वाराणसी से शुरू हो रहा है एक अनोखा आंदोलन, भगवान राम के नाम पर हुआ शुरू
भारत
चेतना मंच
27 Nov 2025 07:40 AM
Uttar Pradesh News : उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा प्रदेश है। उत्तर प्रदेश में स्थित वाराणसी शहर को भारत की आध्यात्मिक तथा सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है। अब उत्तर प्रदेश के इसी वाराणसी शहर से एक अनोखा आंदोलन शुरू हो रहा है। उत्तर प्रदेश से शुरू होने वाले आंदोलन को पूरे देश में फैलने की योजना बनाई गई है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी नगर से शुरू हो रहे इस आंदोलन का मकसद भारत में संयुक्त परिवार (जॉइंट फैमिली) की मान्यता को मजबूत करके संयुक्त परिवारों को बढ़ाना है।
बना है नया संगठन
उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर को बनारस तथा काशी के नाम से भी जाना जाता है। उत्तर प्रदेश की इसी प्रसिद्ध बनारस नगरी में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) स्थापित है। बीएचयू के इतिहास विभाग में प्रोफेसर के तौर पर कार्यरत प्रोफेसर डॉक्टर राजीव श्रीवास्तव की अगुवाई में रामपंथ के नाम से एक खास संगठन बनाया गया है। रामपंथ के मुखिया प्रोफेसर डॉ राजीव श्रीवास्तव का सपना है कि पूरे देश में संयुक्त परिवार की सोच को और मजबूत करने के इरादे से एक बड़ा ही अनोखा अभियान शुरू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत पूरे भारत में भगवान श्रीराम के परिवार के मंदिर स्थापित करके संयुक्त परिवार का प्रचार प्रसार किया जाएगा साथ ही संयुक्त परिवार आदर्श परिवार भी बने इस बात का भी अभियान चलाया जाएगा। धीरे-धीरे इस अभियान को पूरी दुनिया में फैलाया जाएगा।
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हर गांव में बनेगा श्री राम परिवार का मंदिर
रामपंथ के संस्थापक प्रोफेसर डॉ राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि वाराणसी से शुरू हो रहे आंदोलन की शुरुआत कर दी गई है। उन्होंने बताया कि देश के गांव-गांव में श्रीराम परिवार का मंदिर स्थापित होगा। मंदिर में दर्शन के लिए जाति और धर्म की कोई बाध्यता नहीं होगी। सबसे खास बात यह है कि देश भर में स्थापित होने वाले श्रीराम परिवार मंदिर का मुख्यालय श्रीराम संबंध मंदिर बनारस के लमही में ही बन रहा है। श्रीराम परिवार मंदिर में आदिवासी, दलित, महिला व किन्नर पुजारी होंगे। पुजारी बनने के लिए इन्हें बस भगवान राम के दर्शन करने होंगे और उनके नाम की दीक्षा लेनी होगी। भारत के सांस्कृतिक मूल्यों को स्थापित करने के लिए संयुक्त परिवार को जोडऩे के लिए गांव-गांव में श्रीराम परिवार मंदिर की स्थापना की योजना रामपंथ ने तैयार की है। श्रीराम परिवार मंदिर में भगवान राम-सीता, लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी, शत्रुघ्न- श्रुतिकीर्ति और हनुमान जी की प्रतिमाएं स्थापित होंगी। इन मंदिरों में दलित, आदिवासी, महिला और किन्नर पुजारी के रूप में नियुक्त किए जाएंगे। पहले चरण में पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 1100 दलित, आदिवासी, है। किन्नर और महिलाओं को पुजारियों के रूप में दीक्षित किया जाएगा।
इन सभी की नियुक्ति देश भर में बनने वाले श्रीराम परिवार मंदिरों में बतौर पुजारी की जाएगी। रामचरित मानस को केंद्र में रखकर राम नाम जप से ही पूजा, पाठ और - अनुष्ठान होंगे। श्रीराम परिवार मंदिर की स्थापना पहले चरण में सोनभद्र, बनारस, जौनपुर ओर अमेरिका के कंसास शहर में होगी। रामपंथ के प्रमुख डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि जाति, धर्म और पंथ से ऊपर उठकर श्रीराम परिवार मंदिर स्थापित करने की योजना तैयार स की गई है। इसमें महिला, पुरुष और किन्नर कोई भी राम नाम की दीक्षा और भगवान राम का दर्शन करके पुजारी बन सकता है। भारत के गांव-गांव में श्रीराम मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही श अमेरिका और यूरोपीय देशों में भी इन मंदिरों और को स्थापित करने की योजना है। बीएचयू में में इतिहास विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजीव नौर श्रीवास्तव ने बताया कि टूटते संयुक्त परिवार ना को बचाने के लिए श्रीराम परिवार मंदिर की और कार्ययोजना तैयार की गई है। Uttar Pradesh News