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अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले ने अब कानूनी और सामाजिक स्तर पर नया मोड़ ले लिया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने सोमवार को हुई एक विशेष बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि इस मामले में गिरफ्तार किसी भी आरोपी की पैरवी कोई अधिवक्ता न्यायालय में नहीं करेगा।

UP News : अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के मामले ने अब कानूनी और सामाजिक स्तर पर नया मोड़ ले लिया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने सोमवार को हुई एक विशेष बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि इस मामले में गिरफ्तार किसी भी आरोपी की पैरवी कोई अधिवक्ता न्यायालय में नहीं करेगा। इस फैसले ने जिले की कानूनी व्यवस्था में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। UP News
बार एसोसिएशन की बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि कोई अधिवक्ता इस प्रकरण के आरोपियों की पैरवी करता है तो उस पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में संबंधित वकील की सदस्यता समाप्त करने का भी प्रावधान रखा गया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने कहा कि यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है और संगठन अपने रुख पर अडिग रहेगा। बैठक में यह भी प्रस्ताव पारित किया गया कि मामले में श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और विनोद राय की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए। बार एसोसिएशन ने शासन को पत्र भेजकर इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और निगरानी सुनिश्चित करने की मांग करने का निर्णय लिया है। साथ ही यह भी आग्रह किया गया है कि जांच पूरी होने तक संबंधित व्यक्तियों को अयोध्या से बाहर न जाने दिया जाए। UP News
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बार एसोसिएशन ने यह भी तय किया है कि अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के लिए संगठन के पदाधिकारियों के साथ पांच अन्य अधिवक्ताओं की एक विशेष टीम गठित की जाएगी। यह टीम मामले की सुनवाई में सक्रिय भूमिका निभाएगी। साथ ही जिलाधिकारी को पत्र भेजकर मांग की जाएगी कि बार प्रतिनिधियों को भी सरकारी पक्ष की पैरवी प्रक्रिया में शामिल किया जाए। बैठक के दौरान कई अधिवक्ताओं ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। कुछ सदस्यों ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और विनोद राय के नाम लेते हुए उनके खिलाफ गिरफ्तारी और जांच की मांग की। यहां तक कि तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ने का अल्टीमेटम भी दिया गया, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी गई। बार सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने कहा कि यह घटना समाज और आस्था दोनों के लिए आघात है और इससे अयोध्या की छवि प्रभावित हुई है। कई अधिवक्ताओं ने आरोपियों को रिमांड प्रक्रिया में “गोपनीय तरीके” से पेश किए जाने पर भी आपत्ति जताई। अधिवक्ता विवेक कुमार सिंह ने सुझाव दिया कि आरोपियों को जनता के सामने लाया जाना चाहिए, जबकि अधिवक्ता राजेंद्र चौधरी ने इस पूरे प्रकरण में सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और बुलडोजर कार्रवाई जैसी मांग उठाई। गौरतलब है कि एसआईटी जांच के बाद इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। जांच में अब तक लगभग 80 लाख रुपये की बरामदगी भी की जा चुकी है। मामले की आगे की जांच जारी है। UP News
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