गेहूं की ऐसी वेरायटी जो कम समय में देगी पैदावार, जाने कौन सी हैं
कई ऐसे देश हैं जो खेती किसानी को प्रधानता देते हैं ऐसे देशों में भारत की भी गणना होती है।
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भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 10:05 AM
Uttar Pradesh News मऊ। कई ऐसे देश हैं जो खेती किसानी को प्रधानता देते हैं ऐसे देशों में भारत की भी गणना होती है। कृषि प्रधान देश होने के कारण यहां बड़े पैमाने पर कृषि का कार्य होता है, और भारत की समस्त जनसंख्या का एक बड़ा भाग खेती किसानी करता है और अपने जीवन यापन के साथ और को भी खाद्न्न आपूर्ति करता है। पहले जब प्राकृतिक या अन्य कारणों से किसान गेहूं की बुवाई समय से नहीं कर पाते थे तो उस बार उन्हें गेहूं की पैदावार कम होने का खामियाजा भुगतना पड़ता था लेकिन अब हमारे वैज्ञानिकों ने गेहूं की ऐसी किस्में तैयार कर दी हैं जिन्हें लेट बुवाई करने पर भी हमें अच्छी फसल जल्द ही मिल जाती है और पैदावार भी बेहतर हो जाता है। जो किसानों के लिए भायदेमंद साबित होता है।
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गेहूं की लेट वेरायटी जो है किसानों के लिए फायदेमंद
आइए जानते हैं कि गेहूं की वो कौन सी वेरायटी है जिसे किसान किसी कारण से गेहूं की बोवाई लेट हो जाने के कारण उस वेरायटी की गेहूं को बोकर अच्छा लाभ और पैदावार ले सकते हैं। इनमें गेहूं की एक लेट वेरायटी है हलना K-68, जिसे किसान जनवरी के पहले सप्ताह तक बुवाई कर सकते हैं। पैदावार भी प्रति हेक्टेयर 35-40 कुंतल होती है। मऊ के कृषि उपनिदेशक सत्येंद्र सिंह चौहान के अनुसार अगर हम गेंहू की इस वैरायटी को बोते हैं, तो हमें समय से बोए गए गेंहू के बराबर ही पैदावार मिल सकती है। कृषि उपनिदेशक ने बताया कि ये कम समय में होने वाली गेहूं की एक लेट वैरायटी है। इसको हम 15 दिसंबर से लेकर जनवरी के पहले सप्ताह तक बो सकते हैं।
किसानों को राहत
किसानों को पहले हमेशा ही विभिन्न प्राकृतिक आदि कारणों जब गेहूं आदि की बुवाई लेट हो जाती थी तो उन्हें उसका खामियाजा भुगतना पड़ता था। या तो पैदावार बहुत कम होती थी या बहुत लेट हो जाने पर उसकी बुवाई आदि का खर्च इतना बढ़ जाता था कि वो कम पैदावार नुकसान का कारण ही बनता था, जिससे किसान हमेशा परेशान ही रहता था। लेकिन अब गेहूं की लेट वेरायटी आ जाने से किसानों को बड़ी राहत मिली है। अब किसान बुवाई लेट होने के बाद भी पहले जितना या उससे भी ज्यादा पैदावार लेकर राहत की सांस ले रहे हैं।
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