चित्रकूट से सटे मध्यप्रदेश के सतना जिले में स्थित धारकुंडी आश्रम के प्रसिद्ध अघमर्षण कुंड में कार्तिक कृष्ण सप्तमी के अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। रविवार को उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात और मुंबई समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से भक्त यहां स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे।
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UP News: कार्तिक कृष्ण सप्तमी के अवसर पर चित्रकूट से सटे मध्यप्रदेश के सतना जिले में स्थित धारकुंडी आश्रम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। रविवार को यहां के प्रसिद्ध अघमर्षण कुंड में लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के अलावा गुजरात, मुंबई सहित देश के विभिन्न हिस्सों से भक्त स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे। देर रात से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। सुबह होते-होते पूरा आश्रम परिसर भक्तों की भीड़ से भर गया। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। रविवार सप्तमी पर अघमर्षण कुंड में स्नान की विशेष धार्मिक मान्यता है। इसी वजह से हर साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। UP News:
धारकुंडी आश्रम के अघमर्षण कुंड का विशेष पौराणिक महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस क्षेत्र का संबंध महाभारत काल से रहा है। कहा जाता है कि वनवास के दौरान पांडव इस क्षेत्र में आए थे। इसी स्थान से यक्ष और धर्मराज युधिष्ठिर के प्रसिद्ध संवाद की कथा भी जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार, यक्ष ने युधिष्ठिर से धर्म, नीति और जीवन से जुड़े कई प्रश्न पूछे थे। युधिष्ठिर के उत्तरों से प्रसन्न होकर यक्ष ने उनके मृत भाइयों को जीवनदान दिया था। महाभारत में वर्णित इस प्रसंग को यक्ष-युधिष्ठिर संवाद के नाम से जाना जाता है। स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अघमर्षण कुंड में स्नान करने से पापों का क्षय होता है और आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है। विशेष रूप से रविवार सप्तमी के दिन यहां स्नान का महत्व अधिक माना जाता है। UP News:
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पहाड़ियों के बीच प्राकृतिक जलधारा से बना है कुंड
विंध्य पर्वत श्रृंखला और घने जंगलों के बीच स्थित धारकुंडी आश्रम प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का अनूठा संगम है। दो पहाड़ियों के बीच से लगातार बहने वाली जलधारा कुंड में गिरती है। इसी प्राकृतिक जलधारा के कारण इस स्थान का नाम धारकुंडी पड़ा। कुंड भूतल से करीब 100 मीटर नीचे स्थित है। आश्रम परिसर में साधना स्थल, पहाड़ी कंदराएं और प्राकृतिक जलस्रोत भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। यहां पहुंचने वाले भक्त धार्मिक अनुष्ठानों के साथ प्राकृतिक वातावरण का भी अनुभव करते हैं।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए गए थे। धारकुंडी चौकी प्रभारी विनोद कुशवाहा पुलिस टीम के साथ मौके पर तैनात रहे। पुलिसकर्मियों ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी की। संत संजय महाराज ने बताया कि अघमर्षण कुंड में स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे महाभारत काल से जुड़ा तीर्थ स्थल माना जाता है। रविवार सप्तमी के अवसर पर दूर-दराज से श्रद्धालु यहां पुण्य स्नान के लिए पहुंचते हैं। इस धार्मिक आयोजन से चित्रकूट और सतना क्षेत्र में तीर्थाटन तथा धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है। UP News:
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