कमजोरों के केस अटके, UGC पर स्टे…चंद्रशेखर भड़के, आज बनाएंगे रणनीति
चंद्रशेखर ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि 69,000 शिक्षक भर्ती से जुड़े विवाद और कथित अनियमितताओं पर लंबे समय से निर्णय लंबित रहने की चर्चा होती रही है।

UP News : उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने UGC की नई नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। चंद्रशेखर का कहना है कि कमजोर वर्गों से जुड़े कई अहम मामले अदालतों में लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन UGC से जुड़े मामले में तेजी से सुनवाई और आदेश ने सवाल खड़े कर दिए हैं। चंद्रशेखर ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि 69,000 शिक्षक भर्ती से जुड़े विवाद और कथित अनियमितताओं पर लंबे समय से निर्णय लंबित रहने की चर्चा होती रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़ा वर्ग आरक्षण जैसे मुद्दों पर अन्य राज्यों के मामलों में भी सुनवाई की रफ्तार धीमी दिखती है, जबकि UGC के मामले में तुरंत कदम उठ गया।
हम चुप नहीं बैठेंगे - चंद्रशेखर
टीवी चैनलों से बातचीत में चंद्रशेखर ने कहा कि UGC के मुद्दे पर वह शुरुआत से अपनी बात खुलकर रखते आए हैं। अब उन्होंने संकेत दिया है कि आज उत्तर प्रदेश में पार्टी स्तर पर बैठक बुलाकर आगे की राजनीतिक-सामाजिक रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया “हम चुप नहीं बैठेंगे। आगे आंदोलन की दिशा तय होगी। चंद्रशेखर का तर्क है कि UGC की नई व्यवस्था को लेकर अभी कोई कमेटी/प्रक्रिया पूरी तरह आकार नहीं ले पाई, और न ही किसी मामले में किसी के खिलाफ कार्रवाई जैसी स्थिति सामने आई थी।
फैक्ट्स रखते तो फैसला अलग होता - चंद्रशेखर
चंद्रशेखर ने कहा कि वह एक अधिवक्ता हैं और सर्वोच्च न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके अनुसार यह आदेश सरकार की कमजोर पैरवी का नतीजा भी हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि अगर सरकार तथ्यों और सामाजिक हकीकत को मजबूती से रखती - जैसे SC-ST-OBC छात्रों के साथ भेदभाव से जुड़ी रिपोर्टें/आंकड़े तो स्थिति अलग हो सकती थी। चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि इस तरह के आदेश से समाज में गलत संदेश जाता है और आशंका पैदा होती है कि जातीय भेदभाव को मान्यता मिलने जैसी धारणा बन सकती है। उन्होंने रोहित वेमुला, पायल तड़वी और अन्य चर्चित मामलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि कमजोर वर्गों के छात्रों की सुरक्षा पर देश कब निर्णायक कदम उठाएगा। UP News
UP News : उत्तर प्रदेश की नगीना लोकसभा सीट से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने UGC की नई नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। चंद्रशेखर का कहना है कि कमजोर वर्गों से जुड़े कई अहम मामले अदालतों में लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन UGC से जुड़े मामले में तेजी से सुनवाई और आदेश ने सवाल खड़े कर दिए हैं। चंद्रशेखर ने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि 69,000 शिक्षक भर्ती से जुड़े विवाद और कथित अनियमितताओं पर लंबे समय से निर्णय लंबित रहने की चर्चा होती रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछड़ा वर्ग आरक्षण जैसे मुद्दों पर अन्य राज्यों के मामलों में भी सुनवाई की रफ्तार धीमी दिखती है, जबकि UGC के मामले में तुरंत कदम उठ गया।
हम चुप नहीं बैठेंगे - चंद्रशेखर
टीवी चैनलों से बातचीत में चंद्रशेखर ने कहा कि UGC के मुद्दे पर वह शुरुआत से अपनी बात खुलकर रखते आए हैं। अब उन्होंने संकेत दिया है कि आज उत्तर प्रदेश में पार्टी स्तर पर बैठक बुलाकर आगे की राजनीतिक-सामाजिक रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया “हम चुप नहीं बैठेंगे। आगे आंदोलन की दिशा तय होगी। चंद्रशेखर का तर्क है कि UGC की नई व्यवस्था को लेकर अभी कोई कमेटी/प्रक्रिया पूरी तरह आकार नहीं ले पाई, और न ही किसी मामले में किसी के खिलाफ कार्रवाई जैसी स्थिति सामने आई थी।
फैक्ट्स रखते तो फैसला अलग होता - चंद्रशेखर
चंद्रशेखर ने कहा कि वह एक अधिवक्ता हैं और सर्वोच्च न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके अनुसार यह आदेश सरकार की कमजोर पैरवी का नतीजा भी हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि अगर सरकार तथ्यों और सामाजिक हकीकत को मजबूती से रखती - जैसे SC-ST-OBC छात्रों के साथ भेदभाव से जुड़ी रिपोर्टें/आंकड़े तो स्थिति अलग हो सकती थी। चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि इस तरह के आदेश से समाज में गलत संदेश जाता है और आशंका पैदा होती है कि जातीय भेदभाव को मान्यता मिलने जैसी धारणा बन सकती है। उन्होंने रोहित वेमुला, पायल तड़वी और अन्य चर्चित मामलों का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि कमजोर वर्गों के छात्रों की सुरक्षा पर देश कब निर्णायक कदम उठाएगा। UP News












