UP SI Exam के एक सवाल से क्यों मचा है बवाल? जानें कैसे बनता है प्रश्नपत्र

उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में एक सवाल के विकल्प में “पंडित” शब्द दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। कई नेताओं ने इसे लेकर आपत्ति जताई है और जांच की मांग की है। इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश में परीक्षा प्रणाली और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

UP SI Exam Controversy
UP Police SI Exam Controversy
locationभारत
userअसमीना
calendar15 Mar 2026 11:02 AM
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उत्तर प्रदेश में आयोजित उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा को लेकर इन दिनों बड़ा विवाद सामने आया है। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती से जुड़ी इस परीक्षा के एक सवाल में दिए गए विकल्प को लेकर आपत्ति जताई जा रही है। मामला इतना बढ़ गया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी इसकी चर्चा होने लगी। इस परीक्षा में शामिल लाखों अभ्यर्थियों के बीच भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। दरअसल उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में एक सवाल के विकल्प में “पंडित” शब्द दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। कई नेताओं ने इसे लेकर आपत्ति जताई है और जांच की मांग की है। इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश में परीक्षा प्रणाली और प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सवाल उठ रहा है कि उत्तर प्रदेश की इस महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र आखिर बनाता कौन है, उस पर अंतिम मुहर कौन लगाता है और गलती होने पर जिम्मेदारी किसकी होती है।

क्या है पूरा विवाद?

उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा 14 और 15 मार्च 2026 को आयोजित की जा रही है। यह परीक्षा चार पालियों में आयोजित की जा रही है। 14 मार्च की परीक्षा में सामान्य हिन्दी के प्रश्नपत्र में एक सवाल पूछा गया था-

“अवसर के अनुसार बदल जाने वाला” इस वाक्यांश के लिए एक शब्द चुनिए।

इसके लिए चार विकल्प दिए गए थे:

A – पंडित

B – अवसरवादी

C – निष्कपट

D – सदाचारी

इसी सवाल में “पंडित” शब्द को विकल्प के रूप में शामिल करने पर विवाद शुरू हो गया। कई लोगों ने इसे गलत और आपत्तिजनक बताया।

नेताओं की प्रतिक्रिया और जांच की मांग

इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मंत्री अभिजात मिश्रा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस सवाल के विकल्प पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और किसी भी जाति या समुदाय का अपमान करने वाली चीज स्वीकार नहीं की जाएगी।

कितने पदों के लिए हो रही है परीक्षा?

उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा लगभग 4500 पदों के लिए आयोजित की जा रही है। इस भर्ती में करीब 15 लाख अभ्यर्थी शामिल हो रहे हैं। परीक्षा के लिए पूरे राज्य में लगभग 1100 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं जहां सुरक्षा और गोपनीयता के साथ परीक्षा आयोजित की जा रही है।

प्रश्नपत्र बनाने की जिम्मेदारी किसकी होती है?

उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा का आयोजन उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा किया जाता है। इस बोर्ड के प्रमुख आमतौर पर महानिदेशक स्तर के अधिकारी होते हैं और उनके साथ पुलिस अधिकारियों की टीम काम करती है। हालांकि, प्रश्नपत्र तैयार करने का पूरा काम अक्सर किसी निजी एजेंसी को दिया जाता है। यह एजेंसी विशेषज्ञों की मदद से प्रश्न तैयार करवाती है, उनकी जांच करती है और फिर प्रश्नपत्र तैयार करती है।

विशेषज्ञों की टीम कैसे बनाती है प्रश्न?

किसी भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा के लिए विषय विशेषज्ञों का एक पैनल तैयार किया जाता है। इसमें विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, सेवानिवृत्त अधिकारी और विषय के जानकार शामिल होते हैं। इन विशेषज्ञों को सिलेबस के अनुसार बड़ी संख्या में प्रश्न तैयार करने के निर्देश दिए जाते हैं। बाद में इन सभी प्रश्नों को एक सुरक्षित प्रश्न बैंक में रखा जाता है।

मॉडरेशन प्रक्रिया क्यों होती है जरूरी?

जब प्रश्न तैयार हो जाते हैं तो उन्हें एक विशेष समिति द्वारा जांचा जाता है। इसे मॉडरेशन प्रक्रिया कहा जाता है। इस दौरान यह देखा जाता है कि सवाल सिलेबस के अनुसार हैं या नहीं, किसी प्रश्न के एक से ज्यादा सही उत्तर तो नहीं हैं, भाषा स्पष्ट और सही है या नहीं, प्रश्नों का स्तर आसान, मध्यम और कठिन में संतुलित है या नहीं। माना जा रहा है कि इस मामले में इसी चरण में कहीं न कहीं गलती हुई है।

अंतिम प्रश्नपत्र पर कौन लगाता है मुहर?

