क्या उत्तर प्रदेश में महिला नेताओं के लिए राजनीति का रास्ता इतना मुश्किल हो गया है कि उन्हें अपने ही राजनीतिक संगठन के भीतर उत्पीड़न और अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़नी पड़ रही है ? क्या किसी महिला की राजनीतिक पहचान और नेतृत्व क्षमता को दबाने के लिए उसका उत्पीड़न किया जा सकता है ?

UP News : उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिले हों या फिर भारत की राजधानी दिल्ली की सडक़ मर्द सब जगह एक जैसे ही होते हैं। लगता है कि उत्तर प्रदेश के मर्द तो यह ठानकर ही बैठे हुए हैं कि भला कोई भी महिला उनके रहते नेता कैसे बन सकती है। महिला को नेता बनने से रोकने के लिए मर्द नेता बलात्कार तक करेंगे लेकिन नेता नहीं बनने देंगे। UP News
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इस मामले में उत्तर प्रदेश के बलिया का एक ताजा उदाहरण मर्दों को बलात्कार वाली मानसिकता को समझने के लिए काफी है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के बलिया की रहने वाली भाजपा नेत्री ने पार्टी के एक नेता के पाप का घड़ा सरेआम फोड़ दिया। उत्तर प्रदेश के बलिया में भाजपा की जिला कार्यसमिति सदस्य ने अपनी ही पार्टी के जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। महिला ने ग्रामीण महिलाओं के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर मिट्टी का घड़ा फोड़ा और अपने साथ अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो वायरल करने और छेड़छाड़ से जुड़े मामले में FIR दर्ज होने के बावजूद मुख्य आरोपी का नाम मुकदमे से बाहर कर दिया गया। भाजपा की जिला कार्यसमिति सदस्य महिला ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित प्रार्थना पत्र भी सौंपा। UP News
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बलिया में भाजपा जिला कार्यसमिति की सदस्य ने जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा के खिलाफ अनोखे अंदाज में विरोध जताया। वह ग्रामीण महिलाओं के साथ मिट्टी का घड़ा लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जिलाध्यक्ष के कथित गलत कामों का घड़ा भर चुका है और अब उसे फोड़ने का समय आ गया है। महिला का कहना है कि वह पार्टी में मंडल उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं, लेकिन उनके मुताबिक सत्ता के प्रभाव के चलते उनकी आवाज दबाई जा रही है। प्रदर्शन के जरिए उन्होंने मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई। UP News
भाजपा नेत्री ने आरोप लगाया कि वीडियो वायरल करने और छेड़छाड़ से जुड़े मामले में शिकायत करने के बाद उन्हें करीब 10 दिनों तक अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़े। उनके मुताबिक, 15 सितंबर को FIR दर्ज हुई, लेकिन राजनीतिक प्रभाव के कारण जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा का नाम मुकदमे से बाहर कर दिया गया। महिला ने सवाल उठाया कि यदि ऐसा मामला किसी आम नागरिक से जुड़ा होता, तो पुलिस की कार्रवाई अलग होती। UP News
स्थानीय अधिकारियों पर भरोसा नहीं रहने की बात कहते हुए महिला ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित प्रार्थना पत्र सौंपा। उन्होंने कहा कि उन्हें स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिल रहा है, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व से निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद है। भाजपा नेत्री ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें जिला स्तर पर न्याय नहीं मिला, तो वह लखनऊ पहुंचकर भी विरोध प्रदर्शन करेंगी। उन्होंने जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा और तीन अन्य कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले में पुलिस की जांच के साथ पार्टी स्तर पर भी जांच चलने की बात कही गई है। अब इस मामले में संबंधित अधिकारियों और पार्टी नेतृत्व की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। UP News
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