1970 के फाइनल में दिया गया उनका हेडर और फिर साथी खिलाड़ी को दिया गया निर्णायक पास आज भी फीफा वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे क्लासिक मूमेंट्स में गिना जाता है।

किशोर से किंवदंती तक का सफर

पेले की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ गोल करना नहीं थी उनकी असली ताकत थी हर वर्ल्ड कप में खुद को नए किरदार में ढाल लेना। 1958 में वे एक बेफिक्र, चमकती आंखों वाला किशोर थे, जो बिना डर के डिफेंडरों की दीवार तोड़ देता था। 1962 में वही पेले हालातों से लड़ते एक खामोश योद्धा की तरह दिखे और 1970 में वे किसी सुपरस्टार से आगे बढ़कर एक महान सेनापति बन गए

जिस खिलाड़ी ने फीफा वर्ल्ड कप को ग्लोबल बना दिया

पेले सिर्फ ब्राज़ील के नहीं थे, वे पूरी दुनिया के खिलाड़ी थे। उनके खेल ने फीफा वर्ल्ड कप को यूरोप और दक्षिण अमेरिका की सीमाओं से बाहर निकालकर वैश्विक जुनून बना दिया। अफ्रीका, एशिया और उत्तरी अमेरिका में फुटबॉल के प्रति बढ़ती दीवानगी के पीछे पेले की लोकप्रियता की बड़ी भूमिका रही। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि फीफा वर्ल्ड कप को विश्वव्यापी पहचान दिलाने वाला चेहरा पेले ही थे। पेले को फीफा वर्ल्ड कप में अक्सर कठोर फाउल और हिंसक टैकल झेलने पड़े। 1966 फीफा वर्ल्ड कप में उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने खेल के प्रति गरिमा नहीं छोड़ी। यही कारण है कि पेले सिर्फ एक महान खिलाड़ी नहीं, बल्कि खेल भावना के प्रतीक भी बने।

1970 ब्राजील टीम और पेले का नेतृत्व

1970 की ब्राजील  टीम को आज भी अब तक की सर्वश्रेष्ठ फीफा वर्ल्ड कप टीम माना जाता है। उस टीम में ज़रजिन्हो, टोस्टाओ और रिवेलिनो जैसे सितारे थे, लेकिन सूरज सिर्फ एक ही था -पेले। उनकी मौजूदगी ने पूरी टीम को आजादी दी, आत्मविश्वास दिया और इतिहास रच दिया।

रिकॉर्ड से ऊपर विरासत

आज के दौर में जब फीफा वर्ल्ड कप में Messi और Ronaldo जैसे दिग्गजों की चर्चा होती है, तब भी पेले का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। क्योंकि पेले केवल रिकॉर्ड नहीं थे, वे एक युग थे। तीन World Cup ट्रॉफियां, किशोरावस्था में विश्व मंच पर छा जाना, और खेल को कला में बदल देना इन सबने मिलकर पेले को World Cup का बादशाह बना दिया। Pele

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