उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में भाई-बहन के रिश्ते को शर्मसार करने वाला एक सनसनीखेज हत्याकांड सामने आया है। क्या 42 लाख रुपये का मुआवजा एक भाई के लिए अपनी सगी बहन की जान से भी ज्यादा कीमती हो गया था ?

UP News : उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जिसने भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को शर्मसार कर दिया है। जिस बहन को भाई की कलाई पर राखी बांधकर अपनी सुरक्षा का भरोसा मिलता था, उसी बहन की हत्या करने का आरोप उसके सगे भाई पर लगा है। आरोप है कि घर में आने वाले 42 लाख रुपये के मुआवजे में बहन को हिस्सा न देना पड़े, इसलिए भाई ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर बहन की हत्या कर दी। पुलिस ने इस मामले में आरोपी भाई और भाभी को गिरफ्तार कर लिया है। भाई-बहन का रिश्ता दुनिया के सबसे अनमोल रिश्तों में गिना जाता है। बहन के लिए भाई केवल परिवार का एक सदस्य नहीं, बल्कि सुख-दुख का साथी और मुश्किल समय में सुरक्षा की उम्मीद होता है। भाई की कलाई पर बंधी राखी सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि जीवनभर साथ निभाने और बहन की रक्षा करने का वचन होती है। लेकिन बाराबंकी की इस घटना ने रिश्तों की इसी खूबसूरत परिभाषा को झकझोर दिया है। जिस भाई से बहन को अपनापन और सुरक्षा की उम्मीद थी, उसी भाई पर उसकी जान लेने का आरोप है। जिस रिश्ते में बहन के आंसू पोंछने की उम्मीद होती है, वहां 42 लाख रुपये की रकम को लेकर खून बहने का आरोप सामने आया है। यह पूरा मामला बाराबंकी के रामनगर थाना क्षेत्र के महादेवा गांव का है। मृतका की पहचान 42 वर्षीय मंजू गौतम के रूप में हुई है। वह आंगनबाड़ी कार्यकत्री थीं। पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस हत्याकांड के पीछे महादेवा कॉरिडोर परियोजना के लिए मिलने वाला मुआवजा बड़ी वजह बना।
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पुलिस के अनुसार, आरोपी संदीप का मकान महादेवा कॉरिडोर परियोजना की जद में आया था। मकान के बदले उसे लगभग 42 लाख रुपये का मुआवजा मिलने वाला था। इतनी बड़ी रकम मिलने की जानकारी के बाद परिवार में हिस्सेदारी को लेकर विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि संदीप अपनी बहन मंजू को मुआवजे की रकम में हिस्सा नहीं देना चाहता था। इसी बात को लेकर भाई-बहन के बीच तनाव बढ़ता गया। पुलिस की जांच के मुताबिक, संदीप ने अपनी पत्नी शीतल उर्फ मायावती के साथ मिलकर बहन की हत्या की योजना बनाई।
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इस हत्याकांड की सबसे दर्दनाक बात यह है कि मंजू को उस समय निशाना बनाया गया, जब वह अपने ही घर की रसोई में खाना बना रही थीं। पुलिस के मुताबिक, 30 अक्टूबर को मंजू पर ईंट से हमला किया गया। उनके सिर और चेहरे पर कई वार किए गए, जिससे उनकी मौत हो गई। घर के भीतर हुई इस वारदात ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।
मंजू की हत्या के मामले में उनकी छोटी बहन वंदना ने एक नवंबर को रामनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में संदीप और उसकी पत्नी शीतल पर हत्या का आरोप लगाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच के लिए स्वाट, सर्विलांस और रामनगर थाना पुलिस की संयुक्त टीम लगाई। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और संदिग्धों से पूछताछ शुरू की।
बाराबंकी पुलिस ने तीन नवंबर को मामले का खुलासा करते हुए आरोपी संदीप और उसकी पत्नी शीतल उर्फ मायावती को गिरफ्तार कर लिया। अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी विवेक तिवारी के मुताबिक, आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई ईंट भी बरामद की गई है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में मुआवजे की रकम को लेकर हत्या की साजिश रचे जाने की बात सामने आई है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
बाराबंकी का यह हत्याकांड समाज को झकझोरने वाला है। जिस रिश्ते में प्यार, विश्वास और सुरक्षा की उम्मीद की जाती है, उसी रिश्ते में पैसों के विवाद ने ऐसी भयावह परिणति ले ली।
महादेवा कॉरिडोर के लिए मकान के बदले मिलने वाले 42 लाख रुपये की रकम को लेकर शुरू हुआ विवाद एक महिला की जिंदगी छीन लेने तक पहुंच गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो उसे विश्वास होता है कि दुनिया में चाहे कितनी भी मुश्किलें आ जाएं, उसका भाई हमेशा उसके साथ खड़ा रहेगा। भाई भी बहन के सुख-दुख में साथ निभाने का वादा करता है। लेकिन बाराबंकी की इस घटना में सामने आए आरोपों ने इस विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है। आखिर 42 लाख रुपये की कीमत एक बहन की जिंदगी से बड़ी कैसे हो गई? जिस बहन के साथ बचपन की यादें जुड़ी हों, जिस बहन के साथ एक ही घर में जीवन के अनगिनत पल बीते हों, उसी के खिलाफ इतनी बड़ी साजिश का आरोप बेहद पीड़ादायक है। धन-संपत्ति और मुआवजे की रकम तो आज है, कल नहीं भी हो सकती, लेकिन रिश्ते टूट जाने के बाद उनकी जगह कोई दौलत नहीं ले सकती। बाराबंकी की यह घटना एक कड़वी सीख देती है कि जब इंसान के ऊपर धन का लालच हावी हो जाता है, तो कभी-कभी वह उन रिश्तों की अहमियत भी भूल जाता है, जो जीवनभर उसका सहारा बन सकते थे।
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