परिवार से संपर्क पूरी तरह खत्म होने की वजह से वह कोई कागज़ दिखा नहीं पाई। ऐसे में SIR से जुड़ी कार्रवाई फिलहाल रोकनी पड़ी और संबंधित BLO ने अगली बार दस्तावेज़ तैयार रखने की हिदायत देकर फाइल आगे बढ़ाने से मना कर दिया।

UP News : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) की रफ्तार तेज है। घर–घर पहुंच रहे बीएलओ (BLO) लोगों से गणना प्रपत्र भरवा रहे हैं, ताकि हर मतदाता का डेटा अपडेट किया जा सके। लेकिन इसी बीच उत्तर प्रदेश की वे महिलाएं, जो घर से भागकर प्रेम विवाह कर चुकी हैं, अब एक नई दुविधा में फंस गई हैं। जिन परिवारों से रिश्ता तोड़कर उन्होंने नई जिंदगी शुरू की थी, अब वही मायके वाले SIR से जुड़े दस्तावेज़ देने से साफ इंकार कर रहे हैं।
मतदाता सूची सुधारने के लिए चल रहे SIR अभियान में उत्तर प्रदेश से लेकर राजस्थान तक ऐसे कई केस सामने आए हैं, जहां प्रेम विवाह करके ससुराल में बस चुकी महिलाओं के सामने पहचान से जुड़े दस्तावेज़ जुटाना बड़ी चुनौती बन गया है। कई मामलों में महिलाओं के मायके वाले न सिर्फ बात करने से बच रहे हैं, बल्कि पिता का नाम, पुरानी वोटर लिस्ट या पहचान पत्र से जुड़ी कोई जानकारी देने को भी तैयार नहीं हैं। नतीजतन, उत्तर प्रदेश की इन विवाहित महिलाओं के सामने अपना गणना फार्म सही–सही भरना भारी पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के चमनगंज इलाके से ऐसा ही एक मामला सामने आया। यहां की एक युवती ने प्रेम प्रसंग के चलते अपने परिवार से पूरी तरह नाता तोड़ लिया था। युवती को हमीरपुर के एक युवक से प्यार हुआ, परिवार ने शादी से इनकार कर दिया, तो उसने उत्तर प्रदेश ही के इस युवक के साथ भागकर कोर्ट मैरिज कर ली और ससुराल में बस गई। प्रेम कहानी तो अपने अंजाम तक पहुंच गई, लेकिन अब SIR की बारी आई तो मुश्किल खड़ी हो गई। मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया के तहत युवती से पिता की पहचान, पुराने पहचान पत्र और रिकॉर्ड से जुड़ी डिटेल मांगी गई। परिवार से संपर्क पूरी तरह खत्म होने की वजह से वह कोई कागज़ दिखा नहीं पाई। ऐसे में SIR से जुड़ी कार्रवाई फिलहाल रोकनी पड़ी और संबंधित BLO ने अगली बार दस्तावेज़ तैयार रखने की हिदायत देकर फाइल आगे बढ़ाने से मना कर दिया।
दूसरा मामला भी उत्तर प्रदेश से ही जुड़ा है। कानपुर के किदवई नगर में रहने वाला एक युवक नोएडा में नौकरी करता था। वहीं उसकी मुलाकात राजस्थान की एक युवती से हुई और दोनों के बीच प्रेम संबंध शुरू हो गए। लड़के के उत्तर प्रदेश वाले परिजन तो शादी के लिए राजी हो गए, लेकिन लड़की के राजस्थान स्थित परिवार ने साफ मना कर दिया। लड़की ने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर युवक से शादी की और कानपुर में ससुराल वालों के साथ रहने लगी। अब SIR के दौरान जब उत्तर प्रदेश के कानपुर में उसके ससुराल पर BLO पहुंचे और गणना फार्म भरने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो पता चला कि लड़की के पास अपने पिता और मायके की पुरानी वोटर आईडी व 2003 की मतदाता सूची से जुड़े विवरण नहीं हैं।
परिवार से बात करने का रास्ता बंद होने पर उसने अपने मायके के पड़ोसियों से संपर्क साधकर जरूरी जानकारी जुटाने की कोशिश शुरू की, ताकि उत्तर प्रदेश में ही उसका नाम मतदाता सूची में सही ढंग से दर्ज हो सके।
राजस्थान के उदयपुर में रहने वाले राहुल ने वंदना से प्रेम विवाह किया। शादी के बाद वंदना का अपने मायके आना–जाना पूरी तरह बंद हो गया। जब मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का गणना फार्म भरने की बारी आई तो वंदना ने पहचान संबंधी दस्तावेज़ मांगे, लेकिन मायकेवालों ने देने से साफ इंकार कर दिया। इस बीच उत्तर प्रदेश से जुड़े उदाहरणों को देखते हुए उदयपुर का प्रशासन भी ऐसे मामलों को संवेदनशीलता से लेने की बात कह रहा है। BLO के समझाने और आग्रह के बाद राहुल ने अपने और पत्नी दोनों के गणना फॉर्म भरकर जमा करा दिए, ताकि कम से कम प्रक्रिया शुरू हो सके और आगे प्रशासन की मदद से दस्तावेज़ पूरे किए जा सकें।
इन तमाम मामलों ने यह साफ कर दिया है कि प्रेम विवाह कर मायके से रिश्ता तोड़ चुकी कई युवतियां अब SIR के भंवर में फंस गई हैं। उत्तर प्रदेश की ऐसी महिलाएं, जिनके माता–पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, या जो पति से अलग रह रही हैं, या जिनके मायके वाले सामाजिक दबाव के कारण कोई मदद नहीं कर रहे, उनके सामने पहचान से जुड़े दस्तावेज़, EPIC नंबर, पुराने बूथ नंबर और मतदाता सूची की जानकारी जुटाना और भी मुश्किल हो गया है। परिणाम यह है कि उत्तर प्रदेश जैसी बड़ी आबादी वाले राज्य में भी इन महिलाओं को मतदाता के बुनियादी अधिकार को सुरक्षित रखने के लिए अफसरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। UP News