फर्जी नियुक्तियों पर रोक लगाने की पहल : तीन महीने के अंदर होगी जांच

विभाग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए, समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आउटसोर्सिंग के जरिए की जाने वाली सभी नियुक्तियां पूरी तरह से नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप।

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राज्यमंत्री असीम अरुण प्रेसवार्ता करते हुए
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar11 Jan 2026 04:08 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने समाज कल्याण विभाग में फर्जी नियुक्तियों को लेकर एक अहम पहल की है। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत कुछ कोआॅर्डिनेटरों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियां किए जाने के मामले सामने आने के बाद समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कड़ा रुख अपनाया है। विभाग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए, समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आउटसोर्सिंग के जरिए की जाने वाली सभी नियुक्तियां पूरी तरह से निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप हों।

नए शासनादेश का उद्देश्य: पारदर्शिता और मानकों का पालन

असीम अरुण ने कहा कि समाज कल्याण विभाग में आउटसोर्सिंग से जुड़ी सभी नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी। अब तक कई नियुक्तियां बिना उचित दस्तावेज सत्यापन के की गई थीं, जिनमें फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किए जाने की संभावना थी। विभाग की तरफ से जारी शासनादेश में यह स्पष्ट किया गया है कि अब से हर आउटसोर्सिंग कर्मचारी की नियुक्ति से पहले उसके शैक्षिक और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी। इसके साथ ही, सभी कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जाएगा, जिससे उनकी पृष्ठभूमि और पूर्व में किए गए कार्यों का सही सत्यापन किया जा सके। यह कदम विभाग में भरोसा और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए लिया गया है।

तीन महीने में होगी मौजूदा कर्मचारियों की जांच

समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरुण ने निर्देश दिए हैं कि वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच अगले तीन महीनों के भीतर पूरी की जाए। यह जांच प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या नियमों की अवहेलना न हो। उन्होंने यह भी कहा कि समाज कल्याण विभाग में कार्यरत किसी भी व्यक्ति के खिलाफ किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता की स्थिति में सख्त कार्रवाई की जाएगी। असीम अरुण ने कहा, हमारा उद्देश्य समाज कल्याण विभाग में पूरी तरह से पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करना है। आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जाने वाली सभी नियुक्तियां पूरी तरह से नियमों और मानकों के अनुसार होंगी। जहां कहीं भी अनियमितता मिलेगी, वहां कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सख्त कार्रवाई का संदेश

समाज कल्याण विभाग में हुई इस पहल से यह संदेश जाता है कि सरकार अब किसी भी प्रकार की भ्रष्टाचार और अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि आउटसोर्सिंग के जरिए भर्ती होने वाले सभी कर्मचारियों के दस्तावेजों का पूरी तरह से सत्यापन किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे सभी नियमों का पालन करें। किसी भी प्रकार की फर्जी नियुक्तियों पर रोक लगाने के लिए सरकारी तंत्र पूरी तरह से सक्रिय हो गया है।

आउटसोर्सिंग की प्रक्रिया को और सुदृढ़ बनाना

असीम अरुण के नेतृत्व में, समाज कल्याण विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि आउटसोर्सिंग के जरिए की जाने वाली नियुक्तियों में पूरी पारदर्शिता बनी रहे। इससे न केवल सरकार की छवि बेहतर होगी, बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी। राज्यमंत्री ने कहा कि समाज कल्याण विभाग में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या विभागीय भ्रष्टाचार को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, सभी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में सुधार और उनका भला करने के लिए सरकार द्वारा सही कदम उठाए जा रहे हैं।

कर्मचारियों के लिए नई दिशा

समाज कल्याण विभाग में सुधार की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट दिशा तय होगी, और उनके कार्यों की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। साथ ही, विभाग में नियुक्तियों के लिए पारदर्शिता बढ़ेगी, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को अधिक से अधिक लाभ मिल सकेगा। इस प्रकार, समाज कल्याण विभाग ने आउटसोर्सिंग नियुक्तियों की प्रक्रिया को और सख्त और पारदर्शी बनाने के लिए एक नई दिशा अपनाई है, जिससे भविष्य में कोई भी गड़बड़ी या धोखाधड़ी की संभावना समाप्त हो सकेगी।

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उत्तर प्रदेश सरकार का कर्मचारियों के ई-आफिस सिस्टम का पालन न करने पर कड़ा फैसला

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 21 नवंबर से 20 दिसंबर 2025 के बीच करीब 58 प्रतिशत अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक बार भी ई-आफिस सॉफ़्टवेयर में लॉग-इन नहीं किया। यह स्थिति उन विभागों में सबसे ज्यादा देखने को मिली, जहां कामकाजी दबाव और सिस्टम के इस्तेमाल में लापरवाही दिखाई दी।

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ई-आफिस सिस्टम
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar11 Jan 2026 03:12 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के ई-आॅफिस सिस्टम का पालन न करने पर कड़ा कदम उठाने का फैसला लिया है। प्रदेश के 44,694 अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी गई है कि यदि वे इस प्रणाली का नियमित रूप से उपयोग नहीं करते हैं, तो उनका वेतन अगले महीने रोका जा सकता है। सरकारी कार्यालयों में ई-आॅफिस प्रणाली को अनिवार्य किया गया था, लेकिन आंकड़ों से पता चलता है कि कई अधिकारी और कर्मचारी इस नियम की अनदेखी कर रहे हैं।

कई विभागों में सिस्टम के इस्तेमाल में लापरवाही दिखाई दी

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 21 नवंबर से 20 दिसंबर 2025 के बीच करीब 58 प्रतिशत अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक बार भी ई-आफिस सॉफ़्टवेयर में लॉग-इन नहीं किया। यह स्थिति उन विभागों में सबसे ज्यादा देखने को मिली, जहां कामकाजी दबाव और सिस्टम के इस्तेमाल में लापरवाही दिखाई दी। ऊर्जा विभाग, धर्मार्थ कार्य विभाग, कारागार, प्राविधिक शिक्षा, परिवहन और चिकित्सा शिक्षा विभागों में ई-आॅफिस का उपयोग बहुत कम पाया गया।

लापरवाही में जल्द सुधार नहीं होती, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे

विशेष रूप से ऊर्जा विभाग में जहां कुल 75 उपयोगकर्ता हैं, कोई भी एक महीने तक सिस्टम में लॉग-इन नहीं हुआ। इसी तरह लोक निर्माण विभाग में 10,895 उपयोगकतार्ओं में से सिर्फ 4,815 कर्मचारियों ने निर्धारित अवधि में लॉग-इन किया। सरकार का कहना है कि ई-आॅफिस के बिना फाइलों का निस्तारण और प्रशासनिक कार्य सुचारु रूप से नहीं चल सकते, और अगर यह लापरवाही जल्द सुधार नहीं होती, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे, जिनमें कर्मचारियों का वेतन रोकना भी शामिल हो सकता है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी सरकारी विभाग ई-आॅफिस प्रणाली का सही तरीके से पालन करें, ताकि कामकाजी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

क्या सरकार को और भी कठोर कदम उठाने की जरूरत पड़ेगी

इस सख्त नीति के परिणामस्वरूप कई कर्मचारियों में असंतोष फैल सकता है, लेकिन सरकार का कहना है कि यदि इस पहलू में सुधार नहीं किया गया तो वेतन की रोकथाम जैसी कार्रवाई को बढ़ाया जा सकता है। अब यह देखना होगा कि क्या कर्मचारी इस चेतावनी के बाद अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करते हैं, या फिर सरकार को और भी कठोर कदम उठाने की जरूरत पड़ेगी। आप क्या सोचते हैं, क्या यह कदम पूरी तरह से सही है या कुछ लचीलापन दिखाना जरूरी था?

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केशव प्रसाद का तीखा हमला- विपक्षी नेता राम जी के नाम से चिढ़ते हैं

मौर्य ने कांग्रेस को भ्रष्टाचार की जननी बताते हुए यह भी दावा किया कि पहले की सरकारों में भ्रष्टाचार इतना गहरा था कि लाभार्थियों तक केवल 15 पैसे पहुंचते थे, बाकी पैसे रास्ते में गायब हो जाते थे। लेकिन जब से भाजपा सत्ता में आई है, तब से पूरा पैसा सीधे लाभार्थी तक पहुंचता है।

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केशव प्रसाद मौर्य
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userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar10 Jan 2026 06:50 PM
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UP News : डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बरेली में एक प्रेस वार्ता के दौरान विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा), पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता राम जी के नाम से चिढ़ते हैं, और इसका मुख्य कारण भाजपा सरकार का विकास और पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता है। मौर्य ने कांग्रेस को भ्रष्टाचार की जननी बताते हुए यह भी दावा किया कि पहले की सरकारों में भ्रष्टाचार इतना गहरा था कि लाभार्थियों तक केवल 15 पैसे पहुंचते थे, बाकी पैसे रास्ते में गायब हो जाते थे। लेकिन जब से भाजपा सत्ता में आई है, तब से पूरा पैसा सीधे लाभार्थी तक पहुंचता है।

कांग्रेस और सपा जैसे विपक्षी दलों को राम जी के नाम से समस्या 

उनका यह भी कहना था कि कांग्रेस और सपा जैसे विपक्षी दलों को राम जी के नाम से समस्या है, और यही कारण है कि ये दल 'विकसित भारत-जी-राम-जी' अधिनियम का विरोध कर रहे हैं। मौर्य के अनुसार, यह अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, रोजगार सृजन और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए है, और यह योजना उन विरोधी पार्टियों के लिए परेशानी का कारण बन गई है क्योंकि इसका नाम राम जी से जुड़ा हुआ है। उनका आरोप था कि इन पार्टियों को धर्म से कोई विशेष प्रेम नहीं है, बल्कि उनका विरोध सिर्फ राजनीति तक ही सीमित है।

मौर्य ने सपा के प्रमुख अखिलेश यादव पर भी हमला बोला

इसके अलावा, मौर्य ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर भी हमला बोला। उनका कहना था कि अखिलेश यादव का मानसिक संतुलन 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बिगड़ गया है, और उन्हें इलाज की आवश्यकता है। मौर्य ने यह भी भविष्यवाणी की कि 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की स्थिति और भी खराब हो जाएगी, क्योंकि वे लोगों को गुमराह करने के बावजूद बार-बार चुनाव नहीं जीत सकते।

उत्तर प्रदेश में भाजपा फिर से भारी बहुमत से सरकार बनाएगी

उपमुख्यमंत्री ने भाजपा की आगामी योजनाओं और चुनावी दृष्टिकोण पर भी बात की। उनका कहना था कि 2024 में भाजपा की भारी जीत के बाद अन्य राज्यों में भी पार्टी की स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली और बिहार में भाजपा की जीत का हवाला देते हुए दावा किया कि अब पश्चिम बंगाल में भी पार्टी अपना परचम लहराएगी। उनका यह विश्वास था कि 2027 में उत्तर प्रदेश में भाजपा फिर से भारी बहुमत से सरकार बनाएगी। इस तरह के बयान राजनीतिक रूप से काफी तीखे और आक्रामक हैं, जो न केवल विपक्षी दलों को निशाने पर लेते हैं, बल्कि भाजपा सरकार की नीतियों और विकास को प्रमुखता से प्रस्तुत करने की कोशिश भी करते हैं। मौर्य के इस भाषण में यह स्पष्ट था कि भाजपा अपनी सरकार की उपलब्धियों को उजागर करते हुए विपक्ष की आलोचना करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। क्या आपको लगता है कि इस प्रकार के बयानों से भाजपा को चुनावी लाभ मिल सकता है, या ये केवल एक राजनीतिक रणनीति हैं?

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