सीटों का फीडबैक जुटाएगी भाजपा, सर्वे-2 से तय होगा टिकट का भविष्य

खास रणनीति यह है कि इस बार उत्तर प्रदेश में सर्वे पहले चरण से अलग नई एजेंसी के जरिए कराया जाएगा, ताकि दोनों रिपोर्टों की तुलना कर फील्ड की वास्तविक तस्वीर सामने आए और टिकट बंटवारे से पहले हर सीट का मूड साफ-साफ पढ़ा जा सके।

विधायकों पर भाजपा का दूसरा सर्वे
विधायकों पर भाजपा का दूसरा सर्वे
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar30 Jan 2026 12:19 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने है। उत्तर प्रदेश की राजनीती में 2027 विधानसभा का चुनाव काफी महत्वपूर्ण होने वाला है।  

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 की बिसात बिछने लगी है। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी मैदान में उतरने से पहले अपनी तैयारियों को धार देने के लिए दूसरे चरण का सर्वे कराने का फैसला लिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह सर्वे फरवरी के दूसरे या तीसरे सप्ताह से शुरू हो सकता है, जिसमें मौजूदा विधायकों की ग्राउंड परफॉर्मेंस और नए दावेदारों की जमीनी ताकत का आकलन किया जाएगा। खास रणनीति यह है कि इस बार उत्तर प्रदेश में सर्वे पहले चरण से अलग नई एजेंसी के जरिए कराया जाएगा, ताकि दोनों रिपोर्टों की तुलना कर फील्ड की वास्तविक तस्वीर सामने आए और टिकट बंटवारे से पहले हर सीट का मूड साफ-साफ पढ़ा जा सके।

उत्तर प्रदेश की 403 सीटों पर फुल कवरेज प्लान

भाजपा का यह सर्वे मिशन सिर्फ अपनी मजबूत सीटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों की नब्ज टटोलने की तैयारी है। इसमें उन सीटों को भी शामिल किया जा रहा है जो सहयोगी दलों रालोद, सुभासपा, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी के हिस्से में आती हैं। पार्टी की सोच साफ है: 2027 की रणनीति तय करने के लिए उत्तर प्रदेश में हर सीट का सियासी तापमान, हर इलाके का जातीय-सामाजिक समीकरण और जनता की प्राथमिकताएं एक साथ पढ़नी होंगी। यही वजह है कि इस बार सर्वे दो अलग-अलग एजेंसियों से कराया जा रहा है, ताकि किसी एक रिपोर्ट के भरोसे पूरी तस्वीर न बने। दोनों कंपनियों की रिपोर्ट का क्रॉस-वेरिफिकेशन करके यह परखा जाएगा कि किस क्षेत्र में निष्कर्ष एक जैसे हैं और कहां फर्क पड़ रहा है ताकि यह भी सुनिश्चित हो सके कि किसी विधायक या दावेदार के पक्ष में कृत्रिम माहौल बनाकर रिपोर्ट को एकतरफा न किया जा सके।

कैसे होगा सर्वे ?

सर्वेयर टीमों का तरीका व्यापक रखा गया है। वे फील्ड में जाकर सार्वजनिक स्थानों पर आम लोगों से संवाद शुरू करेंगे और फिर धीरे-धीरे स्थानीय मुद्दों से होते हुए विधायक/पूर्व प्रत्याशी की छवि और कार्यशैली पर राय लेंगे। उत्तर प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में जिलाध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, 2022-2024 के विस्तारक कार्यकर्ता, साथ ही दुकानदार, छोटे सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, वकील, डॉक्टर, शिक्षक, युवा और महिलाओं से फीडबैक लिया जाएगा। इसके अलावा आरएसएस से जुड़े कार्यकर्ताओं और भाजपा के छोटे पदाधिकारियों से भी इनपुट जुटाने की तैयारी है।

सर्वे में किन सवालों पर होगा फोकस

सर्वे में पूछे जाने वाले सवालों का फोकस सीधे-सीधे वोटेबिलिटी और विश्वसनीयता पर रहेगा। जैसे -

  1. विधायक की जनता के बीच छवि कैसी है?
  2. क्या वे लोगों के बीच रहते हैं, उनकी सुनते हैं?
  3. पिछले चार साल में विकास कार्यों का क्या रिकॉर्ड रहा?
  4. पार्टी कार्यकर्ताओं और अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि में विधायक की पकड़ कितनी है?
  5. क्या किसी तरह का विवाद/भ्रष्टाचार आरोप चर्चा में रहा?
  6. अगर टिकट दोबारा मिले तो जीत की संभावना कितनी है?
  7. नहीं तो वैकल्पिक उम्मीदवार कौन हो सकता है?

