ईरान युद्ध के कारण उत्तर प्रदेश के व्यापारियों को हुआ बड़ा नुकसान
उत्तर प्रदेश के व्यापारियों ने आशंका जताई है कि यदि ईरान का युद्ध अधिक लम्बा खिंच गया तो बहुत सारे व्यापारियों का व्यापार पूरी तरह से चौपट हो जाएगा। व्यापारियों ने अपील की है कि ईरान, अमेरिका तथा इजरायल को बातचीत करके युद्ध समाप्त करने का मार्ग निकालना चाहिए।

UP News : ईरान के साथ चल रहे अमेरिका तथा इजरायल के युद्ध ने उत्तर प्रदेश के व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान युद्ध के कारण उत्तर प्रदेश के व्यापारियों को बड़ा नुकसान हुआ है। उत्तर प्रदेश के व्यापारियों ने आशंका जताई है कि यदि ईरान का युद्ध अधिक लम्बा खिंच गया तो बहुत सारे व्यापारियों का व्यापार पूरी तरह से चौपट हो जाएगा। व्यापारियों ने अपील की है कि ईरान, अमेरिका तथा इजरायल को बातचीत करके युद्ध समाप्त करने का मार्ग निकालना चाहिए।
उत्तर प्रदेश के व्यापारियों के 6 हजार करोड़ रूपए लगे हैं दांव पर
ईरान युद्ध का सीधा असर उत्तर प्रदेश के निर्यात करने वाले व्यापारियों के ऊपर पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश का सालाना कुल निर्यात लगभग 1.86 लाख करोड़ तक पहुंच मां चुका है, जिसमें खाड़ी देशों की हिस्सेदारी सीमित लेकिन अहम है। निर्यातकों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष लंबा खिंचता है तो लॉजिस्टिक लागत, ऑर्डर और भुगतान चक्र प्रभावित हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक निर्यात संयुक्त अरब अमीरात को होता है। व्यापार आंकड़ों के अनुसार राज्य से यूएई को सालाना लगभग 5,000 से 6,000 करोड़ के उत्पाद भेजे जाते हैं। यह यूपी के कुल निर्यात का 5-6 प्रतिशत हिस्सा है। चर्म निर्मात परिषद के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष जावेद इकबाल के मुताबिक यूएई को मुख्य रूप से रेडीमेड गारमेंट्स, चमड़ा और लेदर उत्पाद (कानपुर क्लस्टर), बासमती चावल, हैंडीक्राफ्ट (मुरादाबाद पीतल उत्पाद) और इलेक्ट्रॉनिक सामान निर्यात किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त सऊदी, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन को भी यूपी से कृषि उत्पाद, मोट उत्पाद इंजीनियरिंग सामान और निर्माण सामग्री भेजी जाती है।
दो तरफा असर पड़ेगा उत्तर प्रदेश के निर्यात पर
- फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपर्ट एके श्रीवास्तव ने कहा कि पश्चिम में तनाव पदि लंबा खिंचाता है तो उत्तर प्रदेश के वित पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यकामा पड सकता है। आशंका है कि क्षेत्र में रहने पर यूपी के कुल तिर्मात में 3 से प्रतिशत अस्थायी गिरावट आ सकती है।
- तनाव 1-2 महीने में सामान्य हुआ तो शिपिंग लागत 5-7 प्रतिशत बढ़ेगी। ऑर्डर अस्थायी रूप से धीमे होने पर निर्यात पर 2-3 प्रतिशत प्रभाव।
- तनाव 6 माह तक जारी रहा तो समुद्री बीमा व मालभाड़ा 10-20 प्रतिशत महंगा होगा। छोटे निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा घटेगी और निर्यात में 5-8 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। भुगतान चक्र 30-60 दिन तक खिंच सकता है।
- तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हुआ तो परिवहन लागत बढऩे से उत्पादन लागत 4-6 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। एमएसएमई सेक्टर पर गंभीर दबाव होगा। UP News
UP News : ईरान के साथ चल रहे अमेरिका तथा इजरायल के युद्ध ने उत्तर प्रदेश के व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। ईरान युद्ध के कारण उत्तर प्रदेश के व्यापारियों को बड़ा नुकसान हुआ है। उत्तर प्रदेश के व्यापारियों ने आशंका जताई है कि यदि ईरान का युद्ध अधिक लम्बा खिंच गया तो बहुत सारे व्यापारियों का व्यापार पूरी तरह से चौपट हो जाएगा। व्यापारियों ने अपील की है कि ईरान, अमेरिका तथा इजरायल को बातचीत करके युद्ध समाप्त करने का मार्ग निकालना चाहिए।
उत्तर प्रदेश के व्यापारियों के 6 हजार करोड़ रूपए लगे हैं दांव पर
ईरान युद्ध का सीधा असर उत्तर प्रदेश के निर्यात करने वाले व्यापारियों के ऊपर पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश का सालाना कुल निर्यात लगभग 1.86 लाख करोड़ तक पहुंच मां चुका है, जिसमें खाड़ी देशों की हिस्सेदारी सीमित लेकिन अहम है। निर्यातकों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष लंबा खिंचता है तो लॉजिस्टिक लागत, ऑर्डर और भुगतान चक्र प्रभावित हो सकते हैं। उत्तर प्रदेश से सबसे अधिक निर्यात संयुक्त अरब अमीरात को होता है। व्यापार आंकड़ों के अनुसार राज्य से यूएई को सालाना लगभग 5,000 से 6,000 करोड़ के उत्पाद भेजे जाते हैं। यह यूपी के कुल निर्यात का 5-6 प्रतिशत हिस्सा है। चर्म निर्मात परिषद के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष जावेद इकबाल के मुताबिक यूएई को मुख्य रूप से रेडीमेड गारमेंट्स, चमड़ा और लेदर उत्पाद (कानपुर क्लस्टर), बासमती चावल, हैंडीक्राफ्ट (मुरादाबाद पीतल उत्पाद) और इलेक्ट्रॉनिक सामान निर्यात किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त सऊदी, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन को भी यूपी से कृषि उत्पाद, मोट उत्पाद इंजीनियरिंग सामान और निर्माण सामग्री भेजी जाती है।
दो तरफा असर पड़ेगा उत्तर प्रदेश के निर्यात पर
- फेडरेशन आफ इंडियन एक्सपर्ट एके श्रीवास्तव ने कहा कि पश्चिम में तनाव पदि लंबा खिंचाता है तो उत्तर प्रदेश के वित पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यकामा पड सकता है। आशंका है कि क्षेत्र में रहने पर यूपी के कुल तिर्मात में 3 से प्रतिशत अस्थायी गिरावट आ सकती है।
- तनाव 1-2 महीने में सामान्य हुआ तो शिपिंग लागत 5-7 प्रतिशत बढ़ेगी। ऑर्डर अस्थायी रूप से धीमे होने पर निर्यात पर 2-3 प्रतिशत प्रभाव।
- तनाव 6 माह तक जारी रहा तो समुद्री बीमा व मालभाड़ा 10-20 प्रतिशत महंगा होगा। छोटे निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा घटेगी और निर्यात में 5-8 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। भुगतान चक्र 30-60 दिन तक खिंच सकता है।
- तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हुआ तो परिवहन लागत बढऩे से उत्पादन लागत 4-6 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। एमएसएमई सेक्टर पर गंभीर दबाव होगा। UP News












