उत्तर प्रदेश के इस बड़े काण्ड में आया बड़ा फ़ैसला पूर्व एसओ रिहा
UP News
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 04:45 AM
UP News : उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित बिकरू कांड में एक बड़ी खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने कानपुर के चौबेपुर थाने के तत्कालीन एसओ रहे विनय तिवारी की दूसरी जमानत अर्जी को सशर्त मंजूर कर लिया है। विनय तिवारी पर गैंगस्टर विकास दुबे को पुलिस छापे की सूचना देने का आरोप है। इस फैसले के बाद लगभग पांच साल से जेल में बंद विनय तिवारी की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित उत्तर प्रदेश के हाई कोर्ट में बुधवार, 18 जून 2025 को न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व एस एच ओ विनय तिवारी की जमानत अर्जी पर सुनवाई की। कोर्ट ने उनके वकील की दलीलों, मुकदमे की प्रगति में देरी, और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शीघ्र सुनवाई के मौलिक अधिकार को ध्यान में रखते हुए सशर्त जमानत मंजूर की।
विनय के वकील ने दलील दी कि जांच में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, जो यह साबित करे कि तिवारी ने विकास दुबे को छापे की सूचना दी थी। साथ ही, अन्य सह-आरोपियों को जमानत मिलने का हवाला भी दिया गया।उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट ने यह भी माना कि ट्रायल में 102 गवाहों में से केवल 13-14 का ही परीक्षण पूरा हुआ है, और मुकदमा जल्द खत्म होने की संभावना नहीं है। जेलों में अंडर-ट्रायल कैदियों की भीड़ और सुप्रीम कोर्ट के मनीष सिसोदिया मामले के फैसले का हवाला देते हुए जमानत दी गई।
क्या है उत्तर प्रदेश का बिकरू कांड ?
2 जुलाई 2020 की रात में उत्तर प्रदेश के कानपुर के चौबेपुर थाना क्षेत्र के बिकरू गांव में गैंगस्टर विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर उसके गुर्गों ने हमला कर दिया था। इस हमले में सीओ देवेंद्र मिश्रा सहित आठ पुलिसकर्मियों की हत्या हो गई थी। घटना के बाद विकास दुबे को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया गया, लेकिन वापसी के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ हुई पुलिस मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई।
विनय तिवारी और हलका प्रभारी केके शर्मा पर आरोप था कि उन्होंने विकास दुबे को पुलिस छापे की जानकारी दी थी। इस आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। विनय तिवारी 8 जुलाई 2020 से जेल में थे और उनकी पहली जमानत अर्जी सितंबर 2021 में खारिज हो गई थी।
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ़ से अभियोजन पक्ष का विरोध
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ़ से अपर शासकीय अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि विनय तिवारी और सह-आरोपी केके शर्मा ने विकास दुबे के साथ मिलकर साजिश रची, जिसके चलते आठ पुलिसकर्मियों की हत्या हुई। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रायल जल्द पूरा होने वाला है। हालांकि, कोर्ट ने अभियोजन की दलीलों को दरकिनार करते हुए जमानत मंजूर की।
उत्तर प्रदेश पुलिस के इंस्पेक्टर की रिहाई की प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश के हाईकोर्ट में विनय तिवारी के वकील शैलेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद एंटी-डकैती कोर्ट में दो-दो लाख रुपये के दो बेल बॉन्ड जमा किए गए हैं। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद गुरुवार शाम तक उनकी रिहाई संभव है।
उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश में हुई थी बिकरू कांड की गूंज
उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश में भी बिकरु कांड की गूंज हुई थी । उत्तर प्रदेश के बिकरू कांड ने उत्तर प्रदेश में अपराध और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए थे। इस घटना के बाद 66 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से कई को जमानत मिल चुकी है। विनय तिवारी की जमानत ने एक बार फिर इस कांड की यादें ताजा कर दी हैं।पुलिस और प्रशासन की ओर से अभी इस फैसले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन यह मामला कानपुर और पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है। UP News