लखनऊ। पिछले काफी समय से देशभर में महंगाई अपने चरम पर है। लोग हर चीज में बढ़ी हुई महंगाई से आजिज आ चुके हैं। लगातार बढ़ रही महंगाई को लेकर जनता त्रस्त है। पेट्रोल- डीजल से लेकर घरेलू सामग्रियों के दाम आसमान छू रहे हैं। इस समय हर चीज में बढ़ी हुई महंगाई एक फिल्म के उस गाने पर सटीक बैठती है, जिसके बोल थे-- महंगाई डाइन खाए जात बा... इस बढ़ी महंगाई में लोगों को बरबस बार बार इस गाने की याद हो आती है। वहीं अगर लखनऊ में सब्जी मंडी की बात करें तो यहां कुछ सब्जियों की कीमत पहले के मुकाबले कुछ कम हुई हैं। लेकिन कई सब्जियों के दाम पहले की तुलना में दो से तीन गुना बढ़े हुए हैं। इन सब्जियों को खरीद पाना आम आदमी के बजट से बाहर है। लहसुन, अदरक, धनिया और हरी मिर्च की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। हालांकि, सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि लहसुन की पैदावार इस साल कम हुई है इसलिए इसके दाम ज्यादा हैं।
लहसुन की पैदावार हुई कम
जेहटा गांव निवासी जगजीवन ने बताया कि इस बार लहसुन की पैदावार कम होने के कारण मंडियों में इसकी सप्लाई कम हो पा रही है। सप्लाई कम होने की वजह से लहसुन की कीमत में जबरदस्त उछाल आया है। जिसकी वजह से लोगों ने लहुसन खरीदना ही बंद कर दिया है। जगजीवन ने बताया कि इन दिनों थोक में लहसुन की कीमत 160 रुपये प्रति किलो है। फुटकर सब्जी मंडी में इसकी कीमत 200 से 220 है। कीमत ज्यादा होने के कारण इसकी डिमांड भी कम हुई है।
200 रुपये किलो मंडी में बिक रही धनिया
दुबग्गा मंडी में सब्जी खरीदने आए राम गोपाल ने कहा कि लहसुन और अदरक का इस्तेमाल खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ- साथ कई बीमारियों को दूर करने में लिए किया जाता है। लहसुन महंगा होने की वजह से इसको खरीद पाना आम इन्सान के बजट से बाहर है। जब थोक में लहसुन- 160 रुपये किलो, अदरक- 120 रुपये किलो, नीबू- 80 रुपये किलो, धनिया- 200 रुपये किलो, हरी मिर्च- 80 रुपये किलो में बिक रहा है तो ऐसे में घर तक इन सब्जियों के पहुंचने पर दामों में 25 से 30 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हो जाती हैं। इसलिए इसे खरीदने से पहले कई बार सोचना पड़ता है।
महंगाई डाइन खाए जात बा...
इस समय महंगाई का इतना बुरा हाल है कि हर चीज महंगी हो गई है। काफी समय पहले एक दो चीजों में ही महंगाई होती थी लेकिन आज तो काई ऐसी चीज ही नहीं है जो महंगी न हो। ज्यादातर मामलों में सरकार के पास एक बहाना होता है कि पैदावार कम होने से यह चीज महंगी हो गई है। अब तो यह बहाना भी पुराना हो गया है और लोग इस पर भरोसा भी नहीं करते हैं। हां बढ़ी हुई महंगाई में लोगों को एक फिल्म का वो गाना याद हेा आता है जिसके बोल थे-- महंगाई डाइन खाए जात बा... यह गाना आज के परिपे्रक्ष्य में एकदम सटीक बैठता है।
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