जब सभी प्रश्नों की जांच पूरी हो जाती है, तो परीक्षा से पहले परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था का कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन या उच्च स्तरीय समिति अंतिम प्रश्नपत्र का चयन करती है। अक्सर दो या तीन अलग-अलग सेट तैयार रखे जाते हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में दूसरा प्रश्नपत्र इस्तेमाल किया जा सके। अंतिम चयन के बाद उस पर आधिकारिक मंजूरी दी जाती है।

प्रिंटिंग और सुरक्षा की सख्त व्यवस्था

प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उन्हें बेहद सुरक्षित प्रिंटिंग प्रेस में छापा जाता है। इस दौरान वहां काम करने वाले कर्मचारियों को बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग रखा जाता है। प्रिंटिंग के बाद प्रश्नपत्र सीलबंद बॉक्स में रखे जाते हैं और कड़ी सुरक्षा के साथ परीक्षा केंद्रों या बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम तक पहुंचाए जाते हैं।

भविष्य में कैसे रोके जा सकते हैं ऐसे विवाद?

विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) जैसी संस्थाओं की मदद ली जा सकती है। इन संस्थाओं के पास देशभर के विशेषज्ञों का बड़ा नेटवर्क होता है और इनके जरिए प्रश्नपत्रों की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखी जा सकती है।

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चर्चित IAS अभिषेक प्रकाश की बहाली पर लगी मुहर, राज्यपाल ने दी मंजूरी

उत्तर प्रदेश की नौकरशाही से इस वक्त बड़ी अपडेट सामने आई है। उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में लंबे समय से सुर्खियों में चल रहे 2006 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बड़ी प्रशासनिक राहत मिल गई है।

चर्चित IAS अभिषेक प्रकाश
चर्चित IAS अभिषेक प्रकाश
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar14 Mar 2026 04:46 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की नौकरशाही से इस वक्त बड़ी अपडेट सामने आई है। उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में लंबे समय से सुर्खियों में चल रहे 2006 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बड़ी प्रशासनिक राहत मिल गई है। रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित किए गए अभिषेक प्रकाश की बहाली का आदेश जारी कर दिया गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद उन्हें 15 मार्च से दोबारा सेवा में बहाल माना जाएगा। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि यह बहाली किसी तरह की क्लीन चिट नहीं है। उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच पहले की तरह जारी रहेगी और जांच के दौरान दस्तावेजों, साक्ष्यों व प्रशासनिक तथ्यों की पड़ताल भी होती रहेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को रद्द कर दिया था। अदालत के इसी फैसले के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने उनकी बहाली की प्रक्रिया तेज कर दी थी।

रिश्वत के आरोप में मार्च 2025 में हुए थे सस्पेंड

उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा तंत्र में उस समय हलचल मच गई थी, जब 20 मार्च 2025 को IAS अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया गया था। उन पर आरोप था कि एक सोलर कंपनी से परियोजना को मंजूरी देने के बदले कथित रूप से रिश्वत मांगी गई। कंपनी की शिकायत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके खिलाफ सख्त कदम उठाया था। मामला अदालत पहुंचा तो सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि आरोपों को पुष्ट करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसी आधार पर अभिषेक प्रकाश के खिलाफ दाखिल चार्जशीट को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश शासन में उनकी बहाली को लेकर रास्ता साफ हो गया।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद तेज हुई बहाली की प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में निलंबन की अवधि एक वर्ष पूरी होने से पहले इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को भेजी जानी थी। प्रशासनिक प्रक्रिया के इसी क्रम में 14 मार्च के बाद उनकी बहाली को प्रभावी मानते हुए राज्यपाल स्तर से आदेश जारी किया गया। यह भी माना जा रहा है कि हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने कानूनी और विभागीय पहलुओं की समीक्षा की, जिसके बाद बहाली का फैसला लिया गया। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर जांच पूरी होने तक मामला पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।

भटगांव जमीन अधिग्रहण प्रकरण में भी रहे सवालों के घेरे में

उत्तर प्रदेश में अभिषेक प्रकाश का नाम भटगांव जमीन अधिग्रहण मामले में भी सामने आया था। इस प्रकरण में राजस्व विभाग ने मई 2025 में उनके खिलाफ चार्जशीट की संस्तुति करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट नियुक्ति विभाग को भेजी थी। यह रिपोर्ट राजस्व परिषद के तत्कालीन चेयरमैन रजनीश दुबे की जांच रिपोर्ट पर आधारित बताई गई थी। इस मामले में आरोप था कि डिफेंस कॉरिडोर भूमि अधिग्रहण के दौरान, जब अभिषेक प्रकाश लखनऊ के जिलाधिकारी थे, तब क्रय समिति के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। जांच में यह बात सामने आई कि कुछ मामलों में फर्जी पट्टों के आधार पर मुआवजा दिए जाने के आरोप लगे। साथ ही, राजस्व संहिता की धारा 76(3) के प्रावधानों का पालन किए बिना किसानों की भूमि श्रेणी में बदलाव किए जाने पर भी सवाल उठे।

