सीटों का फीडबैक जुटाएगी भाजपा, सर्वे-2 से तय होगा टिकट का भविष्य
खास रणनीति यह है कि इस बार उत्तर प्रदेश में सर्वे पहले चरण से अलग नई एजेंसी के जरिए कराया जाएगा, ताकि दोनों रिपोर्टों की तुलना कर फील्ड की वास्तविक तस्वीर सामने आए और टिकट बंटवारे से पहले हर सीट का मूड साफ-साफ पढ़ा जा सके।

UP News : उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने है। उत्तर प्रदेश की राजनीती में 2027 विधानसभा का चुनाव काफी महत्वपूर्ण होने वाला है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 की बिसात बिछने लगी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी मैदान में उतरने से पहले अपनी तैयारियों को धार देने के लिए दूसरे चरण का सर्वे कराने का फैसला लिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह सर्वे फरवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह से शुरू हो सकता है, जिसमें मौजूदा विधायकों की ग्राउंड परफॉर्मेंस और नए दावेदारों की जमीनी ताकत का आकलन किया जाएगा। खास रणनीति यह है कि इस बार उत्तर प्रदेश में सर्वे पहले चरण से अलग नई एजेंसी के जरिए कराया जाएगा, ताकि दोनों रिपोर्टों की तुलना कर फील्ड की वास्तविक तस्वीर सामने आए और टिकट बंटवारे से पहले हर सीट का मूड साफ-साफ पढ़ा जा सके।
उत्तर प्रदेश की 403 सीटों पर फुल कवरेज प्लान
भाजपा का यह सर्वे मिशन सिर्फ अपनी मजबूत सीटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों की नब्ज टटोलने की तैयारी है। इसमें उन सीटों को भी शामिल किया जा रहा है जो सहयोगी दलों रालोद, सुभासपा, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी के हिस्से में आती हैं। पार्टी की सोच साफ है: 2027 की रणनीति तय करने के लिए उत्तर प्रदेश में हर सीट का सियासी तापमान, हर इलाके का जातीय-सामाजिक समीकरण और जनता की प्राथमिकताएं एक साथ पढ़नी होंगी। यही वजह है कि इस बार सर्वे दो अलग-अलग एजेंसियों से कराया जा रहा है, ताकि किसी एक रिपोर्ट के भरोसे पूरी तस्वीर न बने। दोनों कंपनियों की रिपोर्ट का क्रॉस-वेरिफिकेशन करके यह परखा जाएगा कि किस क्षेत्र में निष्कर्ष एक जैसे हैं और कहां फर्क पड़ रहा है ताकि यह भी सुनिश्चित हो सके कि किसी विधायक या दावेदार के पक्ष में कृत्रिम माहौल बनाकर रिपोर्ट को एकतरफा न किया जा सके।
कैसे होगा सर्वे ?
सर्वेयर टीमों का तरीका व्यापक रखा गया है। वे फील्ड में जाकर सार्वजनिक स्थानों पर आम लोगों से संवाद शुरू करेंगे और फिर धीरे-धीरे स्थानीय मुद्दों से होते हुए विधायक/पूर्व प्रत्याशी की छवि और कार्यशैली पर राय लेंगे। उत्तर प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में जिलाध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, 2022-2024 के विस्तारक कार्यकर्ता, साथ ही दुकानदार, छोटे सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, वकील, डॉक्टर, शिक्षक, युवा और महिलाओं से फीडबैक लिया जाएगा। इसके अलावा आरएसएस से जुड़े कार्यकर्ताओं और भाजपा के छोटे पदाधिकारियों से भी इनपुट जुटाने की तैयारी है।
सर्वे में किन सवालों पर होगा फोकस
सर्वे में पूछे जाने वाले सवालों का फोकस सीधे-सीधे वोटेबिलिटी और विश्वसनीयता पर रहेगा। जैसे -
- विधायक की जनता के बीच छवि कैसी है?
- क्या वे लोगों के बीच रहते हैं, उनकी सुनते हैं?
- पिछले चार साल में विकास कार्यों का क्या रिकॉर्ड रहा?
- पार्टी कार्यकर्ताओं और अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि में विधायक की पकड़ कितनी है?
- क्या किसी तरह का विवाद/भ्रष्टाचार आरोप चर्चा में रहा?
- अगर टिकट दोबारा मिले तो जीत की संभावना कितनी है?
- नहीं तो वैकल्पिक उम्मीदवार कौन हो सकता है?
