कई ओवर ग्राउंड वर्कर्स को गिरफ्तार किया गया और सामने आया कि विदेश में बैठे हैंडलर्स एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए स्थानीय पेशेवरों डॉक्टर्स, स्टूडेंट्स और मौलवियों से लगातार संपर्क में थे। यही छोटा सुराग आगे चलकर फरीदाबाद तक फैले ‘डॉक्टर्स ऑफ टेरर’ मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने वाला था।

देश की राजधानी दिल्ली का लाल किला सोमवार शाम अचानक दहल उठा। शहर के ऐतिहासिक इलाके में हुई कार ब्लास्ट में 12 लोगों की जान चली गई और राजधानी में खौफ का माहौल छा गया। शुरुआती जांच में यह साफ नहीं हो पाया कि धमाका जानबूझकर किया गया या किसी अन्य कारण से हुआ। लेकिन अगर इस घटनाक्रम से ठीक 20 दिन पहले दिल्ली से करीब 800 किलोमीटर दूर हुए सुरागों को अनदेखा किया जाता, तो देश शायद उससे भी बड़े आतंकी हमले का शिकार हो जाता। सच कहें तो, जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक छोटी लेकिन सतर्क जांच ने इस बड़े खतरे से भारत को बचा लिया। यही है ‘डॉक्टर्स ऑफ टेरर’ की कहानी, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं।
जम्मू-कश्मीर पुलिस की जांच अक्टूबर के अंतिम हफ्ते में शुरू हुई, लेकिन इसके पीछे की कहानी किसी थ्रिलर से कम नहीं। श्रीनगर के बाहरी इलाकों में 18 अक्टूबर को लगाए गए जैश-ए-मोहम्मद के धमकी भरे पोस्टर्स ने इस जांच का पहला सुराग दिया। पोस्टर्स में सीधे सुरक्षाबलों को निशाना बनाने की धमकी दी गई थी। पुलिस ने तुरंत केस दर्ज किया और गहन तफ्तीश शुरू की। जांच ने जल्द ही एक बड़े जाल की परतें उजागर कीं। कई ओवर ग्राउंड वर्कर्स को गिरफ्तार किया गया और सामने आया कि विदेश में बैठे हैंडलर्स एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए स्थानीय पेशेवरों डॉक्टर्स, स्टूडेंट्स और मौलवियों से लगातार संपर्क में थे। यही छोटा सुराग आगे चलकर फरीदाबाद तक फैले ‘डॉक्टर्स ऑफ टेरर’ मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने वाला था।
जांच के दौरान खुलासा हुआ कि भारत में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश रची जा रही थी। इस योजना के पीछे डी गैंग यानी जैश का खतरनाक ‘डॉक्टर्स गैंग’ सक्रिय था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पोस्टर मामले को बेहद गंभीरता से लिया और गहन जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी तफ्तीश के आधार पर कई ओवर ग्राउंड वर्कर्स को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में ऐसे कई राज़ उजागर हुए, जो सीधे डॉक्टरों से जुड़े थे। जांच की यह डोर धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और हरियाणा के फरीदाबाद तक पहुंची। इसके बाद गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू हुआ। 6 नवंबर को जम्मू-कश्मीर और यूपी पुलिस की संयुक्त टीम ने सहारनपुर के डॉक्टर आदिल अहमद राठर को गिरफ्तार किया। उनके निशानदेही पर फरीदाबाद से मुजम्मिल अहमद को भी पकड़ा गया, जिससे बड़े आतंकी जाल का पर्दाफाश संभव हुआ।
डॉक्टर आदिल और मुजम्मिल से पूछताछ के दौरान सामने आया कि उनके पास लगभग 2,900 किलोग्राम विस्फोटक छिपा हुआ था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तुरंत हरियाणा पुलिस को सूचित किया, और फरीदाबाद में यह विशालकाय विस्फोटक बरामद किया गया। यह ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद पुलिस की संयुक्त कार्रवाई का नतीजा था। मुजम्मिल, जो पहले श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद समर्थक पोस्टर लगाने के मामले में वांछित था, ने अपने फरीदाबाद घर में विस्फोटकों का जाल छिपा रखा था। इसी जांच से जैश के ‘डी गैंग’ यानी डॉक्टरों की खतरनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ।फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल में मुजम्मिल शकील, डॉ. आदिल अहमद राठर और डॉ. शाहीन शाहिद को गिरफ्तार किया गया, लेकिन दिल्ली ब्लास्ट में शामिल डॉक्टर उमर वहीं से बच निकला। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में विस्फोट पैनिक में हुआ।
जांच ने यह भी उजागर किया कि ‘डॉक्टर टेरर’ मॉड्यूल सीधे विदेशी हैंडलर्स से जुड़ा हुआ था। उमर मोहम्मद और अन्य आतंकी डॉक्टरों को टेलीग्राम और अन्य एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए लगातार निर्देश मिलते थे। इन हैंडलर्स ने फंडिंग, हथियार तस्करी और रिक्रूटमेंट के लिए सोशल और चैरिटेबल एक्टिविटीज की आड़ बनाई थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस की सतर्कता और समय पर कार्रवाई ने देश को दिल्ली से भी बड़े आतंकवादी हमले से बचा लिया। इस कार्रवाई के बाद ‘डॉक्टर्स गैंग’ में हड़बड़ी और पैनिक का माहौल पैदा हो गया। फिलहाल, कार ब्लास्ट में शामिल उमर महमूद की मौत की पुष्टि डीएनए टेस्ट से की जाएगी। इसके लिए उसकी मां का डीएनए सैंपल लिया गया है, जबकि उसके भाइयों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।