
UP News : उत्तर प्रदेश में धान की फसल की कटाई के बाद खेतों में पड़ी पराली को जलाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और न ही पाली के निस्तारण के लिए उन्हें इधर उधर ताकना नहीं पड़ेगा। यूपी के किसानों की इस समस्या का समाधान करने के साथ साथ यूपी सरकार किसानों को पराली के बदले ढेर सारा पैसा प्रदान करेगी। अब किसानों को धान से जहां चावल की प्राप्ति होगी, वहीं पराली से पैसों की।
दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार पराली से कंफ्रेस्ड नेचुनल गैस (CNG) और उर्वरक बनाने की तैयारी कर रही है। यूपी सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि सरकार के इस प्रयास से शुद्ध जैविक उर्वरक का उत्पादन भी होगा, जो हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों में योगदान देगा।
यूपी में जैव ईंधन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जैव ऊर्जा नीति 2022 जारी की और इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश को प्रोत्साहित करें। इस संबंध में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान कई बड़े निवेशकों ने राज्य सरकार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किये थे।
प्रवक्ता ने कहा कि आगामी परिचालन संयंत्रों में से एक बुलन्दशहर में बुलंद बायोगैस है जो लौहगला तहसील में स्थित है। बुलंद बायोगैस ने 18.75 करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। यह संयंत्र दिसंबर में उत्पादन शुरू करेगा और प्रति दिन 3 टन सीएनजी का उत्पादन करने का अनुमान है।
संयंत्र का तरल जैविक उर्वरक किसानों को तीन साल की अवधि के लिए मुफ्त प्रदान किया जाएगा, जिसमें पात्र किसानों की पहचान करने का कार्य जिला मजिस्ट्रेट या मुख्य विकास अधिकारी के दायरे में आएगा। इस प्रयास का उद्देश्य उन किसानों का समर्थन करना है जो डायअमोनियम फॉस्फेट और यूरिया जैसे उर्वरकों की खरीद में चुनौतियों का सामना करते हैं।