क्या सिख समुदाय से जुड़ी कथित टिप्पणी के मामले में राहुल गांधी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है ? क्या अदालत ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है ?
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UP News : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को सिख समुदाय से जुड़ी कथित टिप्पणी के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका पर यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने राहुल गांधी के सितंबर 2024 में अमेरिका दौरे के दौरान सिख समुदाय को लेकर दिए गए बयान पर आपत्ति जताते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। यह याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने वाराणसी की अदालत में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने याचिका खारिज कर दी है।
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यह विवाद राहुल गांधी के सितंबर 2024 के अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए एक बयान से जुड़ा है। 10 सितंबर 2024 को एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने सिख समुदाय के संदर्भ में कहा था कि भारत में इस बात को लेकर चिंता है कि क्या कोई सिख पगड़ी और कड़ा पहनने के साथ गुरुद्वारे जा सकेगा। उन्होंने कहा था कि यह चिंता केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि सभी धर्मों से जुड़ी है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में भारत की विविधता और संवैधानिक अवधारणा का उल्लेख करते हुए भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि RSS देश की विविध भाषाओं, धर्मों और समुदायों को समान दृष्टि से नहीं देखता। इसी बयान को लेकर वाराणसी निवासी नागेश्वर मिश्रा और अन्य लोगों ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत की थी।
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याचिकाकर्ताओं ने पहले सारनाथ थाने में शिकायत देकर राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। पुलिस की ओर से कार्रवाई नहीं होने पर उन्होंने वाराणसी की अदालत का रुख किया। 28 नवंबर 2024 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM-II) ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। अदालत ने टिप्पणी की थी कि कथित बयान अमेरिका में दिया गया था और इस कारण उसके अधिकार क्षेत्र से जुड़ा सवाल उठता है। इसके बाद नागेश्वर मिश्रा ने वाराणसी की MP/MLA अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। 21 जुलाई 2025 को अदालत ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए मामले की दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया। राहुल गांधी ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन उनकी याचिका खारिज होने के बाद मामला वाराणसी की अदालत में फिर से सुना गया।
मामले की सुनवाई के दौरान राहुल गांधी ने लिखित जवाब दाखिल कर याचिकाकर्ता की शिकायत को राजनीतिक कारणों से प्रेरित बताया था। उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का कोई कानूनी आधार नहीं है। राहुल गांधी ने खुद को सच्चा देशभक्त बताते हुए कहा था कि वह सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान करते हैं, जिनमें सिख समुदाय भी शामिल है। उन्होंने अपनी टिप्पणी का उद्देश्य सिख समुदाय के अधिकारों, हितों और देश के प्रति उसके योगदान को सामने रखना बताया था।
इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 16 अक्टूबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था। गुरुवार को न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने नागेश्वर मिश्रा और अन्य की याचिका खारिज कर दी। इस फैसले से राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली मौजूदा याचिका पर कार्यवाही आगे नहीं बढ़ेगी।
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