अयोध्या गोलीकांड के 36 साल बाद एक बार फिर 2 नवंबर 1990 की वो दर्दनाक घटना चर्चा में है, जिसने राम मंदिर आंदोलन का इतिहास बदल दिया था। उत्तर प्रदेश के नेताओं ने सोशल मीडिया पर उस दौर की तस्वीरें साझा कर तत्कालीन सरकार पर तीखा हमला बोला।

UP News : अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन के दौरान 2 नवंबर 1990 को हुए पुलिस गोलीकांड की यादें आज भी लोगों के मन में ताजा हैं। इस घटना को 36 वर्ष पूरे होने पर उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख नेताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से उस दिन शहीद हुए कारसेवकों को याद किया और विशेष रूप से कोलकाता के कोठारी बंधुओं के बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया। नेताओं की पोस्ट के बाद एक बार फिर अयोध्या गोलीकांड और राम मंदिर आंदोलन के उस दर्दनाक अध्याय की चर्चा शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, भाजपा नेता शलभ मणि त्रिपाठी और स्वतंत्र देव सिंह से जुड़े सोशल मीडिया संदेशों में इस ऐतिहासिक घटना और कारसेवकों के बलिदान का स्मरण किया गया है। UP News
यह भी पढ़ें :हमीरपुर में 3 साल की मासूम की हत्या के बाद पुलिस का बड़ा एक्शन, जवाबी कार्रवाई में घायल
राम मंदिर आंदोलन के इतिहास में कोलकाता के दो सगे भाइयों रामकुमार कोठारी और शरद कुमार कोठारी का नाम विशेष रूप से लिया जाता है। दोनों भाई राम जन्मभूमि आंदोलन में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुंचे थे। 30 अक्टूबर 1990 को दोनों भाइयों ने विवादित ढांचे के गुंबद पर चढ़कर भगवा ध्वज फहराया था। इसके बाद 2 नवंबर 1990 को अयोध्या में दोबारा कारसेवकों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हुआ। इसी दौरान पुलिस की गोलीबारी में दोनों भाइयों की जान चली गई। उस समय रामकुमार कोठारी की उम्र लगभग 23 वर्ष और शरद कोठारी की उम्र लगभग 20 वर्ष बताई गई थी। कम उम्र में दोनों भाइयों की मृत्यु राम मंदिर आंदोलन के इतिहास की सबसे चर्चित और भावनात्मक घटनाओं में शामिल हो गई। UP News
इसे भी पढ़ें : अमेठी मेंधान खरीद अभियान शुरू, किसानों को 48 घंटे में मिलेगा भुगतान
अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान अक्टूबर 1990 के अंतिम दिनों में बड़ी संख्या में कारसेवक जुटे थे। 30 अक्टूबर को भी पुलिस और कारसेवकों के बीच टकराव हुआ था। इसके दो दिन बाद 2 नवंबर को कारसेवकों ने फिर आगे बढ़ने का प्रयास किया। इस दौरान सुरक्षा बलों की ओर से गोलीबारी की गई। इस घटना में कई कारसेवकों की जान चली गई। विभिन्न पक्षों की ओर से मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए गए, जबकि मीडिया में प्रकाशित ऐतिहासिक विवरणों में आधिकारिक आंकड़े के तौर पर 17 मौतों का उल्लेख मिलता है। इस गोलीकांड में कोठारी बंधुओं की मौत ने पूरे राम मंदिर आंदोलन को गहरे भावनात्मक स्तर पर प्रभावित किया। UP News
अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी राम मंदिर आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले कारसेवकों की स्मृतियां चर्चा में बनी हुई हैं। कोठारी बंधुओं की कहानी केवल दो युवकों की मृत्यु की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस दौर के आंदोलन, संघर्ष, राजनीतिक परिस्थितियों और उससे जुड़े परिवारों की पीड़ा का भी हिस्सा है। आज जब उत्तर प्रदेश के नेता इस घटना को याद कर रहे हैं, तब यह सवाल भी प्रासंगिक हो जाता है कि इतिहास के इस अध्याय को आने वाली पीढ़ियों तक किस तरह पहुंचाया जाए, ताकि उस समय की घटनाओं, उनके मानवीय पक्ष और उनसे जुड़े विभिन्न दृष्टिकोणों को समझा जा सके। 36 वर्ष बाद भी 2 नवंबर की तारीख अयोध्या के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक दिन के रूप में याद की जाती है। कोठारी बंधुओं का नाम राम मंदिर आंदोलन के इतिहास में आज भी श्रद्धा और स्मरण के साथ लिया जाता है। UP News
विज्ञापन