भूमि हस्तांतरण और मुआवजा प्रक्रिया पर उठे थे गंभीर सवाल

जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि कुछ अनुसूचित जाति पट्टेदारों की जमीन गैर-अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को बेचने की अनुमति नियमों के विपरीत तरीके से दी गई। इतना ही नहीं, ग्राम समाज की भूमि पर भी मुआवजा भुगतान को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। उत्तर प्रदेश के इस चर्चित मामले में आरोप यह भी रहा कि बतौर तत्कालीन जिलाधिकारी और क्रय समिति के अध्यक्ष अभिषेक प्रकाश ने अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन अपेक्षित सतर्कता के साथ नहीं किया।

जांच से नहीं मिली राहत

उत्तर प्रदेश में अभिषेक प्रकाश की बहाली को प्रशासनिक राहत जरूर माना जा रहा है, लेकिन विभागीय जांच जारी रहने से उनके सामने कानूनी और सेवा संबंधी चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। साफ है कि उत्तर प्रदेश सरकार फिलहाल अदालत के आदेश और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि उत्तर प्रदेश के इस चर्चित IAS अधिकारी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी। फिलहाल इतना तय है कि बहाली के बावजूद यह मामला उत्तर प्रदेश की नौकरशाही और शासन तंत्र में चर्चा का विषय बना रहेगा। UP News

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योगी सरकार में बड़ा फेरबदल संभव, नए चेहरों को मिल सकता है मौका

उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल की हालिया मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है।

योगी सरकार में बदलाव के संकेत
योगी सरकार में बदलाव के संकेत
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar14 Mar 2026 04:20 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचल तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और राज्यपाल की हालिया मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज हो गया है। माना जा रहा है कि योगी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सरकार संगठन और सत्ता, दोनों स्तरों पर बड़ा संतुलन साधने की तैयारी में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भीतरखाने गंभीर मंथन चल रहा है। यह भी माना जा रहा है कि सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बनाते हुए कुछ नए चेहरों को सरकार में जगह दी जा सकती है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन में अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। उत्तर प्रदेश में अगले चुनाव से पहले सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधना भाजपा की प्राथमिकता मानी जा रही है।

उत्तर प्रदेश में नए अध्यक्ष के बाद बढ़ीं राजनीतिक अटकलें

उत्तर प्रदेश भाजपा को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने के बाद से ही मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं ने रफ्तार पकड़ ली थी। अब मुख्यमंत्री और राज्यपाल की मुलाकात के बाद इन अटकलों को और मजबूती मिली है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा आने वाले चुनावी मुकाबले को ध्यान में रखते हुए अपने सामाजिक समीकरणों को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को साधने की दिशा में नए कदम उठा सकती है। इसी वजह से संभावित विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को खास महत्व दिए जाने की चर्चा है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक संतुलन हमेशा निर्णायक भूमिका निभाता रहा है, इसलिए इस बार का विस्तार भी केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि चुनावी दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

पिछड़े और दलित प्रतिनिधित्व पर हो सकता है खास फोकस

सूत्रों की मानें तो उत्तर प्रदेश के संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल में पिछड़े वर्ग और दलित समुदाय से आने वाले नेताओं की भूमिका और प्रतिनिधित्व को मजबूत करने पर विचार किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार यह संदेश देना चाहती है कि सरकार में सामाजिक भागीदारी को और व्यापक बनाया जाएगा। यही कारण है कि युवा, सक्रिय और जमीन से जुड़े विधायकों के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश की सत्ता में नई ऊर्जा लाने के उद्देश्य से कुछ युवा चेहरों को मंत्री पद की जिम्मेदारी मिल सकती है। साथ ही, संगठन में लंबे समय तक भूमिका निभाने वाले नेताओं के समायोजन की भी संभावना जताई जा रही है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को लेकर भी राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।



उत्तर प्रदेश कैबिनेट में अभी भी खाली हैं पद

उत्तर प्रदेश की योगी कैबिनेट में इस समय कुल 54 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार राज्य में 60 मंत्रियों तक की नियुक्ति की जा सकती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार के पास अभी छह नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने की पूरी गुंजाइश बनी हुई है। यही वजह है कि विस्तार की संभावना को राजनीतिक हलकों में गंभीरता से देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में होने वाला संभावित मंत्रिमंडल विस्तार केवल संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए सरकार चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश भी देने की कोशिश करेगी। कुछ मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा के बाद उन्हें संगठन में भेजे जाने और नए नेताओं को सरकार में शामिल किए जाने का फॉर्मूला भी चर्चा में है।

चुनाव से पहले बड़ा संदेश देने की तैयारी में उत्तर प्रदेश सरकार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब बहुत अधिक समय नहीं बचा है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व चाहता है कि सरकार और संगठन दोनों पूरी मजबूती के साथ मैदान में उतरें। इस वजह से उत्तर प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को सिर्फ प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में यदि मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो उसका सीधा असर सत्ता संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और चुनावी संदेश तीनों पर दिखाई देगा। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह मुद्दा और ज्यादा गर्मा सकता है। UP News

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