उत्तर प्रदेश के वाराणसी यानी काशी में स्थित भगवान धन्वंतरि का अनोखा मंदिर इन दिनों अपनी खास परंपरा को लेकर चर्चा में है। इस मंदिर के कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए साल में केवल एक बार धनतेरस के अवसर पर खोले जाते हैं।

UP News : उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी काशी अपनी प्राचीन परंपराओं और अनूठे मंदिरों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां एक ऐसा मंदिर भी है, जिसके कपाट साल में केवल एक दिन और महज पांच घंटे के लिए आम श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। यह मंदिर भगवान धन्वंतरि को समर्पित है। धनतेरस के विशेष अवसर पर मंदिर के कपाट विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद खोले जाते हैं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान धन्वंतरि के दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं। वाराणसी के सुड़िया इलाके में स्थित इस मंदिर को देश का इकलौता धन्वंतरि मंदिर बताया जाता है। मंदिर की खासियत यह है कि साल के 364 दिन इसके कपाट बंद रहते हैं। धनतेरस के दिन शाम पांच बजे मंदिर खुलता है और रात 10 बजे तक श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं। इसके बाद मंदिर के कपाट फिर अगले धनतेरस तक बंद कर दिए जाते हैं।
यह भी पढ़ें : अयोध्या में दीपोत्सव को लेकर सुरक्षा का कड़ा पहरा, 6000 पुलिसकर्मी संभालेंगे मोर्चा
इस मंदिर से जुड़ी परंपरा करीब 300 साल पुरानी बताई जाती है। मंदिर की देखरेख काशी का एक वैद्य परिवार करता है। परिवार के मुताबिक, कई पीढ़ियों से धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की जयंती मनाने और मंदिर के कपाट खोलने की परंपरा चली आ रही है। वर्तमान में परिवार की आठवीं पीढ़ी इस धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ा रही है। धनतेरस के दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस अवसर पर भगवान धन्वंतरि के दर्शन के लिए काशी के अलावा आसपास के क्षेत्रों और दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।
इसे भी पढ़ें : बांदा में विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, दो मासूम बच्चों की दुनिया उजड़ी
धन्वंतरि मंदिर में पूजा-पाठ के साथ जड़ी-बूटियों को विशेष महत्व दिया जाता है। यहां हिमालय से लाई गई दुर्लभ जड़ी-बूटियां भी रखी जाती हैं। पूजा के दौरान फूल-पौधे और औषधीय वनस्पतियां भगवान धन्वंतरि को अर्पित की जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से आरोग्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को आरोग्य का प्रसाद भी वितरित किया जाता है। मान्यता और आस्था के चलते हर साल धनतेरस पर यहां भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु धन्वंतरि के रूप में प्रकट हुए थे। उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। इसी कारण भगवान धन्वंतरि को अमृत, आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान धन्वंतरि को स्वास्थ्य और निरोगी जीवन का प्रतीक माना गया है। इसी वजह से धनतेरस के दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है। आयुर्वेद से जुड़े लोगों के लिए भी यह दिन विशेष महत्व रखता है।
काशी के इस अनोखे मंदिर में साल में केवल पांच घंटे दर्शन का अवसर मिलने के कारण धनतेरस पर श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रहती है। भक्त भगवान धन्वंतरि से अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। करीब तीन शताब्दियों से चली आ रही यह परंपरा काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भगवान धन्वंतरि के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर की अनूठी परंपरा इसे देश के विशिष्ट धार्मिक स्थलों में शामिल करती है।
विज्ञापन