बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए बयान पर मथुरा-वृंदावन के संतों का समर्थन क्यों मिला ? आखिर संत समाज उन्हें पागल मानने वाली टिप्पणियों से क्यों सहमत नहीं है ?
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UP News : बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों अपने एक बयान को लेकर देशभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई उनकी टिप्पणी ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उत्तर प्रदेश में भी इस बयान को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। एक तरफ बड़ी संख्या में लोग उनके शब्दों पर आपत्ति जता रहे हैं, वहीं अब मथुरा के संतों ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के समर्थन में आवाज उठाई है। मथुरा के संतों ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उनका बचाव किया है। संत समाज के इस समर्थन के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। खास बात यह है कि जिस बयान को लेकर सोशल मीडिया और आम नागरिकों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, उसी बयान पर अब संतों की अलग राय सामने आई है।
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दरअसल, बाबा बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के संदर्भ में कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिन्हें लेकर विवाद खड़ा हो गया। भगवान राम और श्रीकृष्ण करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। ऐसे में दोनों के स्वरूप और महिमा को लेकर की गई टिप्पणी पर लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया। कई लोगों ने उनके शब्दों को अनुचित बताया और धार्मिक आस्था से जुड़े विषयों पर सार्वजनिक रूप से बोलते समय अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता जताई।
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इस पूरे विवाद के बीच भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा के संतों की प्रतिक्रिया सामने आई है। मथुरा के संतों ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के समर्थन में अपनी बात रखी है। संतों का कहना है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर जिस तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं, वे उनसे सहमत नहीं हैं। संत समाज के इस रुख ने विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। मथुरा के संतों की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट हुआ है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान को लेकर धार्मिक जगत में भी एक जैसी राय नहीं है। जहां कुछ लोग उनके शब्दों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं कुछ संत उनके पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।
बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री देश के चर्चित धार्मिक वक्ताओं में शामिल हैं। उनके कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और उनके बयानों की चर्चा अक्सर धार्मिक तथा सामाजिक मंचों पर होती है। हालांकि, उनके कुछ सार्वजनिक वक्तव्यों को लेकर पहले भी बहस और विवाद सामने आते रहे हैं। इस बार भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण को लेकर दिए गए बयान ने एक नई बहस को जन्म दिया है। चेतना मंच ने भी इस प्रकरण को प्रमुखता से उठाते हुए उनके शब्दों पर सवाल खड़े किए थे। अब मथुरा के संतों के समर्थन के बाद इस मुद्दे पर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान भगवान राम तथा भगवान श्रीकृष्ण से गहराई से जुड़ी हुई है। अयोध्या और मथुरा जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल इसी प्रदेश में स्थित हैं। ऐसे में दोनों आराध्य देवों को लेकर किसी चर्चित धार्मिक वक्ता की टिप्पणी का प्रदेश में चर्चा का विषय बनना स्वाभाविक है। अब देखना दिलचस्प होगा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर आगे और कौन-कौन से संत तथा धार्मिक संगठन अपनी प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल मथुरा के संतों के समर्थन ने इस विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
5 नवंबर 2026 को वृंदावन के श्रीराधाकांत मंदिर में ब्रज तीर्थ देवालय न्यास और धर्म रक्षा संघ के संयुक्त तत्वावधान में संतों एवं धर्माचार्यों की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने की। इसमें धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान को लेकर उठे विवाद पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में भागवताचार्य मृदुलकांत शास्त्री ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का त्रिभंगी स्वरूप सनातन धर्म की प्राचीन और दिव्य परंपरा का हिस्सा है। भक्त कवियों और रसिक संतों ने सदियों से भगवान के इस स्वरूप का प्रेमपूर्वक वर्णन किया है। इसलिए किसी भक्त द्वारा अपने आराध्य के स्वरूप का भावपूर्ण वर्णन करना अपमान नहीं माना जाना चाहिए। अखाड़ा परिषद वृंदावन के अध्यक्ष महंत हरिशंकर दास नागा ने भी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि रसिक संत भगवान श्रीकृष्ण की बांकी चितवन, बांकी अदा और त्रिभंगी मुद्रा का प्रेमपूर्वक वर्णन करते रहे हैं। धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री सनातन धर्म और हिंदू समाज को जागृत करने का कार्य कर रहे हैं। उनके बयान को उसके भाव और संदर्भ से अलग करके विवाद खड़ा करना उचित नहीं है।
वृंदावन में आयोजित इस बैठक के दौरान संतों के बीच एक और विवाद देखने को मिला। नंदगांव के सेवायत हरिमोहन गोस्वामी ने आरोप लगाया कि कुछ संत और कथावाचक अपने बयानों को बदलने के लिए लिफाफे दिए जाने की परंपरा में शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें भी एक बड़े संत ने लिफाफा दिया था, लेकिन उन्होंने उसे लौटा दिया। इस आरोप के बाद बैठक में मौजूद धर्माचार्यों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। स्थिति को संभालने के लिए आचार्य मृदुलकांत शास्त्री को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने सभी को समझाकर शांत कराया। इस घटनाक्रम ने बैठक को और चर्चा में ला दिया।
इस पूरे विवाद के बीच धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भी अपनी टिप्पणी पर सफाई दे चुके हैं। उन्होंने वीडियो जारी करके कहा था कि उनकी बात का उद्देश्य भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण में भेद करना नहीं था। उन्होंने अपनी टिप्पणी को भक्ति परंपरा में प्रचलित विनोद और व्यंग्य स्तुति के भाव से जोड़कर समझाया था। उन्होंने कहा कि वह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के भक्त हैं और उनके मन में ठाकुरजी के प्रति कोई विरोध नहीं है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भाव में उनसे कुछ बातें कह दी गईं और यदि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो वह क्षमा चाहते हैं।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान के बाद शुरू हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। शुरुआत में जहां सोशल मीडिया पर उनकी टिप्पणी को लेकर नाराजगी देखने को मिली, वहीं अब वृंदावन के अनेक संत और धर्माचार्य उनके पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि धार्मिक प्रवचन में प्रयुक्त शब्दों को किस संदर्भ में समझा जाना चाहिए और किसी संत या कथावाचक के बयान पर प्रतिक्रिया देते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। फिलहाल इतना जरूर है कि बाबा बागेश्वर धाम वाले धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का भगवान राम और श्रीकृष्ण को लेकर दिया गया बयान उत्तर प्रदेश में धार्मिक चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। ी:
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