Thursday, 18 April 2024

शादी से पूर्व क्यों ज़रूरी है वर वधु की कुण्डली मिलाना ?? क्या है 36 गुणों के मीलान का महत्व

डॉ डी के गर्ग- आजकल पंडित से जन्म पत्री मिलवाने का रिवाज है जिसके चलते योग्य वर वधू शादी के…

शादी से पूर्व क्यों ज़रूरी है वर वधु की कुण्डली मिलाना  ?? क्या है 36 गुणों के मीलान का महत्व

डॉ डी के गर्ग-

आजकल पंडित से जन्म पत्री मिलवाने का रिवाज है जिसके चलते योग्य वर वधू शादी के बंधन मे बंधने से रह जाते हैं क्योंकि इनकी जन्म पत्री नहीं मिल रही, इस अंधविश्वास मे स्वयं को वैज्ञानिक, विद्वान, पढे लिखे कहने वाले भी शामिल है.

इस प्रथा की वास्तविकता की पड़ताल करते हैं.
पूर्व मे प्रचलन – विवाह पूर्व वर और वधू का माता पिता आपस मे मिलते हैं, एक दूसरे के परिवार, खानदान का पता लगाते है. बायो डेटा को बार बार ध्यान से पढ़ते हैं. फिर बच्चों से मिलते हैं. सर्वसम्मति से पूर्ण परिवार के संतुष्ट होने पर बच्चों को एक दूसरे से मिलवाते है. बातचीत आगे बढ़ती है, ‘ हाँ’ होने पर फिर भी किसी ना किसी बहाने से 2-3 बार मिलते हैं. जन्म पत्री नहीं मिलाई जाती सिर्फ उम्र देखते हैं. इस तरह शादी हो जाती है.

वर्तमान स्थिति
प्रेम विवाह में तो सीधे विवाह किया जाता है, इसमें खानदान, उम्र, या कोई योग्यता का प्रश्न नहीं उठता. दो मुख्य पक्ष तैयार है बाकी परिवार इस निर्णय को मोहर लगाने के लिए बाध्य है.

अन्य मामलों मे पंडित की पत्री और कंप्युटर बाबा की पत्री का बड़ा रोल होता है. ऐसा विस्वास है कि पत्री द्वारा गुण मिलाए जाने से ये पक्का हो जाता है कि कौन सी शादी कितनी सफल होगी ,शादी के बाद वर वधु का आपसी तालमेल कैसा रहेगा आदि।

लेकिन फिर भी पति पत्नी के मध्य रोज रोज की लडाई रहती है इसके लिए भाग्य को दोष देते हैं.

विशलेषण – सच ये है की यह किसी की जन्म कुंडली देखने मात्रा से मालूम नहीं चल सकता। मनुष्य वास्तव में एक अद्भुत प्राणी है जिसका मासूम चेहरा भी दम्भ और दुराचार वाला हो सकता है और डरावना चेहरा वाला व्यक्ति मोमल ह्रदय वाला भी । जन्म कुंडली किसी का भविष्य नहीं बता सकती. इसलिए दो परिवारों के मध्य सम्बंध स्थापित करने से पूर्व बुजुर्ग का अनुभव जिसको wisdom भी कह सकते हैं बहुत कारगर है… उनके द्वारा की जाने वाली जांच जिसमें योग्यता , खानदान, व्यवहार ,कार्य का अनुभव,अच्छा स्वास्थय इत्यादि की जानकारी ली जाती है, परिवार को एक सूत्र मे बांधने मे ज्यादा सहायक रहा है.

जन्म पत्री मिलाने का रिवाज सिर्फ भारत में है जहा आज भी पढ़ी लिखी जनता आज भी अनपढ़ पंडितो के जाल से बहार नहीं निकल पाती है ,पंडित ये तो बता देते है की ३६ में २४ गुण मिल गए लेकिन ये नहीं बताया जाता की कौन से १२ गुण नहीं मिले। पंडित को ये भी नहीं मालूम कि ये 36 गुण कौन कौन से है.

ये 36 गुण इस प्रकार हैं
मुख्य रूप से ३६ गुणों की बात की जाये तो ये होने चाहिए –
1.पांच ज्ञानेद्रियां -आंख,नाक, कान,जीभ,त्वचा,
ये इन्द्रियां ठीक होनी चाहिए. दोनों आंखे, कान, सफेद दाग की बीमारी ना हो आदि.
2पांच कर्मेन्द्रियां- गुदा,लिंग,हाथ,पैर,वचन
ये कर्मेन्द्रियो है जो कि स्वस्थ अवस्था मे हो, वचन से मृदु भाषी हो, हाथ पैर कमजोर ना हो, कार्य शील हो आदि

3 चार प्रकार के बल होते है – साम , दाम, दंड और भेद
ये हर मनुष्य के जीवन मे सफलता का आधार है.

4.बुद्धि के यह आठ अंग हैं- सुनने की इच्छा, सुनना, सुनकर धारण करना, ऊहापोह करना, अर्थ या तात्पर्य को ठीक ठीक समझना, विज्ञान व तत्वज्ञान।

ये गुण बातचीत के देखे परखें जाते हैं.
5.राजनीति के चौदह गुण हैं– देशकाल का ज्ञान, दृढ़ता, कष्टसहिष्णुता, सर्वविज्ञानता, दक्षता, उत्साह, मंत्रगुप्ति, एकवाक्यता, शूरता, भक्तिज्ञान, कृतज्ञता, शरणागत वत्सलता, अधर्म के प्रति क्रोध और गंभीरता।

ये गुण भी बातचीत से मालूम होते हैं इसलिए राजनीति की बात करते हैं, और भी अन्य विषय उठाए जाते हैं.

इस तरह 36 गुण मिलाए.
वैसे तो हमारे शादी शुदा मित्र बता सकते है की कितने गुण उनके अपनी पत्नी के साथ मिल रहे है ??

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