उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के राठ क्षेत्र स्थित औड़ेरा गांव में झिंझिया महोत्सव के दौरान बुंदेली लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत की अनूठी झलक देखने को मिली। आधुनिकता के दौर में भी ग्रामीणों ने अपनी पुरानी परंपरा को उत्साह के साथ निभाया।

UP News : आधुनिकता की तेज रफ्तार के बीच बुंदेलखंड की लोक संस्कृति आज भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। इसकी शानदार झलक हमीरपुर जिले के राठ क्षेत्र स्थित औड़ेरा गांव में देखने को मिली, जहां झिंझिया महोत्सव के दौरान लोक परंपराओं, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया। नगाड़ों की गूंज, घोड़ों की टाप और लोकगीतों के बीच निकले जुलूस ने पूरे गांव में उत्सव का माहौल बना दिया। UP News
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झिंझिया महोत्सव में कलाकार अलग-अलग पारंपरिक और रोचक वेशभूषा में नजर आए। कोई भगवान भोलेनाथ, हनुमान, काल भैरव और ऋषि-मुनियों का स्वरूप धारण किए हुए था, तो किसी ने चुड़ैल, भूत-प्रेत और राक्षस जैसे पात्रों का रूप लिया। पुलिस-अपराधी, शराबी, बंदर, भालू, फकीर और संस्कारी बहू जैसे किरदारों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। पारंपरिक झांकियों, लोकनृत्य और कलाकारों की प्रस्तुतियों के साथ आधा दर्जन से अधिक घोड़ों की मौजूदगी ने जुलूस की रौनक बढ़ा दी। ग्रामीणों ने उत्साह के साथ आयोजन में भाग लिया और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जुड़ाव प्रदर्शित किया। UP News
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ग्रामीणों के अनुसार, झिंझिया महोत्सव महज मनोरंजन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह लोक आस्था, सामुदायिक एकता और पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक भी है। इस आयोजन से देवी मां की आराधना, सुख-समृद्धि की कामना और नकारात्मक शक्तियों से गांव की रक्षा से जुड़ी लोकमान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। यही वजह है कि गांव में इस परंपरा को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाया जा रहा है। UP News
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