Saturday, 25 May 2024

कबीना मंत्री के ‘चहेते’ अधिकारी के कतरे गए पंख!

नोएडा (अरुण सिन्हा)। तकरीबन 2 दशकों से जनपद गौतमबुद्घनगर में कारखाना विभाग की अहम कुर्सी पर कुंडली मारे बैठे ओपी…

नोएडा (अरुण सिन्हा)। तकरीबन 2 दशकों से जनपद गौतमबुद्घनगर में कारखाना विभाग की अहम कुर्सी पर कुंडली मारे बैठे ओपी भारती को शासन ने अंतत: तीनों पदों से हटा दिया है।

उत्तर प्रदेश श्रम विभाग के उप सचिव सत्यवान सिंह ने कार्यालय आदेश जारी करके इसकी जानकारी दी है। आदेश में उन्होंने बताया कि ओपी भारती को जनपद गौतमबुद्घनगर के उपनिदेशक (कारखाना) तथा गाजियाबाद में उपनिदेशक (कारखाना) के अतिरिक्त प्रभार से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। इसके अलावा निदेशक (कारखाना) के पद से भी उनको हटा दिया गया है।

बता दें कि ओपी भारती गौतमबुद्घनगर जनपद में पिछले तकरीबन 2 दशकों से विभिन्न पदों पर जमे हुए हैं। उनको वर्तमान सरकार के एक काबीना मंत्री का कई वर्षों से वरदहस्त प्राप्त है। इसके पूर्व में वह मंत्री बहुजन समाज पार्टी में भी न सिर्फ काबीना मंत्री थे बल्कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के काफी करीबी रहे थे। उन्हें मंत्री के संरक्षण के कारण ओपी भारती कई वर्षों से इस महत्वपूर्ण पदों पर कुंडली मारे बैठे थे। यही नहीं उनको निदेशक (कारखाना) उत्तर प्रदेश की भी जिम्मेदारी सौंपी गई तथा गौतमबुद्घनगर के अलावा जनपद गाजियाबाद में उप निदेशक (कारखाना) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया था।

विभागीय सूत्र बताते हैं कि गाजियाबाद की अवंतिका सोसायटी में रहने वाले ओपी भारती पर समय-समय पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे। लेकिन उन पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।

बताया जाता है कि श्री भारती समाजवादी पार्टी से अपने गृह जनपद गाजीपुर से विधानसभा चुनाव लडऩे की भी तैयारी कर रहे हैं। लेकिन अचानक शासन द्वारा उनके पर काट जाने से विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त है।

अब भांजे का क्या होगा

नोएडा। नोएडा में श्रम विभाग में ओपी भारती का कथित भांजा तृतीय श्रेणी कर्मचारी है जो अपने मामा के बूते पर पिछले कई वर्षो से यहां पर कुंडली मारे कुर्सी पर बैठा है।  समय-समय पर भाजे की करतूतों की कई शिकायतें भी विभाग के बड़े अधिकारियों को मिलती रहती है लेकिन मामा के ऊंचे राजनीतिक रसूख तथा पद के कारण उस पर कोई हाथ डालने की हिम्मत नहीं उठा पाता था, लेकिन अब मामा के पर कतरे जाने के बाद से भांजे का क्या होगा, इसको लेकर विभाग तथा श्रमिक संगठनों के पदाधिकारियों में तरह-तरह की चर्चा चल रही है

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