क्या चित्रकूट के प्राचीन मां आनंदी माई मंदिर की बदहाल तस्वीर कभी बदलेगी ? क्या नवरात्र में हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने इस धार्मिक स्थल को सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल पाएंगी ?

UP News : उत्तर प्रदेश के चित्रकूट स्तिथ मानिकपुर ब्लॉक मुख्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर रानीपुर टाइगर रिजर्व क्षेत्र के मरवरिया पहाड़ पर स्थित मां आनंदी माई का प्राचीन मंदिर सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा है। श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र इस मंदिर तक पहुंचने के लिए बेहतर रास्ता नहीं है। बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नदारद हैं। मंदिर परिसर और आसपास की व्यवस्थाएं बदहाल होने से श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ सड़क, बिजली, पानी और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग उठाई है। समुद्र तल से करीब पांच सौ मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर में नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। मानिकपुर के अलावा जिगनवाह, हेला, बगदरी, निही चिरैया, रानीपुर, गिदुरहा, सकरौंहा, लक्ष्मणपुर, खिचरी और शेखापुर समेत आसपास के कई गांवों के लोगों की मां आनंदी माई में गहरी आस्था है। UP News
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मंदिर के पुजारी चंद्रमा दास महाराज के अनुसार, मंदिर से जुड़ी एक प्राचीन किंवदंती प्रचलित है। मान्यता है कि वर्षों पहले एक निसंतान महिला संतान प्राप्ति की कामना लेकर पहाड़ की चोटी पर स्थापित मां आनंदी माई की प्रतिमा के दर्शन करने जाती थी। मां की कृपा से जब वह गर्भवती हुई तो पहाड़ पर चढ़ने में परेशानी होने लगी। महिला ने मां से नीचे आने की प्रार्थना की। मान्यता है कि मां ने स्वप्न में दर्शन देकर उसके साथ नीचे आने की बात कही, लेकिन पीछे मुड़कर न देखने की शर्त रखी। अगले दिन मां के साथ नीचे आते समय महिला ने आधे रास्ते में पीछे मुड़कर देख लिया। इसके बाद मां वहीं विराजमान हो गईं। बाद में श्रद्धालुओं ने उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया। पुजारी चंद्रमा दास महाराज बताते हैं कि वह रुखमा खुर्द गांव के निवासी हैं। करीब 17 वर्ष पहले स्वप्न में मां के दर्शन होने के बाद से वह यहां नियमित पूजा-अर्चना कर रहे हैं। UP News
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मंदिर में दर्शन करने पहुंचे देशराज, नर्वद और मेवालाल समेत अन्य श्रद्धालुओं का कहना है कि धार्मिक महत्व के बावजूद यह स्थल प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। रानीपुर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में होने के कारण रास्ते को लेकर भी दिक्कतें आती हैं। हैंडपंप खराब पड़े हैं और बिजली की व्यवस्था नहीं है। जंगल के बीच मंदिर स्थित होने से सुरक्षा को लेकर भी श्रद्धालुओं में चिंता बनी रहती है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मंदिर तक सुगम आवागमन की व्यवस्था कराने, पेयजल के लिए हैंडपंप दुरुस्त कराने, बिजली पहुंचाने और मंदिर का जीर्णोद्धार कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सुविधाएं विकसित होने से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। UP News
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