42 साल पुराने मुद्दे के सहारे 2027 जीतने की योजना बना रही है भाजपा
Muzaffarnagar
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 10:59 PM
Muzaffarnagar : उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) का नाम बदल कर लक्ष्मीनगर रखने की बात से सियासत गरमाई हुई है। 42 साल पुराने इस मुद्दे को बीजेपी एमएलसी (MLC) मोहित बेनिवाल ने हवा दी है। साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष भी अगले हफ्ते बोर्ड की बैठक में इस मुद्दे को उठा सकते हैं। तो क्या यह 42 साल पुराना मुद्दा फिर से उठा कर 2027 के चुनाव में फायदे के लिए किया जा रहा है ?
दरअसल 2013 में मुजफ्फरनगर में जाटों और मुसलमानों के बीच सांप्रदायिक दंगा हुआ था जिसकी वजह से भाजपा को बहुत फायदा मिला था और और एक साल बाद हुए लोकसभा चुनाव में विपक्ष का सफाया कर दिया था। 2017 के भी चुनाव में कैराना से हिंदुओ के पलायन के मुद्दे कि मदद से भाजपा को फायदा मिला औऱ इस बार भी आगामी विधानसभा चुनाव में भी मुजफ्फरनगर के नाम को बदलने के बहाने से पश्चिम यूपी में अपनी पकड़ बनाने की ताल में है। यही कारण है कि न केवल 42 साल पुराने मुद्दे को उठाया जा रहा है बल्कि जिला पंचायत के जरिए अमल करने का भी है जो 2027 में भाजपा को जीत दिलाने में मददगार साबित हो सकती है।
मुजफ्फरनगर बनेगा लक्ष्मीनगर
बीजेपी के MLC मोहित बेनिवाल ने मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) का नाम बदलने कि मांग रखी। बुधवार को विधान परिषद में बेनिवाल बोले कि साधु-संत लंबे समय से मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) का नाम बदलने की मांग रख रहे है। उन्होनें कहा कि यह हमारी सांस्कृतिक गौरव और सभ्यता का सवाल है।
उन्होनें सीएम योगी से लखनऊ में बुधवार को मुलाकात की और उनके सामने भी यह मुद्दा उठाया। बता दें कि मुजफ्फरनगर के जिला अधिकारी भी इस फैसले के पक्ष में है इसीलिए वो 12 मार्च को होनी वाली बोर्ड बैठक में नाम बदलने का प्रस्ताव रखेंगे।
RSS ने उठाई थी नाम बदलने कि मांग
अस्सी के दशक में भाजपा नें ही राम मंदिर (Ram Mandir) को अपना मुद्द बनाया था। राम मंदिर के आंदोलन में 1983 में शहर के राजकिय इंटर कॉलेज के मैदान में संघ ने सम्मेलन रखा था जिसमें मुजफ्फरनगर का नाम बदलने का मुद्दा उठा था। जिसके चलते संघ ने लक्ष्मीनगर नाम रखने के लिए अभियान चलाया था। पोस्टर और मकानो पर लक्ष्मीनगर लिखा गया था। लंबे समय तक संघ और भाजपा नेता लक्ष्मीनगर के नाम से पोस्टकार्ड भेजते रहे और इस तरह यह लड़ाई काफी लंबे समय से चल रही है।
नाम बदलने से 2027 में होगा फायदा
विधान परिषद में नाम बदलने की बात से 42 साल पुराने मुद्दे को हवा मिल गई है। इस मुद्दे के बहाने भाजपा हिंदु वोटर्स को अपनी तरफ करने की रणनीति बना रही है। 2024 में विधानसभा के चुनाव में भाजपा को पश्चिम यूपी की ओर से तगडा झटका मिला है और 2022 में भी काफी नुकसान झेलना पडा है। आरएलडी (RLD) गठबंदन बनाने के बावजूद भाजपा कैराना,मुजफ्फरनगर जैसी सीटों से भाजपा को हाऱ मिली। यही कारण है कि भाजपा पश्चिम यूपी में अपना समीकरण मजबूत करने की ताल में है। Muzaffarnagar :