लखनऊ में CBI ने ED के प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार और हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी को पांच लाख रुपये की कथित रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया। जानिए पूरा मामला।

UP Nwes : प्रवर्तन निदेशालय (ED) में तैनात जिस अधिकारी की जिम्मेदारी आर्थिक अपराधों और वित्तीय घोटालों की जांच करना है, उसी पर रिश्वतखोरी का गंभीर आरोप लगा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने लखनऊ जोनल कार्यालय में तैनात प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार और हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी को पांच लाख रुपये की कथित रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई ने जांच एजेंसियों के भीतर भ्रष्टाचार को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सामने आया यह मामला इसलिए चर्चा में है, क्योंकि कार्रवाई उस केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी के खिलाफ हुई है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों की जांच के लिए जानी जाती है। आरोप है कि ED के एक मामले में राहत दिलाने के नाम पर पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत मिलने के बाद CBI ने जाल बिछाया और कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
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CBI के मुताबिक, शिकायतकर्ता के पिता को अगस्त और सितंबर 2026 में ED के लखनऊ जोनल कार्यालय की ओर से दो समन जारी किए गए थे। इसके बाद कथित तौर पर ED में चल रहे मामले में मदद करने और राहत दिलाने के नाम पर रिश्वत की मांग की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि ED में तैनात हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी ने शिकायतकर्ता के पिता से संपर्क किया था। आरोप है कि वह प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार की ओर से पांच लाख रुपये की रिश्वत मांग रहा था। UP Nwes :
रिश्वत मांगे जाने की शिकायत मिलने के बाद CBI ने मामला दर्ज कर आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। CBI के अनुसार, हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी को प्रवर्तन अधिकारी की ओर से पांच लाख रुपये की कथित रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। इसके बाद प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत कार्रवाई की गई है। मामले में अन्य अधिकारियों की संभावित भूमिका की भी जांच की जा रही है। UP Nwes :
ED देश में मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा कानूनों से जुड़े मामलों की जांच करने वाली प्रमुख केंद्रीय एजेंसियों में शामिल है। ऐसे में उसके एक अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप लगना गंभीर मामला है। हालांकि, किसी अधिकारी की गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। मामले में आरोपों की सच्चाई का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
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CBI इस मामले में यह पता लगाने में जुटी है कि कथित रिश्वत मांगने और लेने की घटना में केवल गिरफ्तार दोनों आरोपियों की भूमिका थी या कोई अन्य अधिकारी भी इसमें शामिल था। शिकायतकर्ता के पिता को ED के मामले में राहत दिलाने के नाम पर रिश्वत मांगे जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। लखनऊ की इस कार्रवाई ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—जब आर्थिक घोटालों की जांच करने वाले विभाग के अधिकारी पर ही रिश्वतखोरी का आरोप लगे, तो सरकारी जांच व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना कितना जरूरी हो जाता है। UP Nwes :
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