निगेटिव रिपोर्ट आई तो टिकट रिस्क बढ़ेगा
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक जहां से नकारात्मक रिपोर्ट आएगी, वहां मौजूदा विधायक का टिकट कटने की आशंका काफी बढ़ जाएगी। प्रत्याशी चयन में दोनों एजेंसियों की रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाने की तैयारी है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि रिपोर्ट के जरिए यह तय किया जाएगा कि उत्तर प्रदेश में किन सीटों पर फेस चेंज जरूरी है और कहां मौजूदा विधायक को दोबारा मौका देकर निरंतरता का संदेश दिया जा सकता है। पार्टी रणनीतिकारों के मुताबिक 2022 चुनाव से पहले भी भाजपा ने सर्वे रिपोर्टों के आधार पर कई सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया था। अब 2027 के लिए भी उत्तर प्रदेश में पहले मूल्यांकन, फिर टिकट वाली रणनीति को आगे बढ़ाने की तैयारी दिख रही है। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने है। उत्तर प्रदेश की राजनीती में 2027 विधानसभा का चुनाव काफी महत्वपूर्ण होने वाला है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 की बिसात बिछने लगी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी मैदान में उतरने से पहले अपनी तैयारियों को धार देने के लिए दूसरे चरण का सर्वे कराने का फैसला लिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह सर्वे फरवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह से शुरू हो सकता है, जिसमें मौजूदा विधायकों की ग्राउंड परफॉर्मेंस और नए दावेदारों की जमीनी ताकत का आकलन किया जाएगा। खास रणनीति यह है कि इस बार उत्तर प्रदेश में सर्वे पहले चरण से अलग नई एजेंसी के जरिए कराया जाएगा, ताकि दोनों रिपोर्टों की तुलना कर फील्ड की वास्तविक तस्वीर सामने आए और टिकट बंटवारे से पहले हर सीट का मूड साफ-साफ पढ़ा जा सके।
उत्तर प्रदेश की 403 सीटों पर फुल कवरेज प्लान
भाजपा का यह सर्वे मिशन सिर्फ अपनी मजबूत सीटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों की नब्ज टटोलने की तैयारी है। इसमें उन सीटों को भी शामिल किया जा रहा है जो सहयोगी दलों रालोद, सुभासपा, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी के हिस्से में आती हैं। पार्टी की सोच साफ है: 2027 की रणनीति तय करने के लिए उत्तर प्रदेश में हर सीट का सियासी तापमान, हर इलाके का जातीय-सामाजिक समीकरण और जनता की प्राथमिकताएं एक साथ पढ़नी होंगी। यही वजह है कि इस बार सर्वे दो अलग-अलग एजेंसियों से कराया जा रहा है, ताकि किसी एक रिपोर्ट के भरोसे पूरी तस्वीर न बने। दोनों कंपनियों की रिपोर्ट का क्रॉस-वेरिफिकेशन करके यह परखा जाएगा कि किस क्षेत्र में निष्कर्ष एक जैसे हैं और कहां फर्क पड़ रहा है ताकि यह भी सुनिश्चित हो सके कि किसी विधायक या दावेदार के पक्ष में कृत्रिम माहौल बनाकर रिपोर्ट को एकतरफा न किया जा सके।
कैसे होगा सर्वे ?
सर्वेयर टीमों का तरीका व्यापक रखा गया है। वे फील्ड में जाकर सार्वजनिक स्थानों पर आम लोगों से संवाद शुरू करेंगे और फिर धीरे-धीरे स्थानीय मुद्दों से होते हुए विधायक/पूर्व प्रत्याशी की छवि और कार्यशैली पर राय लेंगे। उत्तर प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में जिलाध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, 2022-2024 के विस्तारक कार्यकर्ता, साथ ही दुकानदार, छोटे सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, वकील, डॉक्टर, शिक्षक, युवा और महिलाओं से फीडबैक लिया जाएगा। इसके अलावा आरएसएस से जुड़े कार्यकर्ताओं और भाजपा के छोटे पदाधिकारियों से भी इनपुट जुटाने की तैयारी है।
सर्वे में किन सवालों पर होगा फोकस
सर्वे में पूछे जाने वाले सवालों का फोकस सीधे-सीधे वोटेबिलिटी और विश्वसनीयता पर रहेगा। जैसे -
- विधायक की जनता के बीच छवि कैसी है?
- क्या वे लोगों के बीच रहते हैं, उनकी सुनते हैं?
- पिछले चार साल में विकास कार्यों का क्या रिकॉर्ड रहा?
- पार्टी कार्यकर्ताओं और अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि में विधायक की पकड़ कितनी है?
- क्या किसी तरह का विवाद/भ्रष्टाचार आरोप चर्चा में रहा?
- अगर टिकट दोबारा मिले तो जीत की संभावना कितनी है?
- नहीं तो वैकल्पिक उम्मीदवार कौन हो सकता है?
निगेटिव रिपोर्ट आई तो टिकट रिस्क बढ़ेगा
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक जहां से नकारात्मक रिपोर्ट आएगी, वहां मौजूदा विधायक का टिकट कटने की आशंका काफी बढ़ जाएगी। प्रत्याशी चयन में दोनों एजेंसियों की रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाने की तैयारी है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि रिपोर्ट के जरिए यह तय किया जाएगा कि उत्तर प्रदेश में किन सीटों पर फेस चेंज जरूरी है और कहां मौजूदा विधायक को दोबारा मौका देकर निरंतरता का संदेश दिया जा सकता है। पार्टी रणनीतिकारों के मुताबिक 2022 चुनाव से पहले भी भाजपा ने सर्वे रिपोर्टों के आधार पर कई सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया था। अब 2027 के लिए भी उत्तर प्रदेश में पहले मूल्यांकन, फिर टिकट वाली रणनीति को आगे बढ़ाने की तैयारी दिख रही है। UP News












