विज्ञापन
उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा गड़बड़ी मामले की जांच कर रही SIT को अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अब अतिरिक्त समय मिल गया है। शासन ने जांच के दायरे को और विस्तारित करते हुए रिपोर्ट जमा करने की नई समयसीमा 15 जुलाई तय की है।

UP News : उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा गड़बड़ी मामले की जांच कर रही SIT को अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अब अतिरिक्त समय मिल गया है। शासन ने जांच के दायरे को और विस्तारित करते हुए रिपोर्ट जमा करने की नई समयसीमा 15 जुलाई तय की है। इससे पहले यह रिपोर्ट 30 जून तक सौंपे जाने की निर्धारित थी। अब जांच एजेंसी पूरे मामले की अधिक विस्तृत और गहन पड़ताल करेगी। UP News
यह भी पढ़े : क्या बदल जाएगा राम मंदिर ट्रस्ट का ढांचा? चंपत राय को लेकर सस्पेंस
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी प्रमुख और लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत की अगुवाई में गठित टीम ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी। इसमें आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरत्न भी शामिल हैं। प्रारंभिक निष्कर्षों के बाद जांच के और पहलुओं की जरूरत महसूस की गई, जिसके चलते टीम ने अतिरिक्त समय और संसाधनों की मांग की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। UP News
13 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) ने 15 जून से अयोध्या में जांच शुरू की थी। एक सप्ताह के भीतर ही प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई थी, जिसमें चढ़ावा गणना और निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियों के संकेत मिले थे। रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई और गणना कार्य में लगे कई कर्मचारियों की गिरफ्तारी के साथ लगभग 80 लाख रुपये की बरामदगी भी की गई। UP News
जांच के दौरान सामने आए नए दस्तावेजों और शिकायतों के बाद मामले का दायरा बढ़ा दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ जनप्रतिनिधियों और अन्य पक्षों द्वारा भी एसआईटी को अतिरिक्त दस्तावेज सौंपे गए हैं, जिनमें भूमि खरीद और वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोप शामिल हैं। इन नए इनपुट्स के बाद जांच एजेंसी ने पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल करने का निर्णय लिया है। UP News
एसआईटी ने अब तक करीब डेढ़ सौ से अधिक लोगों से पूछताछ की है। इसके साथ ही मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की जांच में भी कई अहम तथ्य सामने आए हैं। सूत्रों का दावा है कि कुछ रिकॉर्डिंग संदिग्ध परिस्थितियों में डिलीट पाई गईं, जिससे निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि कई बार बिना पर्याप्त सुरक्षा और रिकॉर्डिंग के ही दान प्रक्रिया और गणना कार्य संपन्न किए गए। प्रारंभिक निष्कर्षों में दान राशि की गणना प्रणाली को लेकर पारदर्शिता की कमी उजागर हुई है। दान संग्रह से लेकर उसकी गिनती तक की प्रक्रिया में स्पष्ट नियम और सख्त निगरानी तंत्र का अभाव पाया गया। जांच एजेंसी का मानना है कि इसी ढांचे की कमजोरी का फायदा उठाकर अनियमितताएं हुईं। UP News
विज्ञापन