उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की विवादित मस्जिद पर तड़के चला बुलडोजर, 4 सितंबर के कोर्ट आदेश के बाद हुई कार्रवाई। जानिए पूरे विवाद और 6.41 करोड़ के क्षतिपूर्ति आदेश की पूरी कहानी।

UP News : उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार 5 सितंबर की सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब दिन निकलने से पहले ही कलेक्ट्रेट परिसर में प्रशासन के बुलडोजर गरजने लगे। तड़के करीब 4 बजे से प्रशासनिक अमला और भारी पुलिस बल मौके पर तैनात हो गया और इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित विवादित मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई। करीब चार बुलडोजरों की मदद से ढांचे को पूरी तरह हटा दिया गया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर पिछले करीब डेढ़ साल से विवाद चल रहा था। प्रशासन और न्यायिक प्रक्रिया में इस जमीन को सरकारी भूमि बताया गया, जबकि मस्जिद से जुड़े पक्ष की ओर से जमीन और मस्जिद के पुराने अस्तित्व को लेकर अलग दावे किए गए। अब अदालत में मस्जिद पक्ष की अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया है। UP News
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मामला सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की उस जमीन से जुड़ा है, जिसे सरकारी रिकॉर्ड में कचहरी और कलेक्ट्रेट के नाम दर्ज बताया गया है। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में चली कार्रवाई में प्रशासन ने दावा किया कि खसरा संख्या 539 की करीब 315 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर मस्जिद का निर्माण किया गया था। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई में उपलब्ध राजस्व रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर निर्माण को अनधिकृत मानते हुए संबंधित पक्षों को परिसर खाली करने का आदेश दिया था। अदालत ने इसके साथ ही सरकारी जमीन के कथित अनधिकृत कब्जे और उपयोग के एवज में 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति वसूलने का आदेश भी दिया था। UP News
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नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने अपने आदेश में संबंधित पक्षों को 30 दिन के भीतर स्वयं कब्जा हटाने का निर्देश दिया था। आदेश में यह भी कहा गया था कि निर्धारित अवधि में परिसर खाली नहीं किया गया तो प्रशासन कानून के तहत बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई कर सकता है। इसके बाद मस्जिद पक्ष की ओर से इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी गई। जिला जज की अदालत में हुई सुनवाई के बाद 4 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा गया। रिपोर्टों के अनुसार, इससे ध्वस्तीकरण का रास्ता साफ हो गया और अगले ही दिन प्रशासन ने कार्रवाई कर दी। UP News
इस पूरे मामले में मस्जिद के अस्तित्व और उसकी पुरातनता को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए। मस्जिद पक्ष की ओर से 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल पेश किए जाने की बात सामने आई, जिसके आधार पर दावा किया गया कि मस्जिद कलेक्ट्रेट परिसर से भी पहले से अस्तित्व में थी। दूसरी ओर प्रशासन की ओर से इस दस्तावेज पर सवाल उठाए गए। अदालत में यह तर्क रखा गया कि सहारनपुर में बिजली की आपूर्ति बाद के वर्षों में शुरू हुई थी और 1 जनवरी 1911 को रविवार होने के कारण उस तारीख के बिजली कनेक्शन पर भी सवाल खड़े होते हैं। इस मामले में दस्तावेजों की प्रामाणिकता विवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। UP News
शनिवार की सुबह कार्रवाई से पहले ही कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासनिक अमला करीब चार बजे मौके पर पहुंच गया था और इसके बाद ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए इलाके में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का उद्देश्य कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा होने से रोकना था। UP News
मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने दावा किया कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए उनके आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया और उन्हें नजरबंद किया गया। अन्य विपक्षी नेताओं ने भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं।वहीं प्रशासन की ओर से कार्रवाई को न्यायिक आदेश के अनुपालन के रूप में बताया गया है। इस घटनाक्रम ने सहारनपुर के पुराने भूमि और धार्मिक स्थल विवाद को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। UP News
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की सख्त कार्रवाई की छवि से जोड़कर बुलडोजर को अक्सर 'बाबा का बुलडोजर' कहा जाता है। सरकार लगातार अवैध कब्जों और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की बात करती रही है। सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद का ध्वस्तीकरण भी इसी संदर्भ में चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि इस मामले में प्रशासन की कार्रवाई सीधे न्यायिक और प्रशासनिक आदेशों की प्रक्रिया के बाद हुई है, इसलिए इसे केवल राजनीतिक नारे के बजाय अदालत के आदेश और सरकारी भूमि से जुड़े विवाद के संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण है। UP News
मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद सहारनपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। मीडिया रिपोर्टों में क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल का उल्लेख किया गया है, हालांकि प्रशासन का प्रयास स्थिति को नियंत्रण में बनाए रखने और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने का है। UP News
इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू केवल मस्जिद का ध्वस्तीकरण नहीं, बल्कि सरकारी जमीन के कथित अनधिकृत कब्जे के एवज में लगाई गई 6.41 करोड़ रुपये से अधिक की क्षतिपूर्ति भी है। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश के मुताबिक सरकारी भूमि के कब्जे और उपयोग के लिए यह राशि निर्धारित की गई थी। जिला अदालत द्वारा सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखे जाने के बाद अब यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। UP News
सहारनपुर की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा में रह सकती है। एक तरफ प्रशासन इसे सरकारी भूमि से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई बता रहा है, वहीं मस्जिद पक्ष और विपक्षी नेता कार्रवाई की प्रक्रिया और धार्मिक स्थल से जुड़े पहलुओं पर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल शनिवार सुबह हुई कार्रवाई के बाद कलेक्ट्रेट परिसर से विवादित ढांचा हटा दिया गया है। अब इस मामले में 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति, आगे की कानूनी चुनौती और प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी। UP News
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