Friday, 24 May 2024

Religious News: परिवर्तनी एकादशी का महत्व

हिंदू पुराणों के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को हमारी भारतीय संस्कृति में परिवर्तनी एकादशी कहा जाता…

Religious News: परिवर्तनी एकादशी का महत्व

हिंदू पुराणों के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को हमारी भारतीय संस्कृति में परिवर्तनी एकादशी कहा जाता है। बता दें कि इस दिन भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं की माने तो भगवान विष्णु जब योग निद्रा में होते हैं तो इस भाद्रपद शुक्ल की एकादशी को अपनी करवट बदलते हैं। इसी कारण से एकादशी को परिवर्तनी एकादशी कहा जाता है।
परिवर्तनी एकादशी को वामन एकादशी या फिर जयंती एकादशी भी कहते हैं। जैसे कि हिंदू धर्म के अनुसार भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से योग निद्रा प्राप्त कर लेते हैं और इसी के बाद चौमासा शुरू हो जाता है। बता दें कि इस समय चौमासा लगा हुआ है।

भगवान विष्णु अपनी योग निद्रा से देवउठनी एकादशी को जागते हैं। जिसके बाद विवाह,मुंडन, लगन जैसे शुभ व मांगलिक कार्य शुरू होते हैं। चौमासे या फिर चातुर्मास में हिंदू धर्म के अनुसार शुभ व मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है।

बता दें कि इस बार भाद्रपद एकादशी 16 सितंबर के दिन गुरुवार से प्रारंभ हो रही है। 16 सितंबर सुबह 09:36 बजे से शुरू होकर 17 सितंबर दिन शुक्रवार को सुबह 08:07 बजे खत्म हो जाएगी। हिंदू धर्म में व्रत रखने के लिए उदया तिथि की मान्यता है। इसलिए परिवर्तनी एकादशी व्रत 17 सितंबर शुक्रवार के दिन रखा जाएगा।

जो भी भक्त 17 सितंबर को इस एकादशी का व्रत रखना चाहते हैं वह व्रत को पूर्ण अगले दिन 18 सितंबर को ही करें। 18 सितंबर दिन शनिवार को सुबह 6:07 से सुबह 6:54 के बीच में अपना व्रत पूर्ण कर लें। बता दें कि इस दिन द्वादशी तिथि सुबह 6:54 पर खत्म हो जाएगी इसलिए आप इससे पहले ही अपना व्रत पूर्ण कर ले। जानकारी के अनुसार बता देंगे एकादशी व्रत को द्वादशी तिथि के समापन से पहले ही इसका पारण कर देना चाहिए।

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार जो भी व्यक्ति या जो भी भक्त इस परिवर्तनी एकादशी को सच्चे मन से व्रत रखता है और भगवान विष्णु के वामन अवतार की विधि अनुसार पूजा करता है तो उसे वाजपेई यज्ञ का फल प्राप्त होता है। उन भक्तों के पाप का नाश होता है साथ ही साथ मृत्यु के बाद मुक्ति प्राप्त होता है।

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