बड़ा सवाल : UGC विवाद में कितनी घिरी है सरकार ?

उत्तर प्रदेश में UGC विवाद को हवा देने का काम पीसीएस (PCS) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के त्याग-पत्र ने किया है। UGC विवाद पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का दावा है कि इस मुद्दे पर केन्द्र सरकार पूरी तरह से घिरती हुई नजर आ रही है।

उत्तर प्रदेश बना UGC विवाद का सेंटर
उत्तर प्रदेश बना UGC विवाद का सेंटर
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar28 Jan 2026 03:56 PM
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UP News : इन दिनों UGC के नए नियमों पर उत्तर प्रदेश से लेकर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है। UGC के मुद्दे पर मचे हुए बवाल का सर्वाधिक असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में UGC विवाद को हवा देने का काम पीसीएस (PCS) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के त्याग-पत्र ने किया है। UGC विवाद पर नजर रखने वाले विश्लेषकों का दावा है कि इस मुद्दे पर केन्द्र सरकार पूरी तरह से घिरती हुई नजर आ रही है।

यूजीसी विवाद - सभी मोर्चों पर घिरती दिखाई दे रही है केंद्र सरकार, जनाक्रोश के सामने कितने टिकेंगे सरकारी दावे

UGC द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को खत्म करने के उद्देश्य से पेश किया बिल अब जन आक्रोश का सबसे बड़ा मुददा बनता नजर आरहा है, जहां केंद्र इसे जातिय भेदभाव को समाप्त करने के लिए अच्छा कदम बता रहा है वही सर्वण समाज इसे अब अपने उपर गलत इरादों से थोपा हुआ बिल बता रहा है, यहां हम इस पूरे विवाद तथा UGC विवाद के पूरे घटनाक्रम को समझने का प्रयास करते हैं, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव (caste-based discrimination) को रोकने के लिए UGC Bill 2026 यानी Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026 को 13 जनवरी 2026 को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया है, यूजीसी के अनुसार यह नया नियम 2012 के पुराने इक्विटी नियमों की जगह लेगा जिसके बाद है, इसे 15 जनवरी 2026 से लागू कर दिया गया, इस बिल को लागू करने का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए कॉलेजों और यूनिवर्सिटियों को अधिक समावेशी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाना बताया जा रहा है, 

जातिय भेदभाव बनाम सर्वण समाज हित के बीच अटका यूजीसी बिल

यूजीसी बिल को लागू करते ही पूरे देश से इसके विरोध में प्रदर्शन आरम्भ हो गये, राजनेता, अधिकारियों एवं सामान्य जनमानस में इसको लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की जा रही है, इसी कड़ी में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा त्यागपत्र देने से इस आंदोलन को जहां तेज धार मिलती दिखाई दे रही है वही कवि कुमार विश्वास द्वारा की गयी मार्मिक अपील भी लोगों को द्रवित करती दिखाई दे रही है, इसी कड़ी में पूर्व राज्य पाल कलराज मिश्र भी विरोध करते नजर आ रहे हैं, उनके द्वारा भी प्रेसवार्ता एवं अन्य माध्यमों से विरोध व्यक्त किया गया है, यूजीसी विवाद पर केंद्र सरकार अब अपने ही लोंगों द्वारा घिरती नजर आ रही है, विरोध का आलम यह है कि भाजपा समर्थकों को कुछ भी बोलते नही बन रहा है। कई लोगों द्वारा प्रधान मंत्री मोदी को रक्त से लिखे पत्र भी भेजे जाने की बात कही जा रही है, वहीं अनेक स्थानों पर बैनरों द्वारा भी लोग विरोध करते नजर आ रहे हैं। 

सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है यूजीसी 2026

UGC के द्वारा 15 जनवरी को नयी गाइडलाइन जारी करते ही इसके विरोध में व्यापक स्तर पर विरोध देखा गया, सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा लिखे गये इसके विरोध में अनेक तरह के स्लोगन भी वॉयरल होते दिखाई दे रहे हैं, कई धर्मगुरुओं द्वारा भी इसका खुलेआम विरोध किया गया, ऐसे में सरकारी तंत्र की ओर से कोई भी ठोस कारण सामने नही रखने से विरोध को गति मिलती दिखाई दी। 

उत्तर प्रदेश में इस्तीफा बना बवाल

UGC के मुददे पर उत्तर प्रदेश में एक इस्तीफा बवाल बन गया। सोमवार को यूजीसी विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के त्याग पत्र ने सनसनी फैलादी, अलंकार अग्निहोत्री द्वारा सरकारी नीतियों, खासकर नए UGC नियमों से गहरे मतभेद का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में लंबे समय से ब्राह्मण विरोधी अभियान चल रहा है। लगातार ब्राह्मण समाज का दमन किया जा रहा है, इसके चलते ही जेल में डिप्टी जेलर ने एक ब्राह्मण को पीट-पीटकर मार डाला, वही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के शिष्यों को बुरी तरह पीटा गया।, उनके अनुसार दूसरा मुद्दा UGC 2026 का नया नियम को देखते हुए उन्होने त्यागपत्र दिया. आरोप ये भी है कि देर रात उन्हें डीएम आवास में बंधक बनाया गया।

सरकार की सफाई, नहीं होगा दुरुपयोग 

इस सारे विवाद और विरोध प्रदर्शन के मध्य केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा बयान जारी किया गया है, श्री प्रधान के अनुसार ये बिल केवल जातिय भेदभाव को खत्म करने के लिए लागू किया गया है. धर्मेंद्र प्रधान का यह आश्वासन तब आया जब देश में कई जगहों पर यूजीसी के नए नियमों का जबरदस्त विरोध हो रहा है, सोशल मीडिया पर यूजीसी का मुद्दा ट्रेंड कर रहा है, इसके अलावा, हाल ही में जारी यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, याचिका में आरोप लगाया गया है कि नियमों में जाति-आधारित भेदभाव की एक गैर-समावेशी परिभाषा अपनाई गई है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत सुरक्षा से बाहर रखा गया है। UP News

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निलंबित अफसर अलंकार अग्निहोत्री को बरेली से बाहर भेजा गया, समर्थकों में भारी आक्रोश

निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को कड़ी सुरक्षा में निजी वाहन के माध्यम से शहर से बाहर ले जाया गया। इस दौरान उनके समर्थकों ने गाड़ी रोकने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें सुरक्षित रूप से वाहन में बैठाकर बाहर ले जाने में सफलता पाई।

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निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को पुलिस ले जाती पुलिस
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar28 Jan 2026 03:36 PM
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UP News : बुधवार दोपहर बरेली से निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री को कड़ी सुरक्षा में निजी वाहन के माध्यम से शहर से बाहर ले जाया गया। इस दौरान उनके समर्थकों ने गाड़ी रोकने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें सुरक्षित रूप से वाहन में बैठाकर बाहर ले जाने में सफलता पाई। समर्थकों ने बाद में रामपुर मार्ग पर सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

हाउस अरेस्ट का आरोप

अलंकार ने सुबह मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें उनके सरकारी आवास में ही रहने को कहा गया और बाहरी दुनिया से संपर्क सीमित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके आवास में अनावश्यक रूप से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, जिससे उनकी निजता का हनन हो रहा है।

प्रशासन का जवाब

एडीएम सिटी सौरभ दुबे ने कहा कि अफसर को हाउस अरेस्ट नहीं किया गया है। सुरक्षा कारणों से आवासीय परिसर में प्रवेश सीमित रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाउस अरेस्ट का दावा गलत और निराधार है। गणतंत्र दिवस के बाद अलंकार ने इस्तीफा देने की घोषणा की थी और सरकार की कुछ नीतियों पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद उन्होंने डीएम आवास में 45 मिनट तक बंधक बनाए जाने का आरोप लगाया, जिसे डीएम ने पूरी तरह खारिज कर दिया। देर रात उन्हें निलंबित कर शामली कलेक्टर कार्यालय में अटैच किया गया। इस मामले की जांच मंडलायुक्त बरेली को सौंपी गई है। अलंकार ने व्हाट्सएप पर लिखा कि वे एडीएम कंपाउंड में हाउस अरेस्ट में हैं और बाहरी संपर्क केवल मोबाइल के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने उच्च न्यायालय और संबंधित अधिकारियों को सूचित करने की बात भी कही।

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उत्तर प्रदेश के अलंकार से कोई रिश्ता नहीं है IPS के इस्तीफे का

दावा यह किया गया कि उत्तर प्रदेश के PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री की तरह से ही IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी ने भी यूजीसी (UGC) के नियमों के विरोध में त्याग-पत्र दे दिया है।

IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी
IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar28 Jan 2026 03:18 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का त्याग-पत्र बड़ी बहस का विषय बना हुआ है। इस बीच सोशल मीडिया पर IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी का इस्तीफा भी खूब वायरल हुआ। दावा यह किया गया कि उत्तर प्रदेश के PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री की तरह से ही IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी ने भी यूजीसी (UGC) के नियमों के विरोध में त्याग-पत्र दे दिया है। बारीकी से जांच पड़ताल करने पर पता चला है कि उत्तर प्रदेश के PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के त्याग-पत्र से IPS अभिषेक तिवारी के त्याग-पत्र का कोई रिश्ता नहीं है।

पूरी तरह से झूठ है IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी के इस्तीफे की खबर

आपको बता दें कि IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी के इस्तीफे की खबर पूरी तरह से झूठ है। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने अभिषेक तिवारी के इस्तीफे की खबर को उत्तर प्रदेश के PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री के त्याग-पत्र की खबर के साथ जोड़क प्रचारित किया है। IPSअधिकारी अभिषेक तिवारी मध्य प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी हैं। IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी का UGC के नियमों के विरोध में इस्तीफा देने का समाचार सरासर झूठा समाचार है।

सच क्या है IPS अभिषेक तिवारी के विषय में

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी का मामला उत्तर प्रदेश के PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री से दूर-दूर तक मेल नहीं खाता है। दरअसल IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी ने UGC के विरोध में इस्तीफा नहीं दिया है। IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी कि VRS लेने का फैसला किया है। VRS लेने के पीछे IPS अभिषेक तिवारी ने कारण भी स्पष्ट कर दिया है। VRS के पीछे का कारण बताते हुए IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी ने बताया कि वें IPS की नौकरी छोडक़र एक फ्री लांसर साइबर टेक्रोलॉजी एक्सपर्ट बनने जा रहे हैं। IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी तथा उनके परिवार वालों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके इस्तीफे का UGC के मुद्दे से कुछ भी लेना-देना नहीं है।कौन हैं IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी ?

अभिषेक तिवारी मूल रूप से मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के रहने वाले हैं। 6 अप्रैल 1984 को उनका जन्‍म हुआ. जबलपुर से इंजीनियरिंग करने के बाद फाइनेंस से PG डिप्लोमा किया। मुंबई में मैनेजमेंट कंपनी में दो साल तक काम भी किया। 2012 में UPSC क्लियर कर 2013 बैच के IPS अधिकारी बने। बतौर SP पहली पोस्टिंग बालाघाट में हुई। यहां उन्हें अपने कामों के लिए राष्ट्रपति से वीरता पदक भी मिला. वो रतलाम, बालाघाट और सागर में एसपी रह चुके हैं। अभी वो नेशनल टेक्निकल रिसर्च आर्गेनाइजेशन (NTRO) में पदस्थ हैं। IPS अधिकारी अभिषेक तिवारी के VRS को उत्तर प्रदेश के PCS अधिकारी अलंकार अग्रिहोत्री के त्याग-पत्र से जोडऩे की खबरें केवल सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अफवाहों से अधिक कुछ भी नहीं है। UP News



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