भजन लाल भावी सीएम होंगे पार्टी ने दिए थे संकेत, मगर कोई भांप नहीं सका
भजन लाल भावी सीएम
भारत
चेतना मंच
13 Dec 2023 12:23 AM
भजन लाल भावी सीएम: राजस्थान में भी बीजेपी ने सभी को चौंकाते हुए एक नए नाम भजन लाल शर्मा को नया सीएम बना दिया। पहली बार के विधायक भजन लाल का नाम भले ही मीडिया और लोगों के लिए चौंकाने वाला हो, लेकिन जो लोग पार्टी संगठन या संघ से से जुड़े हैं, वो उनके नाम से अच्छी तरह वाकिफ हैं।
भले ही भजन लाल शर्मा के नाम की घोषणा आज हुई हो, लेकिन पार्टी द्वारा पूर्व में दिए गए संकेतों की विवेचना करें, तो यही लगता है आलाकमान ने पहले ही इस बार कमान भजन लाल को देने का मन बना लिया था। उन्होंने इसके संकेत भी दिए थे, लेकिन कोई भाँप नहीं सका।
भजन लाल भावी सीएम का नाम पहले ही सोच लिया था हाइकमान ने
राजस्थान के भावी मुख्यमंत्री भजन लाल का नाम यूं ही नहीं सामने आया, बल्कि पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड़ड़ा की तिकड़ी ने कई कारणों से पहले ही तय कर रखा था। त्रिमूर्ति ने इसके संकेत भी दिए थे, लेकिन कोई इन संकेतों को समझ नहीं सका। भजन लाल शर्मा का नाम पहले ही तय होने के संकेत जिन बातों से मिलते हैं कि उनमें पहली बात ये है कि जिस होटल में पर्यवेक्षक रुके थे, उसके पास भजन लाल शर्मा का बड़ा सा होर्डिंग टांग दिया गया था।
दूसरा संकेत पार्टी ने उन्हें इस बार के चुनावों में पहली बार टिकट देकर दे दिया। संगठन के अनुभवी चेहरे भजन लाल को न सिर्फ टिकट दिया गया, बल्कि टिकट भी भजन लाल के गृह नगर से न देकर उन्हें एक ऐसी सीट से दिया गया, जहां से उनकी जीत सुनिश्चित हो सके। ताकि उनके सीएम के तौर पर चयन में कोई बाधा न आए।
इसके लिए जयपुर की सांगानेर सीट से सिटिंग एमएलए और वसुंधरा राजे सिंधिया के सहयोगी अशोक लाहोटी का टिकट काटकर उन्हें टिकट दिया गया। लेकिन कोई बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की इस रणनीति को भांप नहीं सका। इसके अलावा एमपी और छत्तीसगढ़ के नामों ने भी ये तय कर दिया था कि राजस्थान में भी एक नए चेहरे को कमान दी जाएगी।
ये हैं वजहें जिनके कारण उन्हें इस पद के लिए चुना गया, भजन लाल भावी सीएम
भजन लाल शर्मा को इस पद के लिए चुने जाने के पीछे कई कारण हैं। पहला कारण तो ये है कि वो संघ, पार्टी संगठन और एबीवीपी (ABVP) से जुड़े रहे हैं, इसलिए उनकी संगठन में पकड़ मजबूत है। दूसरी वजह ये है कि पार्टी को आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए इस बार ब्राह्मण चेहरे को सामने रखना था। जिससे हिन्दी भाषी प्रदेशों को एक संदेश देकर, इसका लाभ लिया जा सके।
तीसरी वजह जो बात उनके पक्ष में गई, वो ये है कि उनका किसी गुट विशेष से कोई संबंध नहीं है। इसलिए वो सर्व स्वीकार्य नेता थे, उनके नाम पर किसी को कोई आपत्ति नहीं थी। चौथी बात जिसका उनको लाभ मिला वो ये है कि वसुंधरा राजे पिछले कुछ समय से शीर्ष नेतृत्व को आंखे दिखाने की कोशिश कर रहीं थीं और पार्टी को उन्हें दरकिनार करना था। साथ ही ये भी ध्यान रखना था कि इससे पार्टी में गुटबाजी न हो।
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