
Ayodhya Ram Mandir : अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर के लिए जहां अनेकों राम भक्तों ने अपना बलिदान दिया है, वहीं दूसरी ओर एक बुजुर्ग महिला ऐसी भी है, जो 30 सालों से खामोश थी। आज से तीस साल पहले जब उन्होंने मौन व्रत धारण किया तो उन्होंने कहा था कि जब राम मंदिर बनेगा, तभी वह अपनी जबान खोलेगी। मंगलवार को इन माताजी ने अपना मौन व्रत खोला तो उनकी जबान से केवल राम का नाम ही निकला।
आपको बता दें कि झारखंड के धनबाद के करमटांड़ निवासी 85 वर्षीय सरस्वती देवी ने 30 साल पहले 6 दिसंबर 1992 को जब अयोध्या में विवादित ढांचा गिराया गया था, तब मौन व्रत धारण कर लिया था। संकल्प लिया था कि जब तक राम मंदिर नहीं बन जाता है और रामलला मंदिर में विराजमान नहीं हो जाते तब तक वह मौन ही रहेंगी। माताजी सरस्वती देवी ने मौन व्रत के दौरान ही चारों धाम की यात्रा की। उन्होंने अयोध्या, काशी, मथुरा, तिरुपति बालाजी, सोमनाथ मंदिर, बाबा बैद्यनाथधाम का भ्रमण किया। प्रभु राम के चरणों में अपना जीवन समर्पित करने वाली सरस्वती देवी का अधिकतर समय इन दिनों अयोध्या में ही बीतता है। वे बेहद खुश हैं और लिख कर बताती हैं, ‘मेरा जीवन हो गया, रामलला ने मुझे प्राण प्रतिष्ठा में बुलाया है। मेरी तपस्या, साधना सफल हुई।
85 साल की सरस्वती देवी के 60 वर्षीय पुत्र हरिराम अग्रवाल मंगलवार को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का भावुक हो गए। वह अपनी माता जी के साथ अयोध्या में ही थे। उन्होंने बताया कि आज तीस साल बाद मेरी मां ने अपना मौन व्रत खोला है। मौन व्रत खोलने के बाद उनके मुंह से केवल और केवल 'सीताराम सीताराम सीताराम' ही निकला।
अयोध्या के राम मंदिर पहुंचे हरिराम अग्रवाल ने बताया कि मां सरस्वती देवी अधिकतर तीर्थ स्थलों में ही रहती हैं और हमेशा मौन धारण किए रहती हैं। अगर परिवार के लोगों को कुछ कहना होता है तो लिखकर अपनी बात बताती हैं।
हरिराम अग्रवाल ने बताया कि उनकी माता जी का प्रण था कि जिस दिन रामलला मंदिर में विराजमान होंगे, उसी दिन ही वह अपना प्रण तोड़ेंगी। मां ने अपनी बात लिखकर यह बताई है कि मौन व्रत के बाद पहला शब्द 'सीताराम-सीताराम' बोलेंगी। आखिरकार सरस्वती देवी ने यही किया।