चर्चित IAS अभिषेक प्रकाश की बहाली पर लगी मुहर, राज्यपाल ने दी मंजूरी
उत्तर प्रदेश की नौकरशाही से इस वक्त बड़ी अपडेट सामने आई है। उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में लंबे समय से सुर्खियों में चल रहे 2006 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बड़ी प्रशासनिक राहत मिल गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश की नौकरशाही से इस वक्त बड़ी अपडेट सामने आई है। उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में लंबे समय से सुर्खियों में चल रहे 2006 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बड़ी प्रशासनिक राहत मिल गई है। रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित किए गए अभिषेक प्रकाश की बहाली का आदेश जारी कर दिया गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद उन्हें 15 मार्च से दोबारा सेवा में बहाल माना जाएगा। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि यह बहाली किसी तरह की क्लीन चिट नहीं है। उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच पहले की तरह जारी रहेगी और जांच के दौरान दस्तावेजों, साक्ष्यों व प्रशासनिक तथ्यों की पड़ताल भी होती रहेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को रद्द कर दिया था। अदालत के इसी फैसले के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने उनकी बहाली की प्रक्रिया तेज कर दी थी।
रिश्वत के आरोप में मार्च 2025 में हुए थे सस्पेंड
उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा तंत्र में उस समय हलचल मच गई थी, जब 20 मार्च 2025 को IAS अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया गया था। उन पर आरोप था कि एक सोलर कंपनी से परियोजना को मंजूरी देने के बदले कथित रूप से रिश्वत मांगी गई। कंपनी की शिकायत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके खिलाफ सख्त कदम उठाया था। मामला अदालत पहुंचा तो सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि आरोपों को पुष्ट करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसी आधार पर अभिषेक प्रकाश के खिलाफ दाखिल चार्जशीट को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश शासन में उनकी बहाली को लेकर रास्ता साफ हो गया।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद तेज हुई बहाली की प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में निलंबन की अवधि एक वर्ष पूरी होने से पहले इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को भेजी जानी थी। प्रशासनिक प्रक्रिया के इसी क्रम में 14 मार्च के बाद उनकी बहाली को प्रभावी मानते हुए राज्यपाल स्तर से आदेश जारी किया गया। यह भी माना जा रहा है कि हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने कानूनी और विभागीय पहलुओं की समीक्षा की, जिसके बाद बहाली का फैसला लिया गया। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर जांच पूरी होने तक मामला पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।
भटगांव जमीन अधिग्रहण प्रकरण में भी रहे सवालों के घेरे में
उत्तर प्रदेश में अभिषेक प्रकाश का नाम भटगांव जमीन अधिग्रहण मामले में भी सामने आया था। इस प्रकरण में राजस्व विभाग ने मई 2025 में उनके खिलाफ चार्जशीट की संस्तुति करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट नियुक्ति विभाग को भेजी थी। यह रिपोर्ट राजस्व परिषद के तत्कालीन चेयरमैन रजनीश दुबे की जांच रिपोर्ट पर आधारित बताई गई थी। इस मामले में आरोप था कि डिफेंस कॉरिडोर भूमि अधिग्रहण के दौरान, जब अभिषेक प्रकाश लखनऊ के जिलाधिकारी थे, तब क्रय समिति के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। जांच में यह बात सामने आई कि कुछ मामलों में फर्जी पट्टों के आधार पर मुआवजा दिए जाने के आरोप लगे। साथ ही, राजस्व संहिता की धारा 76(3) के प्रावधानों का पालन किए बिना किसानों की भूमि श्रेणी में बदलाव किए जाने पर भी सवाल उठे।
भूमि हस्तांतरण और मुआवजा प्रक्रिया पर उठे थे गंभीर सवाल
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि कुछ अनुसूचित जाति पट्टेदारों की जमीन गैर-अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को बेचने की अनुमति नियमों के विपरीत तरीके से दी गई। इतना ही नहीं, ग्राम समाज की भूमि पर भी मुआवजा भुगतान को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। उत्तर प्रदेश के इस चर्चित मामले में आरोप यह भी रहा कि बतौर तत्कालीन जिलाधिकारी और क्रय समिति के अध्यक्ष अभिषेक प्रकाश ने अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन अपेक्षित सतर्कता के साथ नहीं किया।
जांच से नहीं मिली राहत
उत्तर प्रदेश में अभिषेक प्रकाश की बहाली को प्रशासनिक राहत जरूर माना जा रहा है, लेकिन विभागीय जांच जारी रहने से उनके सामने कानूनी और सेवा संबंधी चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। साफ है कि उत्तर प्रदेश सरकार फिलहाल अदालत के आदेश और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि उत्तर प्रदेश के इस चर्चित IAS अधिकारी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी। फिलहाल इतना तय है कि बहाली के बावजूद यह मामला उत्तर प्रदेश की नौकरशाही और शासन तंत्र में चर्चा का विषय बना रहेगा। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश की नौकरशाही से इस वक्त बड़ी अपडेट सामने आई है। उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में लंबे समय से सुर्खियों में चल रहे 2006 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक प्रकाश को बड़ी प्रशासनिक राहत मिल गई है। रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित किए गए अभिषेक प्रकाश की बहाली का आदेश जारी कर दिया गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद उन्हें 15 मार्च से दोबारा सेवा में बहाल माना जाएगा। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि यह बहाली किसी तरह की क्लीन चिट नहीं है। उनके खिलाफ चल रही विभागीय जांच पहले की तरह जारी रहेगी और जांच के दौरान दस्तावेजों, साक्ष्यों व प्रशासनिक तथ्यों की पड़ताल भी होती रहेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में उनके खिलाफ दाखिल चार्जशीट को रद्द कर दिया था। अदालत के इसी फैसले के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने उनकी बहाली की प्रक्रिया तेज कर दी थी।
रिश्वत के आरोप में मार्च 2025 में हुए थे सस्पेंड
उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा तंत्र में उस समय हलचल मच गई थी, जब 20 मार्च 2025 को IAS अभिषेक प्रकाश को निलंबित कर दिया गया था। उन पर आरोप था कि एक सोलर कंपनी से परियोजना को मंजूरी देने के बदले कथित रूप से रिश्वत मांगी गई। कंपनी की शिकायत के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके खिलाफ सख्त कदम उठाया था। मामला अदालत पहुंचा तो सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि आरोपों को पुष्ट करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसी आधार पर अभिषेक प्रकाश के खिलाफ दाखिल चार्जशीट को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश शासन में उनकी बहाली को लेकर रास्ता साफ हो गया।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद तेज हुई बहाली की प्रक्रिया
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में निलंबन की अवधि एक वर्ष पूरी होने से पहले इस मामले से जुड़ी रिपोर्ट केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय को भेजी जानी थी। प्रशासनिक प्रक्रिया के इसी क्रम में 14 मार्च के बाद उनकी बहाली को प्रभावी मानते हुए राज्यपाल स्तर से आदेश जारी किया गया। यह भी माना जा रहा है कि हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने कानूनी और विभागीय पहलुओं की समीक्षा की, जिसके बाद बहाली का फैसला लिया गया। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि विभागीय स्तर पर जांच पूरी होने तक मामला पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।
भटगांव जमीन अधिग्रहण प्रकरण में भी रहे सवालों के घेरे में
उत्तर प्रदेश में अभिषेक प्रकाश का नाम भटगांव जमीन अधिग्रहण मामले में भी सामने आया था। इस प्रकरण में राजस्व विभाग ने मई 2025 में उनके खिलाफ चार्जशीट की संस्तुति करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट नियुक्ति विभाग को भेजी थी। यह रिपोर्ट राजस्व परिषद के तत्कालीन चेयरमैन रजनीश दुबे की जांच रिपोर्ट पर आधारित बताई गई थी। इस मामले में आरोप था कि डिफेंस कॉरिडोर भूमि अधिग्रहण के दौरान, जब अभिषेक प्रकाश लखनऊ के जिलाधिकारी थे, तब क्रय समिति के अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी। जांच में यह बात सामने आई कि कुछ मामलों में फर्जी पट्टों के आधार पर मुआवजा दिए जाने के आरोप लगे। साथ ही, राजस्व संहिता की धारा 76(3) के प्रावधानों का पालन किए बिना किसानों की भूमि श्रेणी में बदलाव किए जाने पर भी सवाल उठे।
भूमि हस्तांतरण और मुआवजा प्रक्रिया पर उठे थे गंभीर सवाल
जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि कुछ अनुसूचित जाति पट्टेदारों की जमीन गैर-अनुसूचित जाति के व्यक्तियों को बेचने की अनुमति नियमों के विपरीत तरीके से दी गई। इतना ही नहीं, ग्राम समाज की भूमि पर भी मुआवजा भुगतान को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई थीं। उत्तर प्रदेश के इस चर्चित मामले में आरोप यह भी रहा कि बतौर तत्कालीन जिलाधिकारी और क्रय समिति के अध्यक्ष अभिषेक प्रकाश ने अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन अपेक्षित सतर्कता के साथ नहीं किया।
जांच से नहीं मिली राहत
उत्तर प्रदेश में अभिषेक प्रकाश की बहाली को प्रशासनिक राहत जरूर माना जा रहा है, लेकिन विभागीय जांच जारी रहने से उनके सामने कानूनी और सेवा संबंधी चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। साफ है कि उत्तर प्रदेश सरकार फिलहाल अदालत के आदेश और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ रही है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि उत्तर प्रदेश के इस चर्चित IAS अधिकारी के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी। फिलहाल इतना तय है कि बहाली के बावजूद यह मामला उत्तर प्रदेश की नौकरशाही और शासन तंत्र में चर्चा का विषय बना रहेगा। UP News












