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अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है।

UP News : अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) कर रही है। इसी बीच आल इंडिया इमाम एसोसिएशन (एआईएए) के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी के बयान ने इस पूरे विवाद को नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम दे दिया है। रशीदी ने विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान रथ यात्रा में जुटाए गए करीब 1400 करोड़ रुपये का हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर मंदिर आंदोलन से जुड़े आर्थिक मामलों पर बहस तेज हो गई है।
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मौलाना साजिद रशीदी ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि राम मंदिर आंदोलन के समय रथ यात्रा के दौरान बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया गया था, लेकिन उसका पूरा हिसाब कभी सार्वजनिक नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यदि किसी धार्मिक आंदोलन में जनता से आर्थिक सहयोग लिया गया है तो उसकी पारदर्शिता भी सुनिश्चित होनी चाहिए। रशीदी का कहना है कि वित्तीय जवाबदेही किसी भी संस्था की विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण आधार होती है और इसी वजह से उन्होंने वीएचपी से पुराने चंदे का विवरण सार्वजनिक करने की मांग उठाई।
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मौलाना रशीदी ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि मौजूदा विवाद के बीच उन्हें जानबूझकर वीएचपी से अलग दिखाने की कोशिश की जा रही है ताकि संगठन पर सीधे सवाल न उठें। हालांकि यह रशीदी के व्यक्तिगत आरोप हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियों ने भी इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।
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राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच कर रही एसआईटी ने हाल के दिनों में मंदिर परिसर का निरीक्षण किया और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच आगे बढ़ाई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच को व्यापक बनाने के लिए एसआईटी को अतिरिक्त समय भी दिया है।
जांच के शुरुआती चरण के बाद एफआईआर दर्ज की गई और नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस और एसआईटी का कहना है कि जांच अभी जारी है तथा सभी पहलुओं की पड़ताल के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएंगे।
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। विपक्षी दल सरकार और मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। इसी बीच विभिन्न संगठनों और नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आने से यह मुद्दा लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति क्या है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है। जांच पूरी होने तक सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और किसी भी पक्ष की जिम्मेदारी पर अंतिम निर्णय आधिकारिक जांच रिपोर्ट के बाद ही माना जाएगा।
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