UP News : उत्तर प्रदेश से आए दिन चौंकाने वाली खबर सामने आती रहती है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश से एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। उत्तर प्रदेश के एक शहर में ऐसा धंधा चल रहा था जिसने सभी को हैरान कर दिया है। उत्तर प्रदेश के इस हैरान कर देने वाले धंधे का पर्दाफाश हो गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने जब इस धंधे का पर्दाफाश किया तो पुलिस भी दंग रह गई। इसी प्रकार का धंध उत्तर प्रदेश के कुछ दूसरे हिस्सों में भी चलाया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के इस शहर में पकड़ा गया है चौंकाने वाला अड्डा
उत्तर प्रदेश में आगरा एक प्रसिद्घ शहर है। आगरा शहर में एक छोटी सी किराए की दुकान में अवैध धंधे का एक बड़ा अड्ड चलाया जा रहा था। उत्तर प्रदेश पुलिस की SIT की एक टीम ने किराए की इस दुकान पर छापा मारकर अवैध धंधे के अड्डे का पर्दाफाश किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की SIT के अपर पुलिस अधीक्षकASP राकेश कुमार ने बताया कि आगरा में किराये की एक दुकान में चार विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट तैयार करने के मास्टरमाइंड धनेश मिश्रा को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है।
आरोपी ने संबंधित विश्वविद्यालयों के एडमिशन कोड हासिल कर रखे थे। वह 2.40 लाख रुपये में एमबीए, 40 हजार रुपये में बीकॉम-बीएससी, 25 हजार रुपये में हाईस्कूल की मार्कशीट बेच रहा था। (ASP) एसटीएफ राकेश कुमार ने बताया कि आगरा और आसपास के जिलों में में फर्जी प्रमाणपत्र बनाए जाने की सूचना मिली थी। जांच के दौरान अजीत नगर गेट के पास एक दुकान से इंटरमीडिएट, हाईस्कूल, बीएससी, बीकॉम से एमबीए तक की फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां दिए जाने की जानकारी मिली। एसटीएफ टीम ने बृहस्पतिवार को वेस्ट अर्जुन नगर निवासी धनेश को पकड़ लिया। वह अभ्यर्थियों को इन विश्वविद्यालयों में दाखिले का झांसा देता था। कहता था, वहां जाने की जरूरत नहीं है। सारा इंतजाम यहीं हो जाएगा। झारखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश व मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालयों के शैक्षिक प्रमाणपत्र भी बनवाकर देता था।
बड़े बड़ों की मिलीभगत थी अवैध धंधे में
इस अवैध धंधे के मास्टर माइंड धनेश ने पूछताछ में बताया कि उसने चार विश्वविद्यालयों से फ्रेंचाइजी (एडमिशन कोड) ले रखी थी। विश्वविद्यालय के कर्मचारियों से उसकी सेटिंग थी। एसटीएफ आरोपी से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसका नेटवर्क किस-किस विश्वविद्यालय में था।
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उत्तर प्रदेश की पुलिस टीम को यूपी बोर्ड सहित अन्य बोर्ड की इंटर व हाईस्कूल की फर्जी मार्कशीट्स, सुभारती विश्वविद्यालय, मंगलायतन विश्वविद्यालय, सिक्किम यूनिवर्सिटी और सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी की फर्जी डिग्रियां भी मिली हैं। एसटीएफ ने आरोपी से चार लैपटॉप, सात विश्वविद्यालयों के 942 फर्जी अंकपत्र/प्रमाणपत्र, 104 अन्य अंकपत्र/प्रमाणपत्र बरामद किए हैं। एक ही हस्तलेख वाली उत्तर पुस्तिकाएं मिली हैं, जिनमें 102 पर अलग-अलग नाम दर्ज हैं। 12 विभिन्न सीरियल नंबर की हैं। फीस की रसीदें, लेटर हेड, प्रिंटर, विजिटिंग कार्ड्स, लिफाफे भी मिले हैं। UP News :
उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी चल रहा है यह अवैध धंधा
उत्तर प्रदेश के आगरा में फर्जी डिग्री तथा सर्टीफिकेट बेचने का धंधा चर्चा का विषय बन गया है। इसी प्रकार का अवैध धंधा उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में चलाया जा रहा है। इसी प्रकार का अवैध धंधा चलाने वाले एक बड़े गिरोह को उत्तर प्रदेश पुलिस की एक दूसरी STF टीम ने पकड़ा है। उत्तर प्रदेश पुलिस की STF के प्रवक्ता ने बताया कि यूपी एसटीएफ ने बृहस्पतिवार को जाली अंकपत्र, प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में बलरामपुर के तुलसीपुर का रहने वाला अल्ताफ राजा, आलमबाग निवासी कृष्ण कुमार श्रीवास्तव और मड़ियांव निवासी लक्ष्य राठौर है। आरोपी 15 से 20 हजार रुपये लेकर जाली दस्तावेज तैयार करते थे। अब तक लखनऊ में करीब दो हजार से अधिक जाली प्रमाणपत्र बेच चुके थे। एसटीएफ के एडिशनल एसपी लाल प्रताप सिंह के अनुसार, विभिन्न शिक्षा बोर्ड, यूनिवर्सिटी और संस्थानों के जाली दस्तावेज बनाने वाले गिरोह की सूचना मिल रही थी। जांच के बाद बृहस्पतिवार को टीम ने पारा के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय की बाउंड्री के पास सर्विस लेन से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पास से अलग-अलग शिक्षा बोर्ड और यूनिवर्सिटी के 51 जाली अंकपत्र, प्रमाणपत्र, रजिस्ट्रेशन पेपर, ट्रांसफर सर्टिफिकेट और वेरिफिकेशन दस्तावेज बरामद किए गए। इसके अलावा, दो लैपटॉप, चार मोबाइल फोन, चार नकली मुहरें, एक कार और एक बाइक भी जब्त की गई है। पूछताछ में आरोपी अल्ताफ राजा ने बताया कि वह पहले दिल्ली में डॉ. एसपी पांडेय के साथ मिलकर फर्जी वेबसाइट बनाकर अंकपत्र तैयार करता था। वर्ष 2017 में पुलिस ने उसे और डॉ. एसपी पांडेय को गिरफ्तार किया था।
वहीं, 2019 में लक्ष्य राठौर भी इसी मामले में दिल्ली के चाणक्यपुरी थाना क्षेत्र से जेल गया था। जेल से छूटने के बाद लखनऊ में फिर से जाली दस्तावेज बनाने का काम शुरू कर दिया। इसके लिए आरोपियों ने GoDaddy और Big Rock जैसी डोमेन सर्विसेस पर कई फर्जी वेबसाइट बनाई थीं। इन वेबसाइटों पर जाली अंकपत्र अपलोड किया जात था साथ और ऑनलाइन वेरिफिकेशन भी किया जाता था। Noida News :
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