श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अब राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पेशेवर, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। हाल के दान विवाद के बाद ट्रस्ट पहली बार मंदिर के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है।

UP News : उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्तिथ श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अब राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पेशेवर, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। हाल के दान विवाद के बाद ट्रस्ट पहली बार मंदिर के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। हालांकि इस प्रतिष्ठित पद के लिए केवल उच्च शैक्षणिक योग्यता या कॉरपोरेट अनुभव ही पर्याप्त नहीं होगा। चयन समिति ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार में सबसे महत्वपूर्ण गुण भगवान श्रीराम के प्रति गहरी आस्था और सेवा का भाव होना चाहिए। UP News
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राम मंदिर के पहले CEO की तलाश के लिए गठित तीन सदस्यीय सर्च कमेटी के सदस्य सुरेश हावरे ने स्पष्ट किया है कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक पद नहीं है। उनके अनुसार, मंदिर का संचालन केवल प्रबंधन कौशल से नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए श्रद्धा, सेवा और भक्तों के प्रति सम्मान का भाव भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल कॉरपोरेट सोच रखने वाला पेशेवर व्यक्ति इस जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से नहीं निभा सकता। सबसे पहले उम्मीदवार में भगवान राम के प्रति समर्पण होना चाहिए, उसके बाद समाज सेवा और श्रद्धालुओं की भावनाओं को समझने की क्षमता भी जरूरी है। सर्च कमेटी के मुताबिक, नियुक्त होने वाला CEO मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था का प्रमुख स्तंभ होगा। उसके जिम्मे प्रतिदिन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ का प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, मानव संसाधन (HR) की निगरानी, वित्तीय व्यवस्था, खरीद प्रक्रिया और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। ट्रस्ट का उद्देश्य आधुनिक प्रबंधन प्रणाली के साथ पारंपरिक धार्मिक मूल्यों का संतुलन बनाए रखना है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। UP News
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राम मंदिर के पहले CEO के चयन के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 6 जुलाई को तीन सदस्यीय सर्च कमेटी का गठन किया था। समिति में शामिल सुरेश हावरे परमाणु ऊर्जा विभाग के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक हैं और लगभग 27 वर्षों तक इस क्षेत्र में सेवाएं दे चुके हैं। वह शिर्डी साईं बाबा संस्थान ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे एनआईटी रायपुर के चेयरमैन और श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के सदस्य हैं। मंदिर प्रबंधन पर उनका व्यापक अनुभव और अध्ययन भी रहा है। समिति के अन्य सदस्यों में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रदीप कोहली और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी शामिल हैं। समिति जल्द ही ऑनलाइन और प्रत्यक्ष बैठकों के माध्यम से चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। UP News
सुरेश हावरे का कहना है कि अयोध्या का राम मंदिर किसी सामान्य धार्मिक स्थल की तरह नहीं है। यह सदियों लंबे संघर्ष, करोड़ों लोगों की आस्था और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। ऐसे में यहां की प्रशासनिक व्यवस्था भी उसी स्तर की होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में भी प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं, जबकि विशेष पर्वों और धार्मिक अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग भी जरूरी माना जा रहा है। UP News
हाल के दान विवाद के बाद ट्रस्ट वित्तीय पारदर्शिता को लेकर भी अधिक सतर्क दिखाई दे रहा है। सुरेश हावरे ने कहा कि समाज मंदिरों से यह अपेक्षा करता है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए प्रत्येक दान का पारदर्शी हिसाब रखा जाए और उसका उपयोग समाजहित में किया जाए। उन्होंने कहा कि मंदिरों की भूमिका केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि अस्पताल, विद्यालय, वृद्धाश्रम, अन्नक्षेत्र और अन्य सामाजिक सेवाओं में भी उनकी सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। इसलिए वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही भविष्य के CEO की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल होगी। सर्च कमेटी का मानना है कि राम मंदिर के पहले CEO का चयन केवल प्रशासनिक अनुभव के आधार पर नहीं किया जाएगा। ट्रस्ट ऐसे व्यक्ति की तलाश में है जो आधुनिक प्रबंधन क्षमता के साथ भगवान श्रीराम के प्रति समर्पण, समाज सेवा की भावना और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करने की योग्यता रखता हो। यही संतुलन भविष्य में राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देने का आधार बनेगा। UP News
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