निगेटिव रिपोर्ट आई तो टिकट रिस्क बढ़ेगा

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक जहां से नकारात्मक रिपोर्ट आएगी, वहां मौजूदा विधायक का टिकट कटने की आशंका काफी बढ़ जाएगी। प्रत्याशी चयन में दोनों एजेंसियों की रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाने की तैयारी है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि रिपोर्ट के जरिए यह तय किया जाएगा कि उत्तर प्रदेश में किन सीटों पर फेस चेंज जरूरी है और कहां मौजूदा विधायक को दोबारा मौका देकर निरंतरता का संदेश दिया जा सकता है। पार्टी रणनीतिकारों के मुताबिक 2022 चुनाव से पहले भी भाजपा ने सर्वे रिपोर्टों के आधार पर कई सीटों पर नए चेहरों को मौका दिया था। अब 2027 के लिए भी उत्तर प्रदेश में पहले मूल्यांकन, फिर टिकट वाली रणनीति को आगे बढ़ाने की तैयारी दिख रही है। UP News

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प्रयागराज विवाद पर पिघला प्रशासन, शंकराचार्य से माफी को तैयार

माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज प्रशासन के बीच खड़ा हुआ धार्मिक-प्रशासनिक विवाद अब शांत होने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रशासन शंकराचार्य से माफी मांगने को तैयार है। यह जानकारी शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने दी।

Shankaracharya Avimukteshwaranand
माघ मेले का विवाद थमने के संकेत (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar30 Jan 2026 11:29 AM
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UP News : प्रशासन को भरोसा था कि शंकराचार्य माघ पूर्णिमा (1 फरवरी) तक मेले में रहेंगे, लेकिन 28 जनवरी को उनका अचानक माघ मेला छोड़कर वाराणसी लौट जाना अधिकारियों के लिए अप्रत्याशित रहा। इसके बाद लखनऊ के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने वाराणसी पहुंचकर उनसे संपर्क किया और आग्रह किया कि माघ पूर्णिमा पर उन्हें ससम्मान प्रयागराज लाकर संगम स्नान कराया जाएगा।

दो शर्तों पर अड़े शंकराचार्य

शंकराचार्य ने प्रयाग लौटने के लिए दो स्पष्ट शर्तें रखी हैं—

  1. विवाद के लिए जिम्मेदार अधिकारी लिखित रूप से माफी मांगें।
  2. चारों शंकराचार्यों के लिए माघ मेला, कुंभ और महाकुंभ में स्थायी प्रोटोकॉल तय कर सार्वजनिक रूप से घोषित किया जाए।

आज होगी अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस

बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आज सुबह 11 बजे वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। इसमें यह स्पष्ट हो सकता है कि वे काशी में ही स्नान कर विरोध जारी रखेंगे या प्रशासन की पेशकश स्वीकार कर प्रयागराज लौटेंगे। शंकराचार्य का कहना है कि फिलहाल उनकी स्नान योजना काशी में ही है और शर्तें पूरी होने पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

विवाद की जड़

बता दें कि शंकराचार्य पक्ष के अनुसार 27 जनवरी को प्रशासन से बातचीत के दौरान माफी की मांग की गई थी, लेकिन पहले इससे इनकार किया गया और बाद में लिखित खेद भी व्यक्त नहीं किया गया। इससे आहत होकर उन्होंने माघ मेला क्षेत्र छोड़ने का फैसला किया।

प्रवेश के दौरान हुआ था टकराव

बता दें कि विवाद की शुरुआत मौनी अमावस्या के दिन हुई, जब शंकराचार्य अपने रथ/पालकी के साथ संगम नोज की ओर बढ़ रहे थे। भीड़ और सुरक्षा कारणों से प्रशासन ने रथ से उतरकर पैदल जाने का अनुरोध किया, लेकिन समर्थक रथ आगे ले जाने पर अड़े रहे। इस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की हुई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रशासन ने जुलूस रोक दिया, जबकि शंकराचार्य ने पवित्र स्नान से रोके जाने और पुलिस द्वारा बदसलूकी के आरोप लगाए।

अब बदल रहा प्रशासन का रुख

शंकराचार्य के वाराणसी लौटने के बाद प्रशासन का रुख नरम पड़ा है और विवाद समाप्त करने के लिए माफी मांगने की तैयारी की जा रही है, ताकि माघ पूर्णिमा पर उनकी पारंपरिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके। अब सबकी निगाहें आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जहां से तय होगा कि यह विवाद समाप्ति की ओर जाएगा या नया मोड़ लेगा। UP News


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उत्तर प्रदेश के अनेक PCS अधिकारियों के तबादले

शासन के संकेत साफ हैं कि उत्तर प्रदेश में फील्ड स्तर पर कामकाज की रफ्तार बढ़ाने, विभागीय समन्वय मजबूत करने और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह बदलाव किया गया है। देर रात जारी आदेश के बाद संबंधित जिलों में कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।

उत्तर प्रदेश में अफसरों की जिम्मेदारियां बदलीं
उत्तर प्रदेश में अफसरों की जिम्मेदारियां बदलीं
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar30 Jan 2026 10:46 AM
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UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार देर रात प्रशासनिक महकमे में बड़ा कदम उठाते हुए छह पीसीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए। इस फेरबदल के साथ ही उत्तर प्रदेश के कानपुर, गोरखपुर, मथुरा, हमीरपुर, गोंडा और फिरोजाबाद जैसे अहम जिलों में नई जिम्मेदारियों का बंटवारा किया गया है। शासन के संकेत साफ हैं कि उत्तर प्रदेश में फील्ड स्तर पर कामकाज की रफ्तार बढ़ाने, विभागीय समन्वय मजबूत करने और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह बदलाव किया गया है। देर रात जारी आदेश के बाद संबंधित जिलों में कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया भी तेज हो गई है।

मथुरा–हमीरपुर में बदलीं जिम्मेदारियां

उत्तर प्रदेश के मथुरा में प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब तक नगर मजिस्ट्रेट और मंदिर परिसर के प्रभारी मजिस्ट्रेट रहे राकेश कुमार को शासन ने एडीएम (वित्त एवं राजस्व), हमीरपुर के पद पर भेजा है। वहीं गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण में विशेष कार्य अधिकारी के रूप में कार्यरत अनूप कुमार मिश्रा को नगर मजिस्ट्रेट, मथुरा के साथ-साथ मंदिर परिसर का प्रभारी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया है। शासन के इस फैसले को उत्तर प्रदेश में मथुरा जैसे संवेदनशील और भीड़-भाड़ वाले जिले में व्यवस्था व समन्वय को अधिक मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

कई जिलों में बदले अहम पदाधिकारी

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक हब कानपुर नगर में भी शासन ने जिम्मेदारियों की नई बुनियाद रखते हुए अहम प्रशासनिक बदलाव किए हैं। अब तक एडीएम न्यायिक के पद पर तैनात राजेश कुमार को एडीएम नागरिक आपूर्ति, कानपुर नगर बनाया गया है, जबकि महेश प्रकाश को एडीएम न्यायिक, कानपुर नगर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन के संकेत स्पष्ट हैं कि उत्तर प्रदेश में नागरिक आपूर्ति व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त करने और विभागीय समन्वय को मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसी तबादला सूची में गोंडा को नया मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) भी मिला है, यहां रिंकी जायसवाल की तैनाती की गई है। वहीं कानपुर विकास प्राधिकरण में एसडीएम रहे अजय कुमार को अपर नगर आयुक्त, नगर निगम फिरोजाबाद बनाया गया है। UP News

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