Tuesday, 16 April 2024

भगवान श्री कृष्ण क्यों हमेशा सिर पर मोर पंख और कमर पर बांसुरी रखा करते थे? जानिए इसका राज़

बहुत ही जल्दी कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आने वाला है यह पर्व हर साल भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की…

भगवान श्री कृष्ण क्यों हमेशा सिर पर मोर पंख और कमर पर बांसुरी रखा करते थे? जानिए इसका राज़

बहुत ही जल्दी कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आने वाला है यह पर्व हर साल भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल 30 अगस्त 2021 को कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाएगा। पूरे देश और दुनिया में जोरो शोरो से तैयारियां चल रही है। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए इस साल भी जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जाएगा।

सिर पर क्यों धारण करते थे मोर पंख
बहुत लोगों को लगता है कि भगवान श्री कृष्ण को मोर पंख अति प्रिय था इसलिए वह मोर पंख अपने सिर पर धारण किया करते थे। भगवान श्री कृष्ण का कोई भी चित्र आपको बिना मोर पंख के नहीं मिलेगा।

लेकिन इसके दो कारण है पहला कारण यह कि जब भगवान श्री कृष्ण नंद गांव में रहते थे तो वह गाय चराने के लिए जंगलों में जाया करते थे। तभी वहां मोर उनके चारों तरफ पंख फैलाकर नाचा करते थे। तभी से श्री कृष्ण को गाय और मोरों से लगाव हो गया था।

लेकिन दूसरा कारण यह है कि भगवान श्रीकृष्ण की कुंडली में कालसर्प का दोष बताया गया था। इसलिए इस दोष से मुक्ति पाने के लिए श्री कृष्ण हमेशा ही अपने मुकुट पर मोर पंख को सजाया करते थे।

मुरली बजा कर दिया कर दी थी यह संदेश
भगवान श्री कृष्ण हमेशा से ही अपने पास मुरली रखा करते थे। इसकी वजह यह है कि वह मुरली उन्हें यशोदा मैया ने उपहार में दी थी। मान्यता यह है कि इतनी मीठी और मधुर मुरली बजाया करते थे, इसलिए उनकी मुरली की धुन सुनकर व्यक्ति किसी अलौकिक दुनिया में खो जाया करता था। वह जिसके बाद कान्हा जी इस मुरली को बजा कर यह संदेश दिया करते थे कि हमेशा हमें मीठा और सच बोलना चाहिए। साथ ही साथ सबसे अच्छा व्यवहार रखना चाहिए।

हिंदू धर्म में मुरली की दूसरी खासियत यह बताई गई है कि इसमें कोई गांठ नहीं होती है। इसलिए आप जब चाहे इसे बजा सकते हैं। इसे बजाकर कान्हा जी यह संदेश दिया करते थे कि लोगों को भी अपने मन में दूसरों के प्रति मनमुटाव या गांठ नहीं रखनी चाहिए और ना ही बिना वजह बोलना चाहिए।

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