क्या पाकिस्तान में बैठा हैंडलर लखनऊ में बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की साजिश रच रहा था ? क्या पुलिस और सेना के जवानों को निशाना बनाने के लिए पंजाब के युवाओं को तीन लाख रुपये की सुपारी दी गई थी ?

UP News : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को दहशत में डालने और देश की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने की एक बड़ी साजिश का उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (UP ATS) ने पर्दाफाश किया है। जांच में पाकिस्तान में बैठे एक हैंडलर के इशारे पर लखनऊ में पुलिस या सेना के किसी अधिकारी अथवा जवान की टारगेट किलिंग करने की योजना सामने आई है। इस वारदात को अंजाम देने के लिए पंजाब के युवाओं को तैयार किया गया था। उन्हें हत्या करने के बदले तीन लाख रुपये देने का लालच दिया गया था। इतना ही नहीं, पूरी वारदात का वीडियो बनाकर पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलर को भेजने का भी निर्देश दिया गया था। इस मामले में यूपी एटीएस ने तीन युवकों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को पुलिस निगरानी में लिया गया है। आरोपियों के पास से एक विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक पूछताछ में हथियारों के पाकिस्तान से भेजे जाने और लखनऊ में नेटवर्क से जुड़े स्थानीय व्यक्ति के माध्यम से आरोपियों तक पहुंचने की बात सामने आई है। UP News
यह भी पढ़ें उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में रोजगार का नया ठिकाना तैयार करेगी योगी सरकार, युवाओं को मिलेगा मौका
उत्तर प्रदेश पुलिस के अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश के अनुसार, खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी कि पाकिस्तान में बैठा एक हैंडलर भारतीय युवाओं के माध्यम से लखनऊ में किसी पुलिस या सेना के अधिकारी को निशाना बनाने की साजिश रच रहा है। इस पूरे नेटवर्क में राणा भाई नाम का एक पाकिस्तानी हैंडलर सामने आया है, जिसके प्रतिबंधित शहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) से जुड़े होने की बात जांच में सामने आई है। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, आरोपियों का संपर्क इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के माध्यम से पाकिस्तान में बैठे इस हैंडलर से हुआ था। सोशल मीडिया पर बातचीत के बाद उन्हें एक विशेष टास्क सौंपा गया। आरोपियों को बताया गया था कि लखनऊ में किसी पुलिस या सेना के अधिकारी अथवा जवान की हत्या करनी है। इस वारदात को अंजाम देने के बाद उसका वीडियो बनाकर पाकिस्तान भेजना होगा। इसके बदले उन्हें तीन लाख रुपये देने का वादा किया गया था। UP News
इसे भी पढ़ें : उत्तर प्रदेश केइन वकीलों का मुद्दा मुख्यमंत्री के दरबार में
एटीएस की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी पंजाब के अमृतसर और गुरदासपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं। वे 27 अक्टूबर को अमृतसर से निकले और दिल्ली होते हुए 29 अक्टूबर की रात लखनऊ पहुंच गए।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार हुई है:
इसके अलावा एक नाबालिग को भी इस मामले में पुलिस निगरानी में लिया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों को लखनऊ पहुंचने के लिए पाकिस्तान में बैठे हैंडलर की ओर से आर्थिक मदद भी दी गई थी। UP News
इस साजिश का एक और गंभीर पहलू यह है कि आरोपी केवल लखनऊ पहुंचकर हमले की तैयारी नहीं कर रहे थे, बल्कि उन्होंने शहर के महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी भी शुरू कर दी थी। जांच में सामने आया कि लखनऊ पहुंचने के बाद आरोपियों ने रेलवे स्टेशन का वीडियो बनाया और उसे पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजा।
आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में संदिग्ध चैट, वीडियो और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी से संबंधित सामग्री मिली है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों ने किन-किन स्थानों की जानकारी जुटाई थी और उन स्थानों की लोकेशन पाकिस्तान में किस तरह साझा की गई। इससे यह भी जांच का विषय बन गया है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर लखनऊ की गतिविधियों और संवेदनशील स्थानों की जानकारी हासिल करने के लिए स्थानीय स्तर पर किस तरह का नेटवर्क तैयार कर रहे थे। UP News
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर खुलासा हथियारों की आपूर्ति को लेकर हुआ है। एटीएस की प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर ने उन्हें जानकारी दी थी कि हथियार और कारतूस पाकिस्तान से भेजे गए हैं। लखनऊ पहुंचने पर नेटवर्क से जुड़े एक स्थानीय व्यक्ति ने उन्हें विदेशी पिस्टल और कारतूस उपलब्ध कराए थे। एटीएस ने आरोपियों के कब्जे से एक विदेशी पिस्टल और 20 कारतूस बरामद किए हैं। हालांकि, हथियार वास्तव में पाकिस्तान से ही भेजे गए थे या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि और आपूर्ति की पूरी श्रृंखला का पता लगाना अभी जांच का विषय है। अब एटीएस यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार लखनऊ तक किस रास्ते से पहुंचे, इन्हें किसने उपलब्ध कराया और इस नेटवर्क में कितने अन्य लोग शामिल हैं। UP News
साजिश का एक और महत्वपूर्ण पहलू आरोपियों के भागने की योजना से जुड़ा है। प्रारंभिक पूछताछ के अनुसार, वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों को नेपाल भाग जाना था, ताकि वे भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त से बच सकें। पाकिस्तान में बैठे हैंडलर ने उन्हें वारदात के बाद फरार होने का रास्ता भी सुझाया था। इस तरह पूरी साजिश में लक्ष्य का चयन, हथियारों की व्यवस्था, आर्थिक लालच, वारदात का वीडियो बनाना और हमले के बाद फरार होना जैसे पहलू शामिल थे।
एटीएस की जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है।
इनमें संदिग्ध चैट, वीडियो और विदेशी हैंडलरों के साथ बातचीत से संबंधित सामग्री शामिल है। कुछ व्हाट्सऐप खातों के संचालन में वर्चुअल नंबरों के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आरोपियों का संपर्क केवल राणा भाई तक सीमित था या इस नेटवर्क में पाकिस्तान में बैठे दूसरे लोग भी शामिल थे। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल गगनदीप सिंह के खिलाफ पंजाब में पहले भी आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
इस पूरे मामले में एक बात विशेष रूप से चिंताजनक है। आरोपियों को केवल किसी व्यक्ति की हत्या करने का निर्देश नहीं दिया गया था, बल्कि वारदात का वीडियो बनाकर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इससे जांच एजेंसियां इस संभावना की भी पड़ताल कर रही हैं कि इस तरह की वारदातों के वीडियो का इस्तेमाल पाकिस्तान में बैठे नेटवर्क द्वारा अपनी गतिविधियों का प्रचार करने और दूसरे युवाओं को ऐसी साजिशों में शामिल करने के लिए किया जाना था। हालांकि, इस उद्देश्य की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
उत्तर प्रदेश एटीएस अब गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर विस्तृत पूछताछ करने की तैयारी में है। जांच के प्रमुख बिंदुओं में स्थानीय मददगारों की पहचान, हथियारों की आपूर्ति करने वाले लोगों का पता लगाना, पाकिस्तान से हुए संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच और इस साजिश में शामिल अन्य लोगों की तलाश शामिल है। मामले में विधि विरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम (UAPA), भारतीय न्याय संहिता और आयुध अधिनियम के तहत कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।
लखनऊ की यह घटना एक बड़े सुरक्षा संबंधी सवाल की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है। पाकिस्तान में बैठे संदिग्ध हैंडलर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारत के युवाओं से संपर्क कर उन्हें आपराधिक और आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। इस मामले में इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के माध्यम से संपर्क, पैसों का लालच, हथियारों की व्यवस्था और वारदात के बाद फरार होने की योजना जैसे पहलू सामने आए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह केवल चार युवाओं तक सीमित साजिश थी या इसके पीछे लखनऊ और उत्तर प्रदेश के दूसरे शहरों तक फैला कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है? यूपी एटीएस की आगे की जांच से इस साजिश की बाकी कड़ियों और पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों के नेटवर्क के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई ने राजधानी लखनऊ में एक संभावित बड़ी वारदात को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। :
विज्ञापन