सहारनपुर में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के नेतृत्व में किसान गन्ना लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति कुंतल करने, फसल नुकसान का मुआवजा, सस्ता आलू बीज और यूरिया-डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता समेत छह मांगें उठाईं।

UP News: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान गन्ना लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा। किसानों ने गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति कुंतल करने समेत छह प्रमुख मांगें उठाईं। उनका कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि फसलों का उचित मूल्य और नुकसान का मुआवजा मिलने में समस्याएं आ रही हैं। किसानों ने चेतावनी दी कि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं हुआ तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
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भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल चौधरी ने कहा कि डीजल, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और कृषि मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद गन्ने के मूल्य में लागत के अनुरूप बढ़ोतरी नहीं हो रही है। किसानों का कहना है कि चीनी के दाम बढ़ने के बावजूद उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा। उन्होंने गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित करने और भुगतान समय पर सुनिश्चित करने की मांग की। किसानों ने बताया कि पिछले दिनों बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से सरसों, उड़द, धान और गन्ने की फसलों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने गांववार सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को वास्तविक नुकसान के आधार पर मुआवजा देने की मांग की। इसके साथ ही पात्र किसानों को फसल बीमा की राशि उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई गई। UP News:
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने आलू के बीज की कीमतों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि बाजार में आलू का भाव लगभग 200 रुपये प्रति कुंतल बताया जा रहा है, जबकि उद्यान विभाग की ओर से बीज ऊंची दरों पर उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों ने आलू के बीज का मूल्य अधिकतम 1,500 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित करने के साथ सस्ता बीज और कोल्ड स्टोर की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की। किसानों ने कहा कि कई लोग किराये पर जमीन लेकर खेती करते हैं, लेकिन फसल नुकसान होने पर उन्हें मुआवजा मिलने में दिक्कत आती है। ज्ञापन में मांग की गई कि ग्राम पंचायत, लेखपाल और कृषि विभाग के सत्यापन के आधार पर ऐसे किसानों को भी फसल नुकसान का मुआवजा दिया जाए।
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किसानों ने फसल की जरूरत के अनुसार यूरिया और डीएपी खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि मिल और ब्लॉक स्तर पर खाद की मांग का आकलन करके पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि किसानों को बुवाई और खेती के दौरान परेशानी का सामना न करना पड़े।
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के प्रदेश अध्यक्ष जयपाल चौधरी ने कहा कि किसान बढ़ती लागत और प्राकृतिक आपदाओं के बीच खेती करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर अपनी मांगों पर कार्रवाई की अपील की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। UP News:
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