Kanpur News : कानपुर विवि में बनेगा यूपी का पहला बायोडायवर्सिटी पार्क, साइबेरियन पक्षी बनाएंगे घर
Kanpur News: UP's first Biodiversity Park to be built in Kanpur University
भारत
चेतना मंच
28 Mar 2023 07:38 PM
Kanpur News : कानपुर। शिक्षा के साथ साथ अपनी हरियाली और सुंदरता के लिए मशहूर कानपुर के सीएसजेएम यूनिवर्सिटी में ऐसा बॉयो डायवर्सिटी पार्क बनने जा रहा है, जिसमें विवि कैम्पस की हर विलुप्त व दुर्लभ प्रजाति (पौधों, पशु व पक्षी) को संरक्षित किया जा सकेगा। इससे छात्र यूनिवर्सिटी में पर्यावरण विज्ञान को एक नए तरीके से पढ़ सकेंगे। इस पार्क में स्टूडेंट की पढ़ाई के साथ-साथ जीव संरक्षण, जल संरक्षण और जमीन संरक्षण का काम भी होगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 3 महीने के अंदर इस बायोडायवर्सिटी पार्क को तैयार करने का लक्ष्य बनाया है।
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साइबेरियन पक्षियों के प्रजनन पर होगा काम
सीएसजेएमयू सूबे का पहला ऐसा विवि होगा, जहां यह अनूठी कवायद होगी। साथ ही, इस कवायद की जानकारी विवि के 37वें दीक्षांत समारोह में जब राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को मिली थी, तो उन्होंने भी इस कदम को सराहनीय बताया था। इस पार्क की सबसे बड़ी खासियत होगी कि यहां साइबेरियन पक्षियों के प्रजनन को लेकर भी काम होगा।
छात्र सीधे पर्यावरण से जुड़ेंगे
विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति सुधीर कुमार अवस्थी ने इस बॉयो डायवर्सिटी पार्क को लेकर बताया कि इस फैसले से अब छात्रों को पर्यावरण से सीधा जोड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा मकसद है जो जैव प्रजातियां प्रदेश में विलुप्त हो रही हैं, उनको हम संरक्षित करें। ऐसा पहली बार होगा जब हम तमाम प्रजातियों का संरक्षण कर लेंगे तो उनका नामकरण भी कराएंगे। केंद्र और राज्य की ऐसी संस्थाएं जो पर्यावरण की दिशा में काम कर रही हैं, उनके विशेषज्ञों को इस पार्क में बुलाएंगे और भविष्य में साथ मिलकर कई अन्य नवाचार करेंगे।
क्या है बॉयो डायवर्सिटी पार्क
बॉयो डायवर्सिटी का अर्थ है जिस तरीके से जीव जंतुओं की जो प्रजातियां विलुप्त हो रही है उनको संरक्षित करना। साथ ही अलग-अलग तरह के पेड़-पौधों वह पशु-पक्षियों को धरती पर एक जगह और एक साथ उनके अस्तित्व को बनाए रखना। कानपुर विश्वविद्यालय में लगभग 10 एकड़ के एक जंगल में इस बॉयो डायवर्सिटी पार्क को विकसित किया जाएगा। इसमें किसी भी तरह का ह्यूमन इंटरफेयर न हो सके इसके लिए भी खास व्यवस्था की जाएगी। इसमें साइबेरिया के पक्षी भी संरक्षण ले सकेंगे। इसके साथ ही विदेशी प्रजातियों के पेड़-पौधों को संरक्षित करने के लिए इसके अंदर सरोवर का भी निर्माण कराया जाएगा।