अब नोएडा जैसा शहर बसेगा गोरखपुर में, गांवों की जमीन ली जाएगी
New Gorakhpur
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 04:37 AM
New Gorakhpur : उत्तर प्रदेश के पास नोएडा जैसा एक ऐसा औद्योगिक शहर है जिसकी हर जगह तारीफ हो रही है। हर सरकार के लिए नोएडा जैसा औद्योगिक शहर बनाना एक स्वप्न जैसा है। अब उत्तर प्रदेश वालों के लिए सरकार एक बार फिर खुशखबरी लेकर आई है। अब प्रदेश की योगी सरकार नोएडा की तर्ज पर गोरखपुर के आसपास एक नया गोरखपुर बसाने वाली है। इसके लिए करीब 25 गांवों की 6 हजार एकड़ जमीन गोरखपुर विकास प्राधिकरण को अधिग्रहीत करनी होगी। लेकिन जिन किसानों की यहां जमीन है वो निर्धारित रेट पर जमीन देने को तैयार नहीं हंै और वो जनसुनवाई और बैठकों में अपनी आपत्ति जता रहे हैं। इसे बसाने में तीन हजार करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है, जिसके लिए शासन ने 400 करोड़ रुपये जारी भी कर दिया है। हालांकि, जिन किसानों की जमीन यहां है वह अपनी जमीन आसानी से जीडीए को देना नहीं चाह रहे। यहां के किसान महिलाओं और बच्चों को भी आगे लाकर अपना विरोध जताने लगे हैं। किसान चौपाल पर भी बातचीत कर रहे हैं, इस जन सुनवाई के दौरान भी आपत्ति दर्ज कराई जा रही है।
ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए किसानों की जमीनों का अधिग्रहण
नया गोरखपुर बसाने की कवायद मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत शुरू हुई की गई है। गोरखपुर-कुशीनगर रोड पर चौरी चौरा तहसील क्षेत्र के माड़ा पार में 152 हेक्टेयर और सदर तहसील क्षेत्र के तकिया मेदनीपुर में 45 और कोनी में 57 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी। इस नए शहर में किसानों से समझौते के आधार मिली जमीन पर नया गोरखपुर बनाने का काम शुरू किया जाएगा। पूर्व जिला पंचायत सदस्य कुंवर प्रताप सिंह के नेतृत्व में काश्तकारों ने अपनी जमीन सरकार के वर्तमान रेट पर नहीं देने की बात की है और अपनी मांग जीडीए के सामने रखी है। किसानों ने बाजार दर के हिसाब से नए सर्किल रेट तय करने और फिर कमेटी गठित कर उस सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजे की दर तय करने की मांग की है। जमीन लेने के साथ ही अनिवार्य अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार किसी भी हाल में अपनी इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा करके ही मानेगी।
खेती की जमीन देने को तैयार नहीं किसान
जीडीए के उपाध्यक्ष आनंद वर्धन सिंह ने बताया कि किसान 2016 के मुकाबले अपनी जमीन का मुआवजा चार गुना मांगने पर अड़े थे, लेकिन पहले सरकार इसे देने को तैयार नहीं थी जिसके कारण किसान अपनी खेती की जमीन देने का विरोध कर रहे थे। तहसीलदार ने बताया कि इस मामले में उच्च अधिकारियों से चर्चा के बाद ही आगे कोई फैसला किया जाएगा। जो किसान अपनी जमीन नहीं देना चाहते, उनमें हीरालाल, रामवती यादव, सुदामा निषाद, संजय जायसवाल, सत्येंद्र निषाद,अब्दुल हमीद अंसारी, प्रदीप निषाद, मुकेश सिंह राम, गोविंद पुजारी, चंद्रभान पासवान, राजेंद्र भगत समेत कई काश्तकार का नाम शामिल है। ज्यादातर किसान नए सर्किल रेट के हिसाब से जमीन का दाम तय करने की बात कर रहे हैं।
हजारों किसानों को करनी है रजिस्ट्री
नया गोरखपुर बनाने की कवायद में पिछले दिनों जमीन के रेट पर सहमति बनी तो किसानों ने अपनी जमीन की रजिस्ट्री, गोरखपुर विकास प्राधिकरण के पक्ष में करना शुरू कर दिया है। करीब एक हजारों किसानों को रजिस्ट्री करनी है। अब तक 150 किसानों ने सहमति पत्र भरे जाने की बात कही है। 3 करोड़ 35 लाख 70 हजार प्रति हेक्टेयर की दर इसके लिए रेट तय हुई है। ऐसे ही अन्य गांव से भी जमीन की खरीदारी होगी। जल्द ही शासन को पत्र लिखकर प्राधिकरण और धनराशि की मांग की गई है। जैसे-जैसे किसानों की रजिस्ट्री होगी, वैसे-वैसे पैसों की जरूरत भी बढ़ने वाली है। ज्यादातर किसान इस रेट पर अपनी जमीन रजिस्ट्री करने को तैयार दिख रहे हैं।