
UP News : उत्तर प्रदेश के वाराणसी की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जिला एवं सत्र न्यायधीश एके विशेष 31 जनवरी बुधवार को रिटायर हो गए हैं। अपने रिटायरमेंट के अंतिम दिन उन्होंने एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसके कारण उन्हें पूरे देश में सुर्खियां अर्जित की है। उनके द्वारा दिया गया यह फैसला अब इतिहास में दर्ज हो चुका है। रिटायर हुए जिला एवं सत्र न्यायधीश एके विश्वेश ने आखिर क्या फैसला सुनाया है कि उनकी देशभर में चर्चा हो रही है।
जैसा कि आप जानते हैं कि वाराणसी की ज्ञानवापी (Gyanvapi) मस्जिद को लेकर कोर्ट में केस चल रहा है। ज्ञानवापी के व्यास जी तहखाने में पूजा करने का अधिकार करने को लेकर एक वाद वाराणसी की जिला जज में चल रहा था और इसकी सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायधीश एके विश्वेश कर रहे थे। 31 जनवरी 2024 को श्री एके विश्वेश का सेवाकाल का अंतिम दिन था। उन्होंने रिटायर हो वाले दिन ही ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। उन्होंने ने ही एएसआई (ASI) सर्वे का आदेश दिया था। अब ज्ञानवापी परिसर में मौजूद व्यास जी के तहखाने में पूजा पाठ का भी आदेश दिया है।
इस आदेश को देने के बाद जिला जज एके विश्वेश रिटायर हो गए हैं। उन्होंने ज्ञानवापी परिसर के तहखाने में पूजा का अधिकार व्यास परिवार को फिर से सौंपने का निर्णय दिया है। अपने इस निर्णय के बाद वह अयोध्या जैसे ऐतिहासिक निर्णय देने वाले जजों की सूची में अपना नाम दर्ज करा दिया है।
आपको बता दें कि वाराणसी जिला जज की अदालत में वर्ष 2016 में व्यास परिवार ने ज्ञानवापी के व्यासजी के तहखाने में पूजा करने की इजाजत दिए जाने संबंधी याचिका दाखिल की थी। इस पर जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में 30 जनवरी को ही दोनों पक्षों की बहस पूरी हुई थी। वाराणसी में जिला जज बनने से पहले श्री एके विश्वेश यूपी के कई न्यायिक पदों पर रह चुके हैं। ज्ञानवापी केस की सुनवाई करने के साथ ही उनका नाम चर्चा में आ गया। जिला जज के तौर पर श्री विश्वेश की वाराणसी में तैनाती 21 अगस्त 2021 को हुई थी।
वाराणसी की जिला अदालत के फैसले के 9 घंटे बाद ही लोहे के बाड़ हटा दिए गए। बुधवार की रात पूजा की शुरुआत कर दी गई। गुरुवार की रात 12 बजे पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में विश्वनाथ मंदिर की तरफ से, जहां बड़े नंदी विराजमान हैं, उनके ठीक सामने बैरीकेडिंग को खोलकर तहखाना जाने का रास्ता बनाया गया। कोर्ट का आदेश के बाद वाराणसी प्रशासन ने देर रात तहखाने के भीतर पूजा आदि की व्यवस्था को काशी विश्वनाथ ट्रस्ट को सौंप दिया। विश्वनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी ओम प्रकाश मिश्रा और अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा का शुभ मुहूर्त निकालने वाले गणेश्वर द्रविड़ ने ब्यास जी के तहखाने में पूजा कराई।