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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपना पक्ष सार्वजनिक करते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। ट्रस्ट का कहना है कि करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य की स्वर्ण रामचरितमानस पूरी तरह सुरक्षित है और इसे मंदिर परिसर के संरक्षित कोषागार में रखा गया है।

UP News : अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भेंट की गई स्वर्ण रामचरितमानस को लेकर उठे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपना पक्ष सार्वजनिक करते हुए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। ट्रस्ट का कहना है कि करीब पांच करोड़ रुपये मूल्य की स्वर्ण रामचरितमानस पूरी तरह सुरक्षित है और इसे मंदिर परिसर के संरक्षित कोषागार में रखा गया है। विवाद के बीच ट्रस्ट ने इसकी तस्वीर भी जारी की है। यह मामला उस समय चर्चा में आया जब पूर्व आईएएस अधिकारी और भारत सरकार के पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा भगवान रामलला को समर्पित की गई स्वर्ण रामचरितमानस अब मंदिर में दिखाई नहीं दे रही है। उनका दावा था कि कई बार जानकारी मांगने के बावजूद उन्हें इसकी स्थिति को लेकर स्पष्ट उत्तर नहीं मिला। UP News
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राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, स्वर्ण रामचरितमानस को प्रारंभिक दिनों में गर्भगृह के समीप श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया था। बाद में सुरक्षा और संरक्षण की दृष्टि से इसे मंदिर परिसर में बने सुरक्षित कोठार में स्थानांतरित कर दिया गया। ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह धार्मिक धरोहर पूरी तरह सुरक्षित है और यदि दानदाता चाहें तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत आकर स्वयं इसकी पुष्टि कर सकते हैं। तस्वीर जारी करने का उद्देश्य भी इसी भ्रम को दूर करना बताया गया है। UP News
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पूर्व गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण का कहना है कि उन्होंने अपनी दिवंगत मां की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए उनके आभूषणों को गलवाकर स्वर्ण रामचरितमानस तैयार कराई थी। इसे उन्होंने अप्रैल 2024 में रामनवमी से पहले रामलला को समर्पित करने के उद्देश्य से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपा था। उनका दावा है कि शुरुआत में इस स्वर्ण रामचरितमानस को मंदिर में रखा गया और इसकी नियमित पूजा भी होती रही। लेकिन कुछ महीनों बाद जब उन्होंने इसके बारे में जानकारी लेनी चाही तो उन्हें बताया नहीं गया कि यह कहां है। उनका आरोप है कि उन्हें आज तक भेंट की आधिकारिक रसीद भी उपलब्ध नहीं कराई गई। UP News
एस. लक्ष्मी नारायण का कहना है कि उन्होंने कई बार फोन, पत्र और व्हाट्सएप संदेशों के जरिए ट्रस्ट से संपर्क किया। इसके अलावा उन्होंने कई बार अयोध्या जाकर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मिलने का भी प्रयास किया, लेकिन न तो उन्हें संतोषजनक जवाब मिला और न ही उनकी शंकाओं का समाधान किया गया। उनके अनुसार, जब सारी कोशिशें विफल रहीं तो उन्हें अपनी बात सार्वजनिक करनी पड़ी।पूर्व गृह सचिव ने एक टीवी साक्षात्कार में दावा किया कि पहली बार जानकारी लेने अयोध्या पहुंचने पर उन्हें कई घंटे इंतजार करना पड़ा। उनका आरोप है कि मुलाकात के दौरान उनकी भावनाओं के अनुरूप व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने बार-बार अनुरोध किया था कि उनकी माता की स्मृति से जुड़ी इस बहुमूल्य धार्मिक भेंट को मंदिर में उचित स्थान पर प्रदर्शित किया जाए, लेकिन इस संबंध में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। UP News
एस. लक्ष्मी नारायण ने बताया कि उन्होंने पहले श्रीकृष्ण जन्मभूमि को भी स्वर्ण पत्रों पर अंकित श्रीमद्भगवद्गीता की एक विशेष प्रति भेंट की थी। उनके अनुसार, उस समय संबंधित संस्थान ने विधिवत रसीद जारी की थी और आज भी वह धार्मिक ग्रंथ सुरक्षित रखा गया है तथा नियमित पूजा-अर्चना होती है। उन्होंने कहा कि इसी अनुभव के आधार पर उन्हें उम्मीद थी कि राम मंदिर में भी उनकी भेंट का रिकॉर्ड और संरक्षण पूरी पारदर्शिता के साथ होगा। UP News